Anant Guno Ke Jo Sagar

प्रभु संकर्षण वंदना
अनन्त गुणों के जो सागर, प्रभु संकर्षण को नमस्कार
मस्तक उनके जो हैं सहस्त्र, एक ही पर पृथ्वी का अधार
देवता असुर गन्धर्व, सिद्ध, मुनिगण भी पाये नहीं पार
एक कान में कुण्डल जगमगाय, शोभित है अंग पे नीलाम्बर
कर हल की मठू पर रखा हुआ, वक्ष:स्थल पे वैजन्ती हार
भगवान कृष्ण के अग्रज की लीला का मन में धरें ध्यान
जो गौर वर्ण बलराम प्रभु, हम को करुणा का करें दान

Aaj Ki Bela Sukhkari

श्री श्री राधा प्राकट्य
आज की बेला सुखकारी
प्रगट भई वृषभानु-नंदिनी, कीरति प्राण-पियारी
गावत सभी बधाई हिलमिल, बरसाने की नारी
अत्यधिक, आनंद महल में बरनत रसना हारी
नौबत बजत और शहनाई, नाचत सखियाँ सारी
नंद यशोदा सुनसुख पायें, हरषे हिय में भारी
भादौ मास, गगन घन छाये, बिजुरी चमके न्यारी
चहुँ ओर है खुशियाँ छाई, ब्रज में प्रिया पधारी 

Udatta Charit Shri Raghav Ka

श्रीराम चरित्र
उदात्त चरित श्री राघव का
कर पाये थोड़ा अनुसरण, आदर्श बने जीवन उसका
शील, शक्ति व सदाचार का, संगम प्रभु का जीवन है
वे सत्वादी स्थित-प्रज्ञ, गम्भीर, गुणों के सागर है
श्री राम धर्म के विग्रह ही अन्यत्र जो मिलना दुर्लभ है
आदर्श पुत्र, भ्राता व मित्र पति की भी वे अभिव्यक्ति है
अधर्म, अनैतिकता के विरुद्ध, संघर्ष राम के जीवन में
वे स्नेह, दया, सुख-सागर हैं, बिठलाँय उन्हें मन-मंदिर में

Karuna Mai He Bhagwati

दुर्गादेवी स्तुति
करुणामयी हे भगवती! सद्बुद्धि दें, संकट हरें
आरूढ़ होती सिंह पर, शुभ मुकुट माथे पर धरें
मरकत मणि सम कान्तिमय, हम जगन्माता को वरें
जिसकी न तुलना हो सके, सौन्दर्य माँ का मोहता
वह गात कंकण, करधनी अरू नूपुरों से गूँजता
माता अधीश्वरी विश्व की, सब देवताओं में प्रमुख
वे अभय करतीं, भोग देतीं और देतीं शांति-सुख
संकट में आये भक्त को माँ विपुल क्षमता दान कर
विजयी बना देतीं उसे फिर, शत्रुओं का शौर्य हर
जगदम्बिके दुर्गे हमारी, दुगर्ति को दूर कर
भगवान् शंकर की प्रिये, माता हमारे विघ्न हर

Krishna Radhika Radha Krishna

युगल स्वरूप
कृष्ण राधिका, राधा कृष्ण, तत्व रूप से दोनों एक
राधे श्याम, श्याम राधिके, भिन्न तथापि अभिन्न विवेक
राधामय जीवन ही कृष्ण का, कृष्णचन्द्र ही जीवन रूप
ऐकमेकता दिव्य युगल की, सदा एकरस तत्व अनूप
दो के बिना न संभव होता, वितरण लीला का आस्वाद
इसीलिये तो तन-मन से वे, लीला करते-निर्विवाद
नित्य नया सुख देने को ही, बना परस्पर ऐसा भाव
एक दूसरे के मन की ही, करते रहते यही स्वभाव
राधा शरण ग्रहण करके ही, सुलभ हमें हो नित्यानंद
मिट जाये मन का भ्रम सारा, मिटे जगत् के सारे द्वंद

Ghutno Ke Bal Chale Kanhaiya

बालकृष्ण
घुटनों के बल चले कन्हैया
बार-बार किलकारी मारे, आनन्दित हो मैया
नवनीत कर में लिये कन्हाई, मुँह पर दही लगाये
मणिमय आँगन में परछार्इं, निरख निरख हर्षाये
तभी गोपियाँ गोदी लेकर, उन्हें चूमना चाहें
बालकृष्ण की अतिप्रिय लीला, अपना भाग्य सराहें

Shrimad Bhagawat Mahima Apar

श्रीमद् भागवत
श्रीमद् भागवत महिमा अपार
नित नवण करे श्रद्धा पूर्वक, भवसागर से हो जाय पार
यद्यपि पुराण अठ्ठारह हैं, स्थान उच्च पर भागवत् का
श्रीकृष्ण-कथा पावन इसमें, वाङमय स्वरूप राधावर का
भगवदीय तत्व का मना सुलभ, होता हमको इसके द्वारा
यह महा-पुराण, हम सुने कहे श्रीकृष्ण-चरित इसमें सारा
सब उपनिषदों का सार यही, आत्मा ब्रह्म है एक रूप
आननद अलौकि मिले यहाँ, अवतारों की गाथा अनूप

Jay Jayati Jay Raghuvansh Bhushan

श्रीराम स्तुति
जय जयति जय रघुवंश भूषण, राम राजिव लोचनम्
त्रय ताप खण्डन जगत् मण्डन ध्यान गम्य अगोचरम्
अद्वैत अविनाशी अनिन्दित, मोद प्रद अरि गंजनम्
भव वारिधि के आप तारक, अन्य जगत् विडम्बनम्
हे दीन दारिद के विदारक! दयासिन्धु कृपा करम्
हे आश्रितों के आप पालक! दु:ख शोक विनाशकम् 

Jivan Main Har Nahi Mane

पराजय
जीवन में हार नहीं माने
घबराये नहीं विषमता से, आती हमको वे चेताने
जो गुप्त सुप्त शक्ति हममें, उसको ही वह जागृत करने
प्रतिकूल परिस्थिति आती है, एक बार पुन: अवसर देने
जब तक ये प्राण रहे तन में, कठिनाई जीते हमें नहीं
हम आश्रय ले परमात्मा का, आखिर में जीतेंगे हम ही

Gyan Mohi Dije Maharani

देवी स्तवन
ज्ञान मोहिं दीजै महारानी
मैं धरूँ तिहारो ध्यान, भक्ति मोहिं दीजै महारानी
मैं करूँ सदा गुणगान, ज्ञान मोहि दीजै महारानी
ब्रह्मा-शिव-हरि तुमको ध्यावे, हे अभीष्ट दानी
ऋषि-मुनि जन सब करे वन्दना, हे माँ कल्याणी
जय दुर्गे दुर्गति, दुःख नाशिनि अमित प्रभा वाली
देवि सरस्वति लक्ष्मी रूपिणि, ललिता, महाकाली
कर्णफूल, केयूर अरु कंगन, रत्न माल सोहे
जगमग किरीट, शीश पर बिन्दी, अर्ध-चन्द्र मोहे
विद्याधरियाँ, सकल सिद्धियाँ, सेवत दिन-राती
खड्ग, चक्र, अंकुश कर धारे, महिषासुर घाती
हे गजवदन षडानन माता, शिवशंकर प्यारी
त्रिपुर-सुन्दरी, शुद्ध स्वरूपा, प्रतिपालन हारी
दुष्ट, कुटिल, पापी होकर भी, मैं संतति तेरी
हे जगदम्बे कष्ट निवारो, हे मैया मेरी