Prabhu More Avgun Chit N Dharo

समदर्शी प्रभु प्रभु मोरे अवगुण चित्त न धरो समदर्शी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो इक लोहा पूजा में राखत, इक घर बधिक परो यह द्विविधा पारस नहिं जानत, कंचन करत खरो इक नदिया इक नार कहावत, मैलो ही नीर भरो जब मिलि के दोउ एक वरण भए, सुरसरि नाम परो एक जीव, एक […]

Chit Chura Liya Is Chitwan Ne

मोहन की मोहिनी चित्त चुरा लिया इस चितवन ने आनंद न समाये उर माहि, सखि अटक गया मनमोहन में यशुमति के आंगन खेल रहा, मैं मुग्ध हुई उसकी छबि पर मैं भूल गई घर बार सभी, जादू छाया उसका मुझ पर कानों में कुण्डल को पहने, सखि चमक गाल पर झलक रही आभास हुआ मुझको […]