Jab Se Mohi Nand Nandan Drashti Padyo Mai

मोहन की मोहिनी
जब से मोहि नँद नंदन, दृष्टि पड्यो माई
कहा कहूँ या अनुपम छवि, वरणी नहीं जाई
मोरन की चन्द्रकला शीश मुकुट सोहे
केसर को तिलक भाल तीन लोक मोहे
कुण्डल की झलक तो, कपोलन पर छाई
मानो मीन सरवर तजि, मकर मिलन आई
कुटिल भृकुटि तिलक भाल, चितवन में टौना
खंजन अरु मधुप मीन, भूले मृग छोना
छुद्र घंटि किंकिनी की, मधुर ध्वनि सुहाई
गिरधर के अंग अंग, ‘मीराँ’ बलि जाई

Bansiwala Aajo Mhare Des

विरह व्यथा
बंसीवाला आजो म्हारे देस, थाँरी साँवरी सूरति वालो भेष
आऊगा कह गया साँवरा, कर गया कौल अनेक
गणता गणता घिस गई म्हारी, आँगुलिया की रेख
तेरे कारण साँवराजी, धर लियो जोगण भेष
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, आओ मिटे कलेस

Rana Ji Ab Na Rahungi Tori Hatki

वैराग्य
राणाजी! अब न रहूँगी तोरी हटकी
साधु-संग मोहि प्यारा लागै, लाज गई घूँघट की
पीहर मेड़ता छोड्यो अपनो, सुरत निरत दोउ चटकी
सतगुरु मुकर दिखाया घट का, नाचुँगी दे दे चुटकी
महल किला कुछ मोहि न चहिये, सारी रेसम-पट की
भई दिवानी ‘मीराँ’ डोलै, केस-लटा सब छिटकी

Tera Koi Nahi Rokanhar

मग्न मीरा
तेरा कोइ नहिं रोकनहार, मगन होय मीराँ चली
लाज सरम कुल की मरजादा, सिर से दूर करी
मानापमान दोऊ घर पटके, निकसी हूँ ज्ञान गली
ऊँची अटरिया लाल किवड़िया, निरगुण सेज बिछी
पचरंगी झालर सुभ सोहे, फूलन फूल कली
बाजूबंद कठूला सोहे, माँग सिंदुर भरी
पूजन थाल हाथ में लीन्हा, सोभा अधिक भली
सेज सुखमणा’मीराँ’ सोवे, सुभ है आज घरी
तुम जावो राणा घर अपणे, मेरी तेरी नाहिं सरी

Manmohan Shyam Hamara

श्याम की पाती
मनमोहन श्याम हमारा
निर्मल नीरा जमुन को त्याग्यौ, जाय पियौ जल खारा
आप तो जाय द्वारका छाए, हमें छाँड़ि माझ धारा
लिखि लिखि पाती भेजुँ स्याम कूँ, बाँचौ प्रीतम प्यारा
‘मीराँ’ के प्रभु हरि अविनासी, जीवन प्राण आधारा

Shyam Main To Thare Rang Rati

श्याम से प्रीति
स्याम मैं तो थाँरे रँग राती
औराँ के पिय परदेस बसत हैं, लिख लिख भेजे पाती
मेरा पिया मेरे हिरदे बसत है, याद करूँ दिन राती
भगवा चोला पहिर सखीरी, मैं झुरमट रमवा जाती
झुरमुट मे मोहिं मोहन मिलिया, उण से नहिं सरमाती
और सखी मद पी पी माती, बिन पिये मैं मदमाती
प्रेम भट्ठी को मद पीयो ‘मीराँ’, छकी फिरै दिन राती

Aeri Main To Darad Diwani

विरह व्यथा
ऐरी मैं तो दरद दिवानी, मेरो दरद न जाने कोय
घायल की गति घायल जाने, जो कोई घायल होय
जोहरी की गति जोहरी जाने, जो कोई जोहरी होय
सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस विध होय
गगन मँडल पर सेज पिया की, किस विध मिलणा होय
दरद की मारी बन-बन डोलूँ, वैद मिल्यो नहिं कोय
‘मीराँ’ की प्रभु पीर मिटेगी, जो वैद साँवरो होय

Naina Nipat Shyam Chabi Atke

श्याम की मोहिनी
नैना निपट श्याम छबि अटके
देखत रूप मदनमोहन को, पियत पीयूष न भटके
टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली, टेढ़ी पाग लर लटके
‘मीराँ’ प्रभु के रूप लुभानी, गिरिधर नागर नट के

Main To Giridhar Aage Nachungi

समर्पण
मैं तो गिरिधर आगे नाचूँगी
नाच नाच मैं पिय को रिझाऊँ, प्रेमी जन को जाचूँगी
प्रेम प्रीति के बाँध घुँघरूँ, सुरति की कछनी काछूँगी
लोक लाज कुल की मर्यादा, या मैं एक न राखूँगी
पिया के चरणा जाय पडूँगी, ‘मीराँ’ हरि रँग राचूँगी

Jaao Hari Nirmohiya Re

स्वार्थ की प्रीति
जाओ हरि निरमोहिया रे, जाणी थाँरी प्रीत
लगन लगी जब और प्रीत थी, अब कुछ उलटी रीत
अमृत पाय जहर क्यूँ दीजे, कौण गाँव की रीत
‘मीराँ’ कहे प्रभु गिरधर नागर, आप गरज के मीत