Mat Yashoda Shri Ganesh Ki

श्री गणेश-श्री कृष्ण
मात यशोदा श्री गणेश की पूजा करने को आई
मोदक भर कर थाल सजाया, कान्हा को सँग में लाई
नटवर की नटखट चालों की, याद उन्हें जैसे आई
विघ्न न पूजा में हो जाये, शंका मन में जब आई
तभी कन्हैया को खम्भे से, डोरी से जो बाँध दिया
फिर विघ्नेश्वर की पूजा में, निश्चित हो कर ध्यान किया
श्रीगणेश ने आँखे खोली, श्रीहरि को प्रणाम किया
और सूँड से मोदक लेकर, उनके मुख में डाल दिया
मात यशोदा ने देखा तो, मति उनकी चकराई है
फिर तो अपनी चतुराई पर, बार बार पछताई है

He Gouri Putra Ganesh Gajanan

श्री गणेश प्राकट्य
हे गौरी-पुत्र गणेश गजानन, सभी कामना पूर्ण करें
कलियुग में पूजा अर्चन से, सारे कष्टों को शीघ्र हरे
ब्रह्मा, विष्णु अरु रुद्र आप, अग्नि, वायु, रवि, चन्द्र आप
श्रद्धा पूर्वक जो स्मरण करे, हर लेते सारे पाप ताप
माँ पार्वती के सुत होकर के, प्रत्येक कल्प में जो आते
वे परब्रह्म-भगवान कृष्ण, माता को सुख ये पहुँचाते
मैं प्राप्त करूँ उत्तम बेटा, देवीजी के मन में आया
जब पुत्र रूप उत्पन्न हुए, श्रीकृष्ण वहाँ मंगल छाया
दर्शन पाकर ब्रह्मादिक को, सब देवों को भी हर्ष हुआ
शिशु पर जब शनि की दृष्टि पड़ी, धड़ से मस्तक विलीन हुआ
श्री विष्णु शीघ्र ही जाकर के, गज के मस्तक को ले आये
धड़ पर उसको फिर जोड़ दिया, सब देव वहाँ तब हुलसाये
श्री विष्णु ने तब स्तुति की, सर्वेश्वर, सत्य, सिद्धिदाता
वरणीय श्रेष्ठ सब देवों में, है विघ्न-विनाशक हे त्राता

Sarva Pratham Ganapati Ko Puje

श्री गणेश स्तवन
सर्वप्रथम गणपति को पूजे, पश्चात् कार्य आरम्भ करें
जो सृष्टि के कर्ता-धर्ता, वे विपदाएँ तत्काल हरें
गजवदन विनायक एकदन्त जो, प्रगट भये सब हर्ष भरे
मुदित हुए पार्वति शिवशंकर, इन्द्र, अप्सरा नृत्य करें
वक्रतुण्ड लम्बोदर गणपति, निरख चन्द्रमा हँसी करे
शाप दियो तब चन्द्रदेव को, कलाहीन तत्काल करे
ॠद्धि-सिद्धि के बीच विराजै, चँवर डुलै आनन्द भरे
गुड़ के मोदक भोग सुहावै, मूषक की सवारी आप करें
‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र, जपने से सारे दोष जरे
सच्चिदानन्द गणपति ध्याये, निश्चित ही सारे काज सरे
पाशाकुंश मोदक वर-मुद्रा का, तन्मय होकर ध्यान धरें
अथर्वशीर्ष का पाठ करे नित, मनोकामना पूर्ण करें

Gaiye Ganpati Jag Vandan

श्री गणेश वन्दना
गाइये गणपति जगवन्दन, शंकर–सुवन, भवानी-नन्दन
सिद्धि सदन गज-वदन विनायक, कृपा सिन्धु सुन्दर सब लायक
मोदक-प्रिय, मुद मंगलदाता, विद्या-वारिधि, बुद्धि-विधाता
माँगत ‘तुलसिदास’ कर जोरे, बसहिं रामसिय मानस मोरे

Jay Ganesh Gan Nath Dayamay

श्री गणेश स्तवन
जय गणेश गणनाथ दयामय, दूर करो सब विघ्न हमारे
प्रथम धरे जो ध्यान तुम्हारो, उनके सारे काज सँवारे
लंबोदर गजवदन मनोहर, बज्रांकुश को कर में धारे
ऋद्धि-सिद्धि दोऊ चँवर डुलावैं, मूषक वाहन आप पधारे
ब्रह्मादिक सुर ध्यावें मन में, ऋषि मुनिगण सब दास तुम्हारे
‘ब्रह्मानंद’ सहाय करो प्रभु, भक्तजनों के तुम रखवारे

Omkara Krati Ganapati Ganesh

श्री गणेश वन्दन
ओंकारा-कृति गणपति गणेश, श्रद्धा से हम प्रणिपात करें
ये ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र रूप, श्रेयस्कर इनका वरण करें
दो कर्ण सूप से, ह्वस्व नयन, तीनों गुण,तीनों काल परें
यज्ञों के रक्षक, वक्रतुण्ड, सुर, नर, मुनि, योगी ध्यान धरें
विद्या वारिधि प्रभु लम्बोदर, गूँगे को गिरा प्रदान करें
गिरि पर चढ़ने को समुचित बल, लँगड़े को भी ये सुलभ करें
इक-दन्त गजानन, चार भुजा, पाशांकुश, मोदक हाथ धरें
वर-मुद्रा है चौथे कर की, पूजे मन-वांछित काज सरें
ये महाकाय प्रभु गणाधीश, मोहक मुद्रा में नृत्य करें
करधनी की छुद्र घंटिकाएँ, मंथर स्वर मन उल्लास भरें
ये विद्यारम्भ, विवाहोत्सव में, सब बाधाओं को दूर करें
गजवदन विनायक की जय हो, जो विघ्न-राशि को नष्ट करें

Omkar Rup Shri Gajanan

श्री गणपति वन्दन
ओंकार (ॐ) रूप श्री गजानन, प्रत्यक्ष तत्व ब्रह्म स्वरूप
कर्ता, धर्ता एवं हर्ता, भगवान् आपके कर्इं रूप
तीनों गुण से हो परे आप, योगीजन जिनका ध्यान धरें
प्रभु वक्र-तुण्ड लम्बोदर हैं, जो सुमिरें उनका विघ्न टरें
‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र, जो जपे कामना सिद्ध करें
जो लाल पुष्प द्वारा पूजे, उनके गणपति सब कष्ट हरें
नित अथर्वशीर्ष का पाठ करे, सर्वत्र सदा ही सुख जाये
लड्डू हजार से यजन करे, मन-वांछित वह फल पाये

Ganapati Gaao Re Vigan Nahi Aayega

श्री गणेश स्तुति
गणपति गाओ रे, विघन नहीं आयगा
सिद्धि सदन सुर-नर-मुनि वंदित, करता भरता रे, विघन नहीं आएगा
ब्रह्मा, विष्णु, महेश तुम्हीं हो, संकट हरता रे, विघन नहीं आयगा
कोटि सूर्य सम प्रभा तुम्हारी, बुद्धि प्रदाता रे, विघन नहीं आयगा
शंकर-सुवन, पार्वती-नंदन, आनँद मनाओ रे, विघन नहीं आयगा
जो जन सुमिरन करे तिहारो, भय नहीं पाता रे, विघन नहीं आयगा

Jay Ganesh Jay Ganesh Jay Ganesh Deva

श्री गणपति स्तुति
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जिनकी पारबती पिता महादेवा
मोदक का भोग लगे, सन्त करे सेवा
विघ्नों को नाश करें, सुख-सम्पति देवा
एक दन्त लम्बोदर, गज समान आनन
मस्तक सिन्दूर सोहे, मूषक का वाहन
अन्धे को आँख देत, कोढ़ी को काया
बाँझन को है पुत्र देत, निर्धन को माया
दूर्वा और पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा
सकल काम सिद्ध करे श्री गणेश देवा

Priy Putra Parvati Maiya Ke

श्री गणेश वंदना
प्रिय पुत्र पार्वती मैया के, गज-वदन विनायक विघ्न हरे
जो ऋद्धि सिद्धि दाता सेवित, संताप शोक को दूर करे
जामुन कपित्थ जैसे फल का, रुचि पूर्वक भोग लगाते हैं
मोदक के लड्डू जिनको प्रिय, सारे जग का हित करते हैं
सम्पूर्ण यज्ञ के जो रक्षक, कर में जिनके पाशांकुश है
है रक्त वर्ण जिनके तन का, मूषक जिनका प्रिय वाहन है
हे वक्रतुण्ड! हे लम्बोधर! मंगल दाता! सब विघ्न हरो
शत शत प्रणाम मैं करूँ प्रभो, मनवांछित कारज पूर्ण करो