Maa Durga Sare Kashta Hare

दुर्गा वन्दन
माँ दुर्गा सारे कष्ट हरे
साधन ऐसा कोई न अन्य, बस श्रद्धापूर्वक स्मरण करें
माँ के जो बत्तीस नाम बड़े, यदि पाठ करें सहस्त्र बार
चाहे कष्ट बड़ा कैसा भी हो, निश्चित ही उनको करें पार
हिंसक पशु से जो घिर जाये, सौ बार जपें माँ दुर्गा को
रक्षा करती तब माताजी और दूर करे मन से भय को
पूजा कनेर के फूलों से, सौ बार करें नामावली से
तो कष्ट उसे होए न कभी, अरु मुक्ति पाय विपदाओं से

Durga Devi Daya Karahu

श्री दुर्गा स्तुति
दुर्गा देवी दया करहु, दुख दुरित नसाओ
शक्ति हीन संतान परी माँ! आय जगाओ
भये भवानी भीत, आय भय भूत भगाओ
खड्ग हाथ महँ देहु, युद्ध को पाठ पढ़ाओ
कलि कराल कलुषित करहिँ, करि कल्यान कपर्दिनी
मेटो ममता मोह कूँ, महिषासुर मद मर्दिनी

Main Karu Vinati Maa Durga

दुर्गा देवी स्तुति
मैं करूँ विनती माँ दुर्गा, दुर्गति हारिणी महाकाल
सर्वांग सुन्दरी ज्योतिर्मय, कस्तुरी केसर-तिलक भाल
मुस्कान अधर पे मंद-मंद, आभूषण शोभित रत्न माल
मस्तक पर मंडित अर्ध चन्द्र, माँ के वैभव का नहीं पार
सावित्री, सन्ध्या, महादेव, हरिअज वन्दित महिमा अपार
सौभाग्यदायिनी जग-जननी, माँ राग द्वेष अभिमान हरो
हो न्यौछावर जो भी मेरा, माँ मुझ पर कृपाकटाक्ष करो 

Jay Durge Durgati Dukh Harini

दुर्गादेवी स्तवन
जय दुर्गे दुर्गति दुःख हारिणि, शुंभ विदारिणि, मात भवानी
आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणि, जग जननी माँ वेद बखानी
ब्रह्मा, शिव, हरि अर्चन कीनो, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि-ज्ञानी
अष्ट भुजा, कर खंग बिराजे, सिंह सवार सकल वरदानी
‘ब्रह्मानंद’ शरण में आयो, भव-भय नाश करो महारानी 

Main Bhajan Karun Durga Maa Ka

दुर्गादेवी स्तवन
मैं भजन करूँ दुर्गा माँ का
दुर्गुण मेरे सब नष्ट करो, आश्रय केवल ही माता का
सद्बुद्धि प्रदान तू ही करती, सेवक के सारे कष्ट हरे
विघ्नों को माता हर लेती, माँ कठिन कार्य को सुगम करे
जब हानि धर्म की होती हैं, दैत्यों का नाश तुम्हीं करती
ओ स्नेहमयी मेरी माता, भक्तों की विपदा को हरती
माँ का सौन्दर्य अद्वितीय है, शक्ति का कोई पार नहीं
आयुध अनेक धारण करती, दुर्गा माता की बान यहीं
दुर्गम चरित्र है मैया का, देवता न ऋषि-मुनी जान सके
गति है माता की भेदमयी, कोई कैसे उसे बखान सके
हम माया-मोह में फँसे लोग, कुछ राह नहीं दिखती हमको
मंगलमय माँ दर्शन तेरा, हम पुत्र, बचालो माँ सबको

Karuna Mai He Bhagwati

दुर्गादेवी स्तुति
करुणामयी हे भगवती! सद्बुद्धि दें, संकट हरें
आरूढ़ होती सिंह पर, शुभ मुकुट माथे पर धरें
मरकत मणि सम कान्तिमय, हम जगन्माता को वरें
जिसकी न तुलना हो सके, सौन्दर्य माँ का मोहता
वह गात कंकण, करधनी अरू नूपुरों से गूँजता
माता अधीश्वरी विश्व की, सब देवताओं में प्रमुख
वे अभय करतीं, भोग देतीं और देतीं शांति-सुख
संकट में आये भक्त को माँ विपुल क्षमता दान कर
विजयी बना देतीं उसे फिर, शत्रुओं का शौर्य हर
जगदम्बिके दुर्गे हमारी, दुगर्ति को दूर कर
भगवान् शंकर की प्रिये, माता हमारे विघ्न हर

Vedon Ki Mata Gayatri

वेदमाता गायत्री
वेदों की माता गायत्री, सद्बुद्धि हमें कर दो प्रदान
महात्म्य अतुल महादेवी का, शास्त्र पुराण करते बखान
वरदायिनि देवी का विग्रह, ज्योतिर्मय रवि-रश्मि समान
ब्रह्मस्वरूपिणि, सर्वपूज्य, परमेश्वरी की महिमा महान
जो विद्यमान रवि-मण्डल में, उन आदि शक्ति को नमस्कार
अभिलाषा पूर्ण करें, जप लो, गायत्री-मंत्र महिमा अपार  

Kalyan Mai Durga Devi

माँ दुर्गा स्तुति
कल्याणमयी दुर्गादेवी, मैया को मेरा नमस्कार
रक्ताम्बर से जो अंलकृता, गिरिराज सुता को नमस्कार
विष्णुमाया को नमस्कार, हे व्याधि-विनाशिनि नमस्कार
हे कार्तिकेय गणपति माता, चरणों में सादर नमस्कार
शिव वाम भाग में जो स्थित, कैलास-वासिनी नमस्कार
जो सभी प्राणियों में चेतन, उन सर्वव्यापी को नमस्कार
माँ जगन्मोहिनी जगदम्बे, ज्योत्स्नामयी को नमस्कार
हे दैत्यविनाशिनि दयामयी, दुर्गतिनाशिनि को नमस्कार
भगवान कृष्ण की अनुजा के, पावन चरणों में नमस्कार

Om Jay Ambe Gouri

दुर्गाजी आरती
ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय दुर्गा गौरी
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिव री
माँग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्र वदन नीको
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै
रक्त-पुष्प उर माला, रत्न हार साजै
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योति
शुम्भ, निशुम्भ विदारे, महिषासुर-घाती
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती
चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू
बाजत ताल मृदंग अरु बाजत डमरू
भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी
मनवांछित फल पावत, सेवत नर-नारी

Kalika Kashta Haro He Maa

माँ दुर्गा की स्तुति
कालिका कष्ट हरो हे माँ!
नील-मणि के सम कांति तुम्हारी, त्रिपुर सुन्दरी माँ
चन्द्र मुकुट माथे पर धारे, शोभा अतुलित माँ
किया आपने महिषासुर वध, शुंभ निशुंभ विनाश
शक्ति न ऐेसी और किसी में, छाया अति उल्लास
ऋषि, मुनि, देव समझ ना पाये, महिमा अपरंपार
कौन दूसरा जान सके, माँ विश्व सृष्टि आधार
पढ़े सुने माहात्म्य तुम्हारा, पाप ने फटके पास
मनः शान्ति सुख, सम्पति पाये, कष्टों का हो ह्रास