Ganapati Gaao Re Vigan Nahi Aayega

श्री गणेश स्तुति
गणपति गाओ रे, विघन नहीं आयगा
सिद्धि सदन सुर-नर-मुनि वंदित, करता भरता रे, विघन नहीं आएगा
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्हीं हो, संकट हरता रे, विघन नहीं आयगा
कोटि सूर्य सम प्रभा तुम्हारी, बुद्धि प्रदाता रे, विघन नहीं आयगा
शंकर-सुवन, पार्वती-नंदन, आनँद मनाओ रे, विघन नहीं आयगा
जो जन सुमिरन करे तिहारो, भय नहीं पाता रे, विघन नहीं आयगा

Jay Ganesh Jay Ganesh Jay Ganesh Deva

श्री गणपति स्तुति
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जिनकी पारबती पिता महादेवा
मोदक का भोग लगे, सन्त करे सेवा
विघ्नों को नाश करें, सुख-सम्पति देवा
एक दन्त लम्बोदर, गज समान आनन
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूषक का वाहन
अन्धे को आँख देत, कोढ़ी को काया
बाँझन को है पुत्र देत, निर्धन को माया
दूर्वा और पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा
सकल काम सिद्ध करे श्री गणेश देवा

Priy Putra Parvati Maiya Ke

श्री गणेश वंदना
प्रिय पुत्र पार्वती मैया के, गज-वदन विनायक विघ्न हरे
जो ऋद्धि सिद्धि दाता सेवित, संताप शोक को दूर करे
जामुन कपित्थ जैसे फल का, रुचि पूर्वक भोग लगाते हैं
मोदक के लड्डू जिनको प्रिय, सारे जग का हित करते हैं
सम्पूर्ण यज्ञ के जो रक्षक, कर में जिनके पाशांकुश है
है रक्त वर्ण जिनके तन का, मूषक जिनका प्रिय वाहन है
हे वक्रतुण्ड! हे लम्बोधर! मंगल दाता! सब विघ्न हरो
शत शत प्रणाम मैं करूँ प्रभो, मनवांछित कारज पूर्ण करो

Mat Yashoda Shri Ganesh Ki

श्री गणेश-श्री कृष्ण
मात यशोदा श्री गणेश की पूजा करने को आई
मोदक भर कर थाल सजाया, कान्हा को सँग में लाई
नटवर की नटखट चालों की, याद उन्हें जैसे आई
विघ्न न पूजा में हो जाये, शंका मन में जब आई
तभी कन्हैया को खम्भे से, डोरी से जो बाँध दिया
फिर विघ्नेश्वर की पूजा में, निश्चित हो कर ध्यान किया
श्रीगणेश ने आँखे खोली, श्रीहरि को प्रणाम किया
और सूँड से मोदक लेकर, उनके मुख में डाल दिया
मात यशोदा ने देखा तो, मति उनकी चकराई है
फिर तो अपनी चतुराई पर, बार बार पछताई है

He Gouri Putra Ganesh Gajanan

श्री गणेश प्राकट्य
हे गौरी-पुत्र गणेश गजानन, सभी कामना पूर्ण करें
कलियुग में पूजा अर्चन से, सारे कष्टों को शीघ्र हरे
ब्रह्मा, विष्णु अरु रुद्र आप, अग्नि, वायु, रवि, चन्द्र आप
श्रद्धा पूर्वक जो स्मरण करे, हर लेते सारे पाप ताप
माँ पार्वती के सुत होकर के, प्रत्येक कल्प में जो आते
वे परब्रह्म-भगवान कृष्ण, माता को सुख ये पहुँचाते
मैं प्राप्त करूँ उत्तम बेटा, देवीजी के मन में आया
जब पुत्र रूप उत्पन्न हुए, श्रीकृष्ण वहाँ मंगल छाया
दर्शन पाकर ब्रह्मादिक को, सब देवों को भी हर्ष हुआ
शिशु पर जब शनि की दृष्टि पड़ी, धड़ से मस्तक विलीन हुआ
श्री विष्णु शीघ्र ही जाकर के, गज के मस्तक को ले आये
धड़ पर उसको फिर जोड़ दिया, सब देव वहाँ तब हुलसाये
श्री विष्णु ने तब स्तुति की, सर्वेश्वर, सत्य, सिद्धिदाता
वरणीय श्रेष्ठ सब देवों में, है विघ्न-विनाशक हे त्राता

Sarva Pratham Ganapati Ko Puje

श्री गणेश स्तवन
सर्वप्रथम गणपति को पूजे, पश्चात् कार्य आरम्भ करें
जो सृष्टि के कर्ता-धर्ता, वे विपदाएँ तत्काल हरें
गजवदन विनायक एकदन्त जो, प्रगट भये सब हर्ष भरे
मुदित हुए पार्वति शिवशंकर, इन्द्र, अप्सरा नृत्य करें
वक्रतुण्ड लम्बोदर गणपति, निरख चन्द्रमा हँसी करे
शाप दियो तब चन्द्रदेव को, कलाहीन तत्काल करे
ॠद्धि-सिद्धि के बीच विराजै, चँवर डुलै आनन्द भरे
गुड़ के मोदक भोग सुहावै, मूषक की सवारी आप करें
‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र, जपने से सारे दोष जरे
सच्चिदानन्द गणपति ध्याये, निश्चित ही सारे काज सरे
पाशाकुंश मोदक वर-मुद्रा का, तन्मय होकर ध्यान धरें
अथर्वशीर्ष का पाठ करे नित, मनोकामना पूर्ण करें

Om Jay Ganpati Deva

गणपति की आरती
ॐ जय गणपति देवा, प्रभु जय गणपति देवा
जयति शिवा-शिव नन्दन, सन्त करे सेवा —-ॐ जय……
अघ नाशक, वर दाता, भक्तों के भूषण —-प्रभु भक्तों……
ॠद्धि-सिद्धि के दाता, दूर करें दूषण —-ॐ जय……
श्रुति अरु यज्ञ विभूषित, विघ्नों के हर्ता —-प्रभु विघ्नों ……
सुख-निधि शांति-निकेतन, बुद्धि विमलकर्ता —-ॐ जय ……
सुर, नर, मुनि गण वन्दित, शोभा अति न्यारी —-प्रभु शोभा ……
चन्द्र भाल पर शोभित, चार भुजा धारी —-ॐजय……
एक दन्त लम्बोदर, गज का ही मुखड़ा —-प्रभु गज ……
वक्रतुण्ड पीताम्बर, हर लेते दुखड़ा —-ॐ जय……
कोटि सूर्य सम आभा, मात उमा मोहे —-प्रभु मात……
मोदक प्रिय वरदाता, पाशांकुश सोहे —-ॐ जय…..
विद्या, धन, अरु सन्तति, मुद-मंगल दाता —-प्रभु मुद……
विघ्नेश्वर आराधक, सुख सम्पत्ति पाता —-ॐ जय……
श्री गणेशजी की आरती, जो कोई नर गाये —-प्रभु जो ……
अशुभ मिटे, शुभ आये, इच्छित फल पाये —-जय……

Gaiye Ganpati Jag Vandan

श्री गणेश वन्दना
गाइये गणपति जगवन्दन, शंकर–सुवन, भवानी-नन्दन
सिद्धि सदन गज-वदन विनायक, कृपा सिन्धु सुन्दर सब लायक
मोदक-प्रिय, मुद मंगलदाता, विद्या-वारिधि, बुद्धि-विधाता
माँगत ‘तुलसिदास’ कर जोरे, बसहिं रामसिय मानस मोरे

Aarti Mangal Murati Ki

गणपति की आरती
आरती मंगल मूरति की, गजानन सिद्धि विनायक की
शीश पर स्वर्ण-मुकुट सोहे, हाथ में पाशांकुश राजे
पीत पट कटि में लहराये, मुकुट पर चन्द्रकला साजे
कण्ठ में लाल पुष्प माला, कान में कुण्डल झलकाये
सदाशिव-गिरिजा के नन्दन, वदन की शोभा मन भाये
गजानन कार्तिकेय भ्राता, भक्त के गणाधीश त्राता
करो नित सेवा गणपति की, आप ही ॠद्धि-सिद्धि दाता

Jay Ganesh Gan Nath Dayamay

श्री गणेश स्तवन
जय गणेश गणनाथ दयामय, दूर करो सब विघ्न हमारे
प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारो, उनके सारे काज सँवारे
लंबोदर गजवदन मनोहर, बज्रांकुश को कर में धारे
ऋद्धि-सिद्धि दोऊ चँवर डुलावैं, मूषक वाहन आप पधारे
ब्रह्मादिक सुर ध्यावें मन में, ऋषि मुनिगण सब दास तुम्हारे
‘ब्रह्मानंद’ सहाय करो प्रभु, भक्तजनों के तुम रखवारे