Maine Mehandi Rachai Krishna Nam Ki

श्रीकृष्ण से प्रीति
मैंनें मेंहदी रचाई कृष्ण नाम की,
मैंने बिंदिया सजाई कृष्ण नाम की
मेरी चूड़ियों में कृष्ण, मेरी चुनरी में कृष्ण,
मैंने नथनी घढ़ाई कृष्ण नाम की
मेरे नयनों में गोकुल, वृंदावन,
मेरे प्राणों में मोहन मन-भावन
मेरे होठों पे कृष्ण, मेरे हृदय में कृष्ण,
मैंने ज्योति जगाई कृष्ण नाम की
अब छाया है कृष्ण मेरे अंग-अंग में,
मेरा तन-मन रंगा है श्री कृष्ण रंग में
मेरा प्रीतम है कृष्ण, मेरा जीवन है कृष्ण
मैंने माला बनाई कृष्ण नाम की

Sharnagat Par Shiv Kripa Karen

मृत्युंजय शिव
शरणागत पर शिवकृपा करें, रोगों से मुक्ति प्रदान करें
मृत्यु तो निश्चित है परन्तु, हम पूर्णायु को प्राप्त करें
स्वाभाविक मानव की इच्छा, वह स्वस्थ रहे प्रभु कष्ट हरें
‘मृत्युंजय मंत्र’ को सिद्ध करे, शिव उसको स्वास्थ्य प्रदान करें
विधिपूर्वक निश्चित संख्या में, जो इसी मंत्र का जाप करे
मृत्युंजय शिव का भजन करें, प्रभु मृत्यु का भय दूर करे
दीर्घायु स्वस्थ होगा जीवन, अन्ततः मृत्यु का वरण करे
ककड़ी जैसे ही पक जाती, तो स्वतः बेल से टूट गिरे  

Satswarup Hai Aatma

सत्य दर्शन
सत्स्वरूप है आत्मा, जो स्वभावतः सत्य
झूठ बाहरी वस्तु है, जो अवश्य ही त्याज्य
धन आसक्ति प्रमादवश, व्यक्ति बोलता झूठ
सत्य आचरण ही करें, प्रभु ना जाए रूठ
छद्म पूर्ण हो चरित तो, कहीं न आदर पाय
कपट शून्य हो आचरण, विश्वासी हो जाय
काम क्रोध व लोभ है, सभी नरक के द्वार
धनोपार्जन में रहे, सात्विक शुद्ध विचार  
सद्गुणसद्गुण जीवन में अपनायें
क्या भला बुरा इसका निर्णय, सद्ग्रन्थों से ही मिल पाये
साधु संतों का संग करे, आदर्श उन्हीं का जीवन हो
तब भाव बुरे टिक नहिं पाये, सद्बुद्धि जागृत मन में हो
करुणानिधान प्रभु कृपा करें, जीवन कृतार्थ तब हो जाये
जो कुछ भी सद्गुण दिखें कहीं, उनको हम तत्क्षण अपनायें  
जगद्गुरुसद्गुरु का मिलना दुर्लभ है, उद्धार हमारा कैसे हो
जो महापुरुष होते सच में, शायद ही शिष्य बनाते हों
उद्धार शिष्य का कर न सकें, इसलिए मना कर देते हों
भगवान् कृष्ण हैं जगद्गुरु, श्रीभगवद्गीता कहे यही
अर्जुन का मोह विनष्ट किया, वे पूज्य गुरु से बढ़ कर ही

Aarti Shri Bhagwad Gita Ki

श्रीमद्भगवद्गीता आरती
आरती श्री भगवद्गीता की, श्री हरि-मुख निःसृत विद्या की
पृथा-पुत्र को हेतु बनाकर, योगेश्वर उपदेश सुनाये
अनासक्ति अरु कर्म-कुशलता, भक्ति, ज्ञान का पाठ पढ़ाये
करें कर्म-फल प्रभु को अर्पण, राग-द्वेष मद मोह नसाये
वेद उपनिषद् का उत्तम रस, साधु-संत-जन के मन भाये
करें सार्थक मानव जीवन, भव-बंधन, अज्ञान मिटायें
अद्भुत, गुह्य, पूजनीय गाथा, मानव जीवन सफल बनाये  

He Gouri Putra Ganesh Gajanan

श्री गणेश प्राकट्य
हे गौरी-पुत्र गणेश गजानन, सभी कामना पूर्ण करें
कलियुग में पूजा अर्चन से, सारे कष्टों को शीघ्र हरे
ब्रह्मा, विष्णु अरु रुद्र आप, अग्नि, वायु, रवि, चन्द्र आप
श्रद्धा पूर्वक जो स्मरण करे, हर लेते सारे पाप ताप
माँ पार्वती के सुत होकर के, प्रत्येक कल्प में जो आते
वे परब्रह्म-भगवान कृष्ण, माता को सुख ये पहुँचाते
मैं प्राप्त करूँ उत्तम बेटा, देवीजी के मन में आया
जब पुत्र रूप उत्पन्न हुए, श्रीकृष्ण वहाँ मंगल छाया
दर्शन पाकर ब्रह्मादिक को, सब देवों को भी हर्ष हुआ
शिशु पर जब शनि की दृष्टि पड़ी, धड़ से मस्तक विलीन हुआ
श्री विष्णु शीघ्र ही जाकर के, गज के मस्तक को ले आये
धड़ पर उसको फिर जोड़ दिया, सब देव वहाँ तब हुलसाये
श्री विष्णु ने तब स्तुति की, सर्वेश्वर, सत्य, सिद्धिदाता
वरणीय श्रेष्ठ सब देवों में, है विघ्न-विनाशक हे त्राता

Rang Darat Laj Na Aai

होली
रंग डारत लाज न आई, नन्दजी के कुँवर कन्हाई
माखन-चोर रसिक मतवारे, गलियन धूम मचाई,
गुलचे खाये भूल गये क्यों, करन लगे ठकुराई
सखि! वाँको शरम न आई
हाथ लकुटिया काँधे कमरिया, बन बन धेनु चराई,
जाति अहीर सबहिं जन जानत, करन लगे ठकुराई
छलिये जानत लोग लुगाई
मात जसोदा ऊखल बाँधे, रोनी सूरति बनाई,
वे दिन अपने भूलि गये सब, करन लगे ठकुराई
कुछ करलो याद कन्हाई 

Ho Ik Nai Bat Suni Aai

श्री राधा प्राकट्य
हौं इक नई बात सुनि आई
कीरति रानी कुँवरी जाई, घर-घर बजत बधाई
द्वारे भीर गोप-गोपिन की, महिमा बरनि न जाई
अति आनंद होत बरसाने, रतन-भूमि निधि छाई
नाचत तरुन वृद्ध अरु बालक, गोरस-कीच मचाई
‘सूरदास’ स्वामिनि सुखदायिनि, मोहन-सुख हित आई

Thali Bhar Kar Lai Main Khicado

नैवेद्य अर्पण
थाली भरकर लाई मैं खीचड़ो, ऊपर घी की वाटकी
जीमो म्हारा कृष्ण कन्हाई, जिमावै बेटी जाट की
बापू म्हारो गाँव गयो है, न जाणे कद आवेगो
बाट देख बैठ्या रहणे से, भूखो ही रह जावेगो
आज जिमाऊँ थने खीचड़ो, काल राबड़ी छाछ की
जीमो म्हारा कृष्ण कन्हाई, जिमावें बेटी जाट की
बार-बार पड़दो मैं करती, बार-बार मैं खोलती
कईयाँ कोनी जीमे मोहन, कड़वी कड़वी बोलती
तूँ जीमें जद ही मैं जीमूँ, बात न कोई आँट की
जीमो म्हारा कृष्ण कन्हाई, जिमावे बेटी जाट की
पड़दो भूल गई साँवरिया, पड़दो फेर लगायोजी
काँबलिया की ओट बैठकर , श्याम खीचड़ो खायोजी
साँचो प्रेम प्रभु में होय तो, मूरति बोले काठ की
जीमो प्यारा कृष्ण-कन्हाई, जिमावे बेटी जाट की  

Khambha Fadke Pragate Narhari

नरसिंह रूप
खम्भ फाड़के प्रगटे नरहरि, अपनों भक्त उबार्यो
दैत्यराज हिरणाकशिपु को, नखते उदर विदार्यो
नरसिंहरूप धर्यो श्रीहरि ने, धरणी भार उतार्यो
जय-जयकार भयो पृथ्वी पे, सुर नर सबहिं निहार्यो
कमला निकट न आवे, ऐसो रूप कबहुँ नहीं धार्यो
चूमत अरु चाटत प्रह्लाद को, तुरत ही क्रोध निवार्यो
राजतिलक दे दियो प्रभु ने, हस्त कमल सिर धार्यो
‘नंददास’ स्वामी करुणामय, भक्त ताप निस्तार्यो

Raghav Gidh God Kari Linho

गिद्ध पर कृपा
राघव गीध गोद करि लीन्हों
नयन-सरोज सनेह-सलिल सुचि मनहुँ अर्घ्य जल दीन्हों
बहु विधि राम कह्यो तनु राखन, परम धीर नहिं डोल्यो
रोकि प्रेम अवलोकि बदन-बिधु, वचन मनोहर बोल्यो
‘तुलसी’ प्रभु झूठे जीवन लगि, समय न धोखे लैहों
जाको नाम मरत मुनि दुर्लभ तुमहिं कहाँ पुनि पैहों