Main Apno Man Hari So Joryo

मोहन से प्रीति
मैं अपनो मन हरि सों जोर्यो, हरि सों जोरि सबनसो तोर्यो
नाच नच्यों तब घूँघट कैसो, लोक-लाज डर पटक पिछोर्यो
आगे पाछे सोच मिट गयो, मन-विकार मटुका को फोर्यो
कहनो थो सो कह्यो सखी री, काह भयो कोऊ मुख मोर्यो
नवल लाल गिरिधरन पिया संग, प्रेम रंग में यह तन बोर्यो
‘परमानंद’ प्रभु लोग हँसन दे, लोक वेद तिनका ज्यों तोर्यो

Sakhi Ye Badbhagi Hai Mor

बड़भागी नंद यशोदा
सखी! ये बड़भागी हैं मोर
जेहि पंखन को मुकुट बन्यो है धर लियो नंद किशोर
बड़ भागी अति नंद यशोदा, पुण्य किये भर जोर
शिव विरंचि नारद मुनि ज्ञानी, ठाड़े हैं कर जोर
‘परमानन्द’ दास को ठाकुर, गोपियन के चितचोर

Ari Sakhi Rath Baithe Giridhari

रथ-यात्रा
अरी सखि रथ बैठे गिरिधारी
राजत परम मनोहर सब अँग, संग राधिका प्यारी
मणि माणिक हीरा कुन्दन से, डाँडी चार सँवारी
अति सुन्दर रथ रच्यो विधाता, चमक दमक भी भारी
हंस गति से चलत अश्व है, उपजत है छबि न्यारी
विहरत वृन्दावन बीथिन में, ‘परमानन्द’ बलिहारी

Kaha Karun Vaikuntha Hi Jaaye

ब्रज महिमा
कहा कँरू वैकुण्ठ ही जाये
जहाँ नहिं नंद जहाँ न जसोदा, जहाँ न गोपी ग्वाल न गायें
जहाँ न जल जमुना को निर्मल, जहँ नहिं मिले कदंब की छायें
जहाँ न वृन्दावन में मुरली वादन सबका चित्त चुराये
‘परमानंद’ प्रभु चतुर ग्वालिनि, व्रज तज मेरी जाय बलाये 

Chalo Ri Mile Natwar Nand Kishor

श्री राधा कृष्ण
चलोरी, मिले नटवर नंदकिशोर
श्रीराधा के सँग विहरत है सघन कुंज चितचोर
तैसिय छटा घुमड़ि चहुँ दिसि तें, गरजत है घनघोर
बिजुरी चमक रही अंबर में, पवन चलत अति जोर
पीत-वसन में श्याम, राधिका नील-वसन तन गोर
सदा विहार करो ‘परमानँद’, बसो युगल मन मोर

Gokul Me Bajat Aha Badhaai

श्रीकृष्ण प्राकट्य
गोकुल में बाजत अहा बधाई
भीर भई नन्दजू के द्वारे, अष्ट महासिद्धि आई
ब्रह्मादिक रुद्रादिक जाकी, चरण-रेनु नहीं पाई
सो ही नन्दजू के पूत कहावत, कौतुक सुन मोरी माई
ध्रुव, अमरीष, प्रह्लाद, विभीषण, नित-नित महिमा गाई
सो ही हरि ‘परमानँद’ को ठाकुर, ब्रज प्रसन्नता छाई 

Jasoda Tero Bhagya Kahyo Na Jay

यशोदा का भाग्य
जसोदा तेरो भाग्य कह्यो ना जाय
जो मूरति ब्रह्मादिक दुर्लभ, सो ही प्रगटी आय
शिव, नारद, सनकादिक, महामुनि मिलवे करत उपाय
जे नंदलाल धूरि धूसर वपु, रहत कंठ लपटाय
रतन जटित पौढ़ाय पालने, वदन देखि मुसकाय
बलिहारी मैं जाऊँ लाल पे, ‘परमानंद’ जस गाय

Nand Grah Bajat Aaj Badhai

श्रीकृष्ण प्राकट्य
नंद गृह बाजत आज बधाई
जुट गई भीर तभी आँगन में, जन्मे कुँवर कन्हाई
दान मान विप्रन को दीनो, सबकी लेत असीस
पुष्प वृष्टि सब करें, देवगण जो करोड़ तैंतीस
व्रज-सुंदरियाँ सजी धजी, कर शोभित कंचन थाल
‘परमानंद’ प्रभु चिर जियो, गावत गीत रसाल

Nand Ko Lal Chale Go Charan

गोचारण
नंद को लाल चले गोचारन, शोभा कहत न आवे
अति फूली डोलत नंदरानी, मोतिन चौक पुरावे
विविध मूल्य के लै आभूषण, अपने सुत पहिरावे
आनँद में, भर गावत मंगल गीत सबहिं मन भावे
घर घर ते सब छाक लेत है, संग सखा सुखदाई
गौएँ हाँक आगे कर लीनी, पाछे मुरली बजाई
कुण्डल लाल कपोलन सुन्दर, वनमाला गल छाई
‘परमानन्द’ प्रभु मदनमोहन की सोभा बरनी न जाई 

Nand Mahar Ghar Bajat Badhai

श्रीकृष्ण प्राकट्य
नंद महर घर बजत बधाई,
बड़े भाग्य जाये सुत जसुदा, सुनि हरषे सब लोग लुगाई
भाँति भाँति सो साज साजि सब, आये नंदराय गृह धाई
नाचहिं गावहिं हिय हुलसावहिं, भरि-भरि भाण्ड के लई मिठाई
भयो अमित आनन्द नंदगृह, करहिं महर सबकी पहुनाई
‘परमानँद’ छयो त्रिभुवन में, चिरजीवहु यह कुँवर कन्हाई