Kahe Ko Tan Manjta Re Mati Main Mil Jana Hai

सत्संग महिमा
काहे को तन माँजता रे, माटी में मिल जाना है
एक दिन दूल्हा साथ बराती, बाजत ढोल निसाना है
एक दिन तो स्मशान में सोना, सीधे पग हो जाना है
सत्संगत अब से ही करले, नाहिं तो फिर पछताना है
कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, प्रभु का ध्यान लगाना है

Mat Bandho Gathariya Apjas Ki

भक्ति रस
मत बाँधो गठरिया, अपजस की
यो संसार मेघ की छाया, करो कमाई हरि-रस की
जोर जवानी ढलक जायगी, बाल अवस्था दस दिन की
धर्मदूत जब फाँसी दारे, खबर लेत तेरी नस नस की
कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, बात नहीं तेरे बस की

Bhajan Bin Jiwan Manahu Masan

भजन महिमा
भजन बिन जीवन मनहुँ मसान
जीवन के जीवन मनमोहन, उन बिन मरन समान
चलत फिरत दीखत जो यह तन,सो जनु प्रेत समान
कहा काम आवहिगो वैभव, जब तन को अवसान
जो कछु मिल्यौ न फल्यौ जगत में, कियो न हरि गुण-गान
है बस यही चातुरी साँची, भजै स्याम रसखान

Antar Mam Vikasit Karo

निवेदन (बंगला)
अन्तर मम विकसित करो अन्तरतर हे
निर्मल करो, उज्ज्वल करो, सुन्दर करो हे!
जाग्रत करो, उद्यत करो, निर्भय करो हे!
मंगल करो, निरलस, निःसंशय करो हे!
युक्त करो हे सवार संगे, मुक्त करो हे बंध!
संचार करो सकल कर्मे, शान्त तोमार छंद!
चरण-पद्मे
मम चित्त, निष्पंदित करो!
मम चित्त, निष्पंदित करो!
नंदित करो, नंदित करो, नंदित करो हे!

Om Ke Gayen Sab Mil Geet

ॐ वन्दना
ॐ के गायें सब मिल गीत
सकल सृष्टि आधार प्रणव है, धर्म कर्म का सार यही है
कण-कण इसमें, यह कण कण में, निराकार साकार यही है
सच्चिदानंदघन भी ये ही है, वेदों का भी जनक यही है
गायें गीत ॐ के जो जन, मन वांछित फल पाता है
जन्म मरण चक्कर से छूटे, भवसागर से तर जाता है

Khatir Kar Le Nai Gujarya

रसिया
खातिर कर ले नई गुजरिया, रसिया ठाड़ो तेरे द्वार
ठाड़ौ तेरे द्वार रसिया, ठाड़ौ तेरे द्वार
ये रसिया तेरे नित नहिं आवै, प्रेम होय तो दर्शन पावै,
अधरामृत को भोग लगावै, कर मेहमानी अब मत चूके समय न बारम्बार
हिरदे की चौकी कर हेली, नेह को चंदन लगा नवेली,
दीक्षा ले बनि जैयो चेली, पुतरिन पलँग बिछाय, पलक की करले बंद किंवार
जो कछु रसिया कहै सो करियो, सास ननद को डर परिहरियो,
सौलह कर बत्तीस पहरियो, दे दे दाम सूम की सम्पद, जीवन है दिन चार
सब ते तोड़ नेह की डोरी, जमना पार उतर चल गोरी,
निडर खेली कहियो होरी, श्याम रंग चढ़ जाये जा दिन, हो जाय बेड़ा पार

Jisne Nit Hari Ka Nam Liya

नाम महिमा
जिसने नित हरि का नाम लिया उसने अपना कल्याण किया
जिसने पशु पक्षी प्राणिमात्र का पालन पोषण नित्य किया
चाहे दान किसी को दिया न दिया, भवनिधि को उसने पार किया
सत्संग कथामृत पान किया, आजीवन सबका भला किया
चाहे पूजा पाठ किया न किया पर भक्ति-भाव को प्राप्त किया
गुरु का उपदेश हृदय धर के, आचरण शास्त्र अनुसार किया
चाहे व्रत उपवास किया न किया, मानव जीवन को सफल किया

Tumi Bandhu Tumi Nath

शरणागति
तुमि बंधु, तुमि नाथ, निशिदिन तुमि आमार
तुमि सुख, तुमि शान्ति, तुमि हे अमृत पाथार
तुमिइ तो आनन्दलोक, जुड़ाओ प्राण नाशो शोक
ताप हरण तोमार चरण, असीम शरण दीन जनार 

Nar Ho Na Nirash Karo Man Ko

कर्म निष्ठा
नर हो न निराश, करो मन को, बस कर्म करो पुरुषार्थ करो
आ जाय समस्या जीवन में, उद्देश्य हमारा जहाँ सही
साहस करके बढ़ते जाओ, दुष्कर कोई भी कार्य नहीं
संघर्ष भरा यहा जीवन है, आशा को छोड़ो नहीं कभी
मन में नारायण नाम जपो, होओगे निश्चित सफल तभी
जब घिर जाये हम कष्टों से, माने न हार किंचित न डरें
एकलव्य कथा से सुपरिचित, हो नहिं हताश पुरुषार्थ करें
हम धैर्य धरें विश्वास करें, मंगलमय प्रभु का जो विधान
अविरत प्रयास में लीन रहें, शुभ ही करते करुणा-निधान
हरि-नाम स्मरण को नहीं भूले, कठिनाई हल्की हो जाये
कुछ अनुष्ठान प्रायश्चित हो, बाधाएँ सारी मिट जाये 

Prabhu Adbhut Teri Maya

मोह माया
प्रभु अद्भुत तेरी माया, जिसका पार न कोई पाया
धन दौलत सम्बन्धी अथवा, पुत्र पिता या जाया
ममता कभी न छूटे उनसे, जिनमें रहा भुलाया
गर्भवास कर नौ महिने तक, पृथ्वी पर मैं आया
प्यार मिला घर के लोगों से, समझ नहीं कुछ पाया
युवा काल ऐसे ही खोया, मस्ती मजा उड़ाया
वृद्धावस्था किसे न छोड़े, जर्जर हो गई काया
हरि-स्मरण को भूल गया मैं, अन्त समय पछताया