Ab To Nibhayan Saregi Rakh Lo Mhari Laj

शरणागति
अब तो निभायाँ सरेगी, रख लो म्हारी लाज
प्रभुजी! समरथ शरण तिहारी, सकल सुधारो काज
भवसागर संसार प्रबल है, जामे तुम ही जहाज
निरालम्ब आधार जगत्-गुरु, तुम बिन होय अकाज
जुग जुग भीर हरी भक्तन की, तुम पर उनको नाज
‘मीराँ’ सरण गही चरणन की, पत राखो महाराज

Jaago Bansi Ware Lalna

प्रभाती
जागो बंसीवारे ललना, जागो मोहन प्यारे
रजनी बीती भोर भयो है, घर घर खुले किवारे
गोपी दही मथत सुनियत है, कँगना के झनकारे
उठो लालजी भोर भयो है, सुर नर ठाड़े द्वारे
ग्वाल बाल सब करत कुलाहल, जय जय सबद उचारे
माखन रोटी करो कलेवा, गउवन के रखवारे
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, शरणागत कूँ तारे

Namo Namo Tulsi Maharani

तुलसी की महिमा
नमो नमो तुलसी महारानी, नमो नमो हरि की पटरानी
जाको दरस परस अघ नासे, महिमा वेद पुराण बखानी
साखा पत्र मंजरी कोमल, श्री पति चरण-कमल लपटानी
धन्य आप ऐसो व्रत कीन्हो, सालिगराम के शीश चढ़ानी
छप्पन भोग धरे हरि आगे, तुलसी बिन प्रभु एक न मानी
प्रेम प्रीत कर हरि वश कीन्हे, साँवरी सूरत ह्रदय समानी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, भक्ति दान दीजै महारानी

Barse Badariya Sawan Ki

प्रतीक्षा
बरसे बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की
नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, आनँद मंगल गावन की

Mere Ghar Aao Sundar Shyam

विरह व्यथा
मेरे घर आवो सुन्दर श्याम
तुम आया बिन सुख नहीं मेरे, पीरी परी जैसे पान
मेरे आसा और न स्वामी, एक तिहारो ही ध्यान
‘मीराँ’ के प्रभु वेग मिलो अब, राखोजी मेरो मान

Rana Ji Ruthe To Mharo Kai Karsi

गोविंद का गान
राणाजी रूठे तो म्हारो काई करसी, मैं तो गोविन्द का गुण गास्याँ
राणाजी भले ही वाँको देश रखासी, मैं तो हरि रूठ्याँ कठे जास्याँ
लोक लाज की काँण न राखाँ मैं तो हरि-कीर्तन करास्याँ
हरि-मंदिर में निरत करस्याँ, मैं तो घुँघरिया घमकास्याँ
चरणामृत को नेम हमारो, मैं तो नित उठ दरसण जास्याँ
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, मैं तो भवसागर तिर जास्याँ

Ho Ji Hari Kit Gaye Neha Lagay

विरह व्यथा
हो जी हरि!कित गए नेहा लगाय
नेह लगाय मेरो मन हर लियो, रस-भरी टेर सुनाय
मेरे मन में ऐसी आवै, प्राण तजूँ विष खाय
छाँड़ि गए बिसवासघात करि, नेह की नाव चढ़ाय
‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, रहे मधुपुरी छाय

Ab To Hari Nam Lo Lagi

चैतन्य महाप्रभु
अब तो हरी नाम लौ लागी
सब जग को यह माखन चोरा, नाम धर्यो बैरागी
कित छोड़ी वह मोहक मुरली, कित छोड़ी सब गोपी
मूँड मुँडाई डोरी कटि बाँधी, माथे मोहन टोपी
मात जसोमति माखन कारन, बाँधे जाके पाँव
श्याम किसोर भयो नव गौरा, चैतन्य जाको नाँव
पीताम्बर को भाव दिखावे, कटि कोपीन कसै
गौर कृष्ण की दासी ‘मीराँ’ रसना कृष्ण बसै

Jogiya Kab Re Miloge Aai

मिलने की आतुरता
जोगिया, कब रे मिलोगे आई
तेरे कारण जोग लियो है, घर-घर अलख जगाई
दिवस न भूख, रैन नहिं निंदियाँ, तुम बिन कछु न सुहाई
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, मिल कर तपन बुझाई

Nahi Aiso Janam Barambar

नश्वर जीवन
नहीं ऐसो जनम बारम्बार
क्या जानूँ कछु पुण्य प्रगटे, मानुसा अवतार
बढ़त पल पल घटत छिन-छिन, जात न लागे वार
बिरछ के ज्यों पात टूटैं, लगे नहीं पुनि डार
भौसागर अति जोर कहिये, विषय ऊँडी धार
राम नाम का बाँध बेड़ा, उतर परले पार
साधु संत महन्त ज्ञानी, चालत करत पुकार
दासी मीराँ लाल गिरिधर, जीवणाँ दिन चार