Aarti Lakshmi Narayan Ki

लक्ष्मीनारायण आरती
आरती लक्ष्मीनारायण की
स्वर्णिम पीताम्बर हरि धारे, उज्जवल वसन प्रिया चित चोरे
माँ कमला कर धारे अम्बुज, कमल-नयन श्री विष्णु चतुर्भुज
अनुपम कांति प्रिया पे राजै, श्रीपति क्षीर-समुद्र विराजै
शंख चक्र अरु गदा पद्म कर, अनुपमेय शोभित हैं श्रीधर
श्री पीठा-स्थित माता मोहे, शेष शयन गरुड़ासन सोहे
मंजुल मूरति उज्जवल रूपा, सीता रूक्मिणि देवि स्वरूपा
योगी ॠषि-मुनि ध्यान लगाये, श्रियाश्लिष्ट हरि वश हो जायें
रमानाथ प्रभु भक्ति प्रदाता, परमानंद वैभव के दाता

Aarti Shri Bhagwad Gita Ki

श्रीमद्भगवद्गीता आरती
आरती श्री भगवद्गीता की, श्री हरि-मुख निःसृत विद्या की
पृथा-पुत्र को हेतु बनाकर, योगेश्वर उपदेश सुनाये
अनासक्ति अरु कर्म-कुशलता, भक्ति, ज्ञान का पाठ पढ़ाये
करें कर्म-फल प्रभु को अर्पण, राग-द्वेष मद मोह नसाये
वेद उपनिषद् का उत्तम रस, साधु-संत-जन के मन भाये
करें सार्थक मानव जीवन, भव-बंधन, अज्ञान मिटायें
अद्भुत, गुह्य, पूजनीय गाथा, मानव जीवन सफल बनाये  

Raghu Nandan Ki Aarti Kije

राम आरती
रघुनन्दन की आरती कीजै, दिव्य स्वरूप बसा मन लीजै
पीताम्बर अद्वितीय कलेवर, संग जानकी माता सोहे
धनुष बाण धारे जगदीश्वर, भरत, लखन, रिपुसूदन मोहे
वैदेही लक्ष्मण है सँग में, राघवेन्द्र वनवास पधारे
ॠषि, मुनि, शबरी दर्शन पाये, खरदूषण राक्षस संहारे
साधुवेष धर रावण पहुँचा, वैदेही को तभी चुराया
रावणादि को मार युद्ध में, पृथ्वी का सब भार मिटाया
सकुशल लौट अवध सब आये, राम राज्य हो गया धरा पर
भक्ति दान दीजै प्रभु विनती, करुणा-निधि श्री राम कृपा कर

Aarti Shri Ramcharit Manas Ki

श्री रामचरित मानस- रामायण आरती
आरती रामचरित मानस की, रचना पावन चरित राम की
निगमागम का सार इसी में, वाल्मीकि ऋषि, तुलसी गाये
रामचरितमानस रामायण, निश्चल-भक्ति सुधा बरसाये
पति-व्रत, बन्धु-प्रेम, मर्यादा, माँ सीता का चरित सुहाये
आज्ञापालन, राज-धर्म, त्यागी जीवन आदर्श बताये
साधु-संत प्रिय, कलिमलहारी, दुःख शोक अज्ञान मिटाये
श्रद्धा-युत हो श्रवण करे जो, कहें सुने भव-ताप नसाये

Aarti Kije Shri Raghuvar Ki

राम आरती
आरती कीजै श्री रघुवर की, मर्यादा पुरुषोत्तम राम की
दशरथ-सुत कौसल्या-नंदन, चंद्र-वदन की शोभा भारी
सुर-मुनि-रक्षक, दैत्य-निकंदन, मर्यादित जीवन असुरारी
स्वर्ण-मुकुट मकराकृत कुण्डल, हीरक-हार छटा उजियारी
भुजा विशाल आभरण अनुपम, भाल तिलक की शोभा न्यारी
सूर्य चन्द्र कोटिक छबि लाजै, स्वर्णिम पीताम्बर कटि धारी
धीर वीर प्रभु जानकीवल्लभ, शिव, ब्रह्मा, ऋषि मुनि बलिहारी
सच्चिदानन्द भगवान् राम हैं, भव-भंजन, जन जन हितकारी

Aarti Kalindi Maiya

यमुना आरती
आरती कालिंदी मैया की, कृष्ण-प्रिया श्री जमुनाजी की
जय श्यामा शुभदायिनी जय जय, मन वांछित फलदायिनि जय जय
जय ब्रज-मण्डल-वासिनि जय जय, सरिता पाप-विनाशिनि जय जय
जय कलि-कलुष-नसावनि जय जय, मंगलमय माँ पावनी, जय जय
जय गोलोक-प्रदायिनि जय जय, जय मधु गन्ध-विलासिनि जय जय

Aarti Girivar Dhari Ki

राधाकृष्ण आरती
आरती गिरिवरधारी की, मोहिनी कीर्ति-कुमारी की
बैजंती माला उर धारी, पीत-पट की शोभा न्यारी
लाड़िली की शोभा भारी, वदन स्वर्णिम है मनहारी
युगल सुन्दरता सुखकारी, —-आरती ….
भाल पर तिलक बेंदी दमके, कान में कुण्डल भी चमके
चरण में नुपूर ध्वनि झमके, दिव्य शोभा मन में अटके
माधुरी मुख की रुचिकारी, —-आरती …..
मेघ सम अंग कांति काली, सुघड़ता-सागर वनमाली
प्रियाजी नील वसन वाली, प्रेम रूपा राधा लाली
चारु चितवन मंगलकारी, —-आरती ………
बसो मन-मंदिर में घनश्याम, संग में श्रीराधा अभिराम
लजाये कई कोटि रति काम, चरण में बारंबार प्रणाम
युगल श्री यमुना तट चारी, —-आरती ……….

Aarti Reva Ki Kije

नर्मदा आरती
आरती रेवा की कीजै, अमृत-पय मन भर पी लीजै
साधु संतों की प्रियकारी, सुभग सौभाग्य कीर्तिवारी
नर्मदे बहती करि हर हर, सुधा सम जल में नित भीजै
दरस से दुख दुष्कृत काटो, अमृत-रस भक्तों को बाँटो
सतत यमदूतों को डाँटो, शरण चरणों की माँ दीजै
शम्भु की पुत्री सुकुमारी, जननि गिरिजा की अति प्यारी
विंध्य-सुता मेकल सिर धारी, कृपा बिनु जीवन यह छीजै
जननि तव महिमा को गाऊँ, मनोहर मूरति नित ध्याऊँ
पाद-पद्मों में सिर नाऊँ, हमें माँ अपनो करि लीजै आरती….

Aarti Yugal Swaroop Ki

युगल किशोर आरती
आरति युगल स्वरूप की कीजै, चरण-सरोज बसा मन लीजै
नन्द तनय जसुमति महतारी, मदन गोपाल, गोवर्धन धारी
चन्द्रमुखी वृषभानु-किशोरी, सुघड़ सलोनी सूरत न्यारी
कमल नयन श्रीकृष्ण कन्हैया, निरख रूप रीझति है मैया
गोरांगी राधा चित चोरी, दिव्य रूप पर जाय बलैया
मोर-मुकुट कर मुरली सोहे, नटवर वेष देख मन मोहे
दामिनि सी दमके श्री राधा, अलंकार अंगों पर सोहे
बैजंती माला उर धारी, पीतांबर की शोभा न्यारी
मन्द हासयुत राधा प्यारी, जुगल रूप मुद मंगलकारी
राधा के रंग माधव भीजै, श्यामा श्याम अमिय रस पीजै
राधा मोहन सहज सनेही, एक ही तत्व जदपि दो देही
गोप गोपियाँ दे दे तारी, नाचे राधा कुंज बिहारी
कोटि मनोज लजावनि हारी, चपल चारु चितवन पर वारी
रासेश्वरी रसराज चरण में, तन मन धन न्योछावर कीजै
सेवा भाव जुरै निज मन में , दोउ कर जोरि नमन कर लीजै
सुनो श्याम मन की गति मोरी, तुमही प्राण तुमही रखवारे
अटक रहे नैना छबि तोरी, आये हम सब शरण तिहारे

Ujjwal Aarti Mangal Kari

युगल किशोर आरती
उज्ज्वल आरती मंगलकारी, युगल स्वरूप छटा मनहारी
मेघवर्ण श्री कृष्ण मुरारी, विजयन्ती माला धुर धारी
तिलक चारु अलकें घुँघरारी, पीताम्बर की शोभा-भारी
कनक-लता श्री राधा प्यारी, सुघड़ शरीर सुरंगी सारी
मुक्ता-माल करधनी न्यारी, स्वर्ण-चंद्रिका भी रुचिकारी
राधा मोहन कुंज बिहारी, वृन्दावन यमुना-तट चारी
तन-मन या छबि ऊपर वारी, भवनिधि पार करो गिरिधारी