Jay Jay Durge Jay Maheshwari

दुर्गा स्तवन
जय जय दुर्गे जय माहेश्वरी, आर्त जनों की तुम रखवारी
शैल नन्दिनी सुर-मुनि सेवित, पाप-पुँज की नाशन हारी
पूर्णचन्द्र सम प्रभा वदन की, विश्व विमोहिनी दीप्ति तुम्हारी
शूल धारिणी सिंह वाहिनी, महिषासुर को मर्दनवारी
शुम्भ-निशुम्भ मुण्ड गल माला, अंधक दैत्य विशोषण हारी
शोभा, क्षमा, शान्ति, श्रद्धा, धृति, विजय रूपिणी, पालनहारी
जय जय सुखदा वरदा मैया, ज्ञान स्वरूपा मंगलकारी

Jay Durge Giriraj Nandini

देवी स्तवन
जय दुर्गे गिरिराज नन्दिनी जय अम्बे उज्ज्वल द्युति दामिनि
जय भगवती महादेव भामिनी, जय स्कन्द गजानन पालिनि
कान्तिमयी दुर्गा महारानी, महामर्दिनी वांछित फल दायिनी
हरि, हर ब्रह्मा वेद बखानी, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि ज्ञानी
विकसित कमल नयन कात्यायिनि, शंख, पद्म कर धरे भवानी
सत्चित-सुखमय व्याधि विमोचनि, गदा, चक्र, बाणाकुंश शोभिनि
आदि शक्ति चण्डमुण्ड विनाशिनि मधु,कैटभ, महिषासुर मर्दिनि
रत्न हार कटि किंकिणी सोहिनि नक बेसर बिंदी मन मोहिनि
त्रिपुरसुन्दरी भवभय भंजनि, लोक पावनी जय जगजननी

Jay Bhuwaneshwari Jay Narayani

देवी स्तवन
जय भुवनेश्वरि जय नारायणि संतति की रक्षा करती हो
अज्ञान, अहं को हरती हो, सुख वैभव हमको देती हो
जैसे प्रभात की सूर्य किरण, वैसी श्री अंगों की शोभा
मुसकान अधर पर छाई है, रत्नाभूषण की अमित प्रभा
आये जो शरण दीन पीड़ित उसकी रक्षा माँ ही करती
हे सनातनी हे कात्यायिनि, सेवक के कष्ट सदा हरती
वरदायिनि, सर्वेश्वरि मैया, आसक्ति अविद्या आप हरो
माँ दुर्गुण सारे दूर करो, सद्गुण व शांति प्रदान करो 

Devi Doshon Ka Daman Kare

देवी चरित्र
देवी दोषों का दमन करे
करती कृपा सदा भक्तों पर, उनके कष्ट हरे
नष्ट करें दुष्टो को माता, कर त्रिशूल धरे
मूल प्रकृति से सृष्टि का सृजन, ये भी आप करे
चन्द्रवदनी माँ दिव्याभूषण, वस्त्र धरे रति लाजे
वे ही तो हिमाचल की पुत्री जो, शिव वामांग विराजै
महिषासुर निशुम्भ शुम्भ का भी, तो ध्वंस किया हे माता
रण सिंहिनी तुम्हीं हो देवी, पार न कोई पाता 

Maa Kshma Karo Aparadh

काली देवी स्तवन
माँ क्षमा करो अपराध, शरण मोहि लीजे हे काली!
दुर्गा दुर्गति दु:ख विनाशिनि, खड्ग चक्र वाली
हे परमेश्वरि, हे कामेश्वरि, विविध रूप वाली
अद्भुत शोभा श्रीअंगों की विद्युत-उजियारी
हेम-गिरि पे वास तिहारो, चन्द्रमुकुट धारी
सर्जन, पालन, प्रलयकारिणी, दिव्य शक्तिशाली
दैत्य विदारिणि, ब्रह्मस्वरूपा श्याम वर्णवाली
कार्तिकेय, गणपति की जननी, अगणित गुणवाली
यश, मंगल, ऐश्वर्य प्रदायिनि, निगमागम वाली

Maa Charno Main Koti Pranam

देवी स्तवन
माँ! चरणों में कोटि प्रणाम
मायारूपिणि, शुद्धस्वरूपा, हे जगजननी! कोटि प्रणाम
त्रिगुणातीता, वेदस्वरूपा, आदिशक्ति को कोटि प्रणाम
लज्जा, शोभा, ज्ञान स्वरूपा, हे महिमामयी! कोटि प्रणाम
रोग, शोक, भय, संकट हरनी, मंगल दायिनि! कोटि प्रणाम
दुख-दारिद्र-निवारिणि देवी, हे नारायणि! कोटि प्रणाम
करुणानिधि, कल्याणकारिणी, पतितपावनी! कोटि प्रणाम
सर्जन, पालन, प्रलय-कारिणी, हिमनग-नंदिनी! कोटि प्रणाम
मधु, कैटभ, महिषासुर मर्दिनि, शूलधारिणी! कोटि प्रणाम 

Maa Durga Sare Kashta Hare

दुर्गा वन्दन
माँ दुर्गा सारे कष्ट हरे
साधन ऐसा कोई न अन्य, बस श्रद्धापूर्वक स्मरण करें
माँ के जो बत्तीस नाम बड़े, यदि पाठ करें सहस्त्र बार
चाहे कष्ट बड़ा कैसा भी हो, निश्चित ही उनको करें पार
हिंसक पशु से जो घिर जाये, सौ बार जपें माँ दुर्गा को
रक्षा करती तब माताजी और दूर करे मन से भय को
पूजा कनेर के फूलों से, सौ बार करें नामावली से
तो कष्ट उसे होए न कभी, अरु मुक्ति पाय विपदाओं से

Main Karu Vinati Maa Durga

दुर्गा देवी स्तुति
मैं करूँ विनती माँ दुर्गा, दुर्गति हारिणी महाकाल
सर्वांग सुन्दरी ज्योतिर्मय, कस्तुरी केसर-तिलक भाल
मुस्कान अधर पे मंद-मंद, आभूषण शोभित रत्न माल
मस्तक पर मंडित अर्ध चन्द्र, माँ के वैभव का नहीं पार
सावित्री, सन्ध्या, महादेव, हरिअज वन्दित महिमा अपार
सौभाग्यदायिनी जग-जननी, माँ राग द्वेष अभिमान हरो
हो न्यौछावर जो भी मेरा, माँ मुझ पर कृपाकटाक्ष करो 

Main Bhajan Karun Durga Maa Ka

दुर्गादेवी स्तवन
मैं भजन करूँ दुर्गा माँ का
दुर्गुण मेरे सब नष्ट करो, आश्रय केवल ही माता का
सद्बुद्धि प्रदान तू ही करती, सेवक के सारे कष्ट हरे
विघ्नों को माता हर लेती, माँ कठिन कार्य को सुगम करे
जब हानि धर्म की होती हैं, दैत्यों का नाश तुम्हीं करती
ओ स्नेहमयी मेरी माता, भक्तों की विपदा को हरती
माँ का सौन्दर्य अद्वितीय है, शक्ति का कोई पार नहीं
आयुध अनेक धारण करती, दुर्गा माता की बान यहीं
दुर्गम चरित्र है मैया का, देवता न ऋषि-मुनी जान सके
गति है माता की भेदमयी, कोई कैसे उसे बखान सके
हम माया-मोह में फँसे लोग, कुछ राह नहीं दिखती हमको
मंगलमय माँ दर्शन तेरा, हम पुत्र, बचालो माँ सबको

Jay Durge Durgati Dukh Harini

दुर्गादेवी स्तवन
जय दुर्गे दुर्गति दुःख हारिणि, शुंभ विदारिणि, मात भवानी
आदि शक्ति परब्रह्म स्वरूपिणि, जग जननी माँ वेद बखानी
ब्रह्मा, शिव, हरि अर्चन कीनो, ध्यान धरत सुर-नर-मुनि-ज्ञानी
अष्ट भुजा, कर खंग बिराजे, सिंह सवार सकल वरदानी
‘ब्रह्मानंद’ शरण में आयो, भव-भय नाश करो महारानी