Khelat Fag Pran Dhan Mohan

होली का रंग
खेलन फाग प्रानधन मोहन, मेरे द्वारे आयो रे
नटवर रूप देखि प्रीतम को, मेरो मन उमगायो रे
संग सखा सब छैल-छबीले, लाल गुलाल उड़ायो रे
सोहत हाथ कनक-पिचकारी, केसर रंग रँगायो रे
ओसर पाइ लई मैं मुरली, काजर नयन लगायो रे
सिर चुंदरी ओढ़ाय लाल को, लाली भेष बनायो रे
घेरि सखिन ने फिर मोहन को, मोहिनी रूप सजायो रे
प्यारी जी मुसकाय रीझि पुनि, आपुहि उन्हें छुड़ायो रे

Baithe Hari Radha Sang

मुरली मोहिनी
बैठे हरि राधासंग, कुंजभवन अपने रंग
मुरली ले अधर धरी, सारंग मुख गाई
मनमोहन अति सुजान, परम चतुर गुन-निधान
जान बूझ एक तान, चूक के बजाई
प्यारी जब गह्यो बीन, सकल कला गुन प्रवीन
अति नवीन रूप सहित, तान वही सुनाई
‘वल्लभ’ गिरिधरनलाल, रीझ कियो अंकमाल
कहन लगे नन्दलाल, सुन्दर सुखदाई 

Priti Pagi Shri Ladili Pritam Shyam Sujan

युगल से प्रीति
प्रीति पगी श्री लाड़िली, प्रीतम स्याम सुजान
देखन में दो रूप है, दोऊ एक ही प्रान
ललित लड़ैती लाड़िली, लालन नेह निधान
दोउ दोऊ के रंग रँगे, करहिं प्रीति प्रतिदान
रे मन भटके व्यर्थ ही, जुगल चरण कर राग
जिनहिं परसि ब्रजभूमि को, कन कन भयो प्रयाग
मिले जुगल की कृपा से, पावन प्रीति-प्रसाद
और न अब कछु चाह मन, गयो सकल अवसाद
मेरे प्यारे साँवरे, तुम कित रहे दुराय
आवहु मेरे लाड़िले! प्रान रहे अकुलाय

Bhagwan Radha Krishna Karuna Kar

प्रार्थना
भगवान् राधाकृष्ण करुणा कर मुझे अपनाइये
संसार-सागर में पड़ा, अविलम्ब आप बचाइये
धन बंधु बांधव मोह माया, जाल में हूँ मैं फँसा
आसक्ति से कर मुक्त, जीवन पर सुधा बरसाइये
प्रभु दोष मेरे अनगिनत, अपराध का भण्डार हूँ
गति हीन, साधन हीन के, सब क्लेश कष्ट निवारिये
मैं प्रिया प्रियतम राधिका श्री कृष्ण का चिन्तन करूँ
तन-मन वचन से आपका ही, हे शरण्य उबारिये
प्रभु दिव्य वृन्दावन-बिहारी के चरण में प्रार्थना
मुझ को बना कर दास अपना, विरुद आप निभाइये

Man Mohak Sab Saj Sajyo Ri

पुष्प सज्जा
मन मोहक सब साज सज्यो री
फूलमयी यह जुगल जोति लखि, सखियन को मन फूल रह्यो री
फूलन के ही मुकुट चन्द्रिका, फूलन ही को पाग फल्यौ री
फूलन के ही गजरा कुण्डल, फूलन को ही हार सज्यौ री
फूलन के ही कंकण कचुँकि, फूलन को भुजबन्ध बन्धौ री
फूलन के ही नूपुर पग में, बिछिया फूलनदार रच्यौ री
फूलन से ही मढ़ी मुरलिया, फूलन को कटिबन्ध बँध्यौ री
निरखि निरखि राधा मोहन छवि, तन मन मेरो फूलि रह्यौ री

Bhaj Man Shri Radhe Gopal

श्रीराधाकृष्ण स्तुति
भज मन श्री राधे गोपाल
स्निग्ध कपोल, अधर-बिंबाफल लोचन परम विशाल
शुक-नासा, भौं दूज-चन्द्र-सम, अति सुंदर है भाल
मुकुट चंद्रिका शीश लसत है, घूँघर वाले बाल
रत्न जटित, कुंडल, कर-कंगन, गल मोतियन की माल
पग नूपुर-मणि-खचित बजत जब, चलत हंस गति चाल
गौर श्याम तनु वसन अमोलक, चंचल नयन विशाल
मृदु मुसकान मनोहर चितवन, गावत गीत रसाल
जिनका ध्यान किये सुख उपजे, दूर होत जंजाल
‘नारायण’ वा छबि को निरखत, पुनि पुनि होत निहाल

Hindole Jhulahi Naval Kishor

झूलना
हिंडोले झूलहिं नवल-किसोर
कहा कहों यह सुषमा सजनी! वारिय काम करोर
वरन-वरन के वसन सखिन के, पवन चलत झकझोर
सावन के मनभावन बादर, गड़गड़ाहिं घनघोर
गावहिं सावन गीत मनोहर, भये जुगल रस भोर
या रस के वश भये चराचर, जाको ओर न छोर

Bhajo Re Man Shri Radha Govind

नाम स्मरण
भजो रे मन श्री राधा गोविंद
जन-मन को निज-धन-मनमोहन, पूरन परमानंद
जीवन के जीवन वे तेरे, तू चकोर वे चन्द
कैसे तिनहिं बिसारि भयो तूँ, मोह मुग्ध मतिमन्द
चेत-चेत रे अब तो मूरख, छोड़ सबहिं छल-छन्द
सब तज भज मोहन को प्यारे, यहीं पंथ निर्द्वंद 

Khelat Hari Nikase Braj Khori

राधा कृष्ण भेंट
खेलत हरि निकसे ब्रज खोरी
गए स्याम रवि – तनया के तट, अंग लसति चंदन की खोरी
औचक ही देखि तहँ राधा, नैन बिसाल , भाल दिए रोरी
‘सूर’ स्याम देखत ही रीझे, नैन नैन मिलि परी ठगोरी

Jugal Chavi Harati Hiye Ki Pir

युगल छवि
जुगल छवि हरति हिये की पीर
कीर्ति-कुँअरि ब्रजराम-कुँअर बर ठाढ़े जमुना-तीर
कल्पवृच्छ की छाँह सुशीतल, मंद-सुगंध समीर
मुरली अधर, कमल कर कोमल, पीत-नील-द्युति चीर
मुक्ता-मनिमाला, पन्ना गल, सुमन मनोहर हार
भूषन विविध रत्न राजत तन, बेंदी-तिलक उदार
श्रवननि सुचि कुण्डल झुर झूमक, झलकत ज्योति अपार
मुसुकनि मधुर अमिय दृग-चितवनि, बरसत सुधा सिंगार