Jay Jay Jag Janani Devi

पार्वती वन्दना
जय जय जग-जननि देवि, सुर-नर-मुनि-असुर-सेवी
भुक्ति-मुक्ति-दायिनि, भय-हरणि कालिका
मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि, पर्व शर्वरीश-वदनि
ताप-तिमिर-तरुण-तरणि-किरण-पालिका
वर्म-चर्म कर कृपाण, शूल-शेल धनुष बाण
धरणि दलनि दानव दल रण करालिका
पूतना-पिशाच-प्रेत-डाकिनी-शाकिनि समेत
भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगाल-जालिका
जय महेश-भामिनी, अनेक रूप नामिनी
समस्त लोक स्वामिनी, हिम-शैल बालिका
रघुपति-पद-परम प्रेम, ‘तुलसी’ यह अचल नेम
देहु ह्वै प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका

Durga Devi Daya Karahu

श्री दुर्गा स्तुति
दुर्गा देवी दया करहु, दुख दुरित नसाओ
शक्ति हीन संतान परी माँ! आय जगाओ
भये भवानी भीत, आय भय भूत भगाओ
खड्ग हाथ महँ देहु, युद्ध को पाठ पढ़ाओ
कलि कराल कलुषित करहिँ, करि कल्यान कपर्दिनी
मेटो ममता मोह कूँ, महिषासुर मद मर्दिनी

Kalyan Mai Durga Devi

माँ दुर्गा स्तुति
कल्याणमयी दुर्गादेवी, मैया को मेरा नमस्कार
रक्ताम्बर से जो अंलकृता, गिरिराज सुता को नमस्कार
विष्णुमाया को नमस्कार, हे व्याधि-विनाशिनि नमस्कार
हे कार्तिकेय गणपति माता, चरणों में सादर नमस्कार
शिव वाम भाग में जो स्थित, कैलास-वासिनी नमस्कार
जो सभी प्राणियों में चेतन, उन सर्वव्यापी को नमस्कार
माँ जगन्मोहिनी जगदम्बे, ज्योत्स्नामयी को नमस्कार
हे दैत्यविनाशिनि दयामयी, दुर्गतिनाशिनि को नमस्कार
भगवान कृष्ण की अनुजा के, पावन चरणों में नमस्कार

Devi Doshon Ka Daman Kare

देवी चरित्र
देवी दोषों का दमन करे
करती कृपा सदा भक्तों पर, उनके कष्ट हरे
नष्ट करें दुष्टो को माता, कर त्रिशूल धरे
मूल प्रकृति से सृष्टि का सृजन, ये भी आप करे
चन्द्रवदनी माँ दिव्याभूषण, वस्त्र धरे रति लाजे
वे ही तो हिमाचल की पुत्री जो, शिव वामांग विराजै
महिषासुर निशुम्भ शुम्भ का भी, तो ध्वंस किया हे माता
रण सिंहिनी तुम्हीं हो देवी, पार न कोई पाता 

Devi Usha Jyotirmai

विनती
देवि उषा! ज्योतिर्मयी, तुम प्रेरक सत्कर्म
सत्पथ पर हों अग्रसर अडिग रहे निज धर्म
सूर्यदेव! गायत्री से करूँ आपका ध्यान
निष्ठा होए इष्ट में, करें आप कल्याण
हे प्रभु प्रेम विभोर हो, जपूँ आपका नाम
नयन अश्रु विगलित रहे, सेवा हो निष्काम
असत्, तिमिर अरु मृत्यु का, करो सर्वथा नाश
सत्य, ज्ञान, अमृतत्व दो, भर दो हृदय प्रकाश
तन, मन, वाणी, से करूँ, प्रभो! शुद्ध-व्यवहार
काम, क्रोध, मद, मोह, तज, परहित करूँ विचार
नत मस्तक मैं हूँ प्रभो तेरी सृष्टि अनूप
मन जाये मेरा जहाँ, देखूँ तेरा रूप
परमपिता परमात्मा मैं तेरी सन्तान
भजन करूँ मैं आपका, हरो दोष, अभिमान
भवसागर में हूँ पड़ा, सुख-दुख का तूफान
तुम ही केवट हो प्रभो! रख लो अपनी बान 

Mhimamai Devi Savitri

सावित्री देवी स्तवन
महिमामयी देवी सावित्री, अनुकम्पा हम पर करें आप
हे मूल प्रकृति, ब्रह्मा की प्रिया, हरलो कृपया सब ताप पाप
तेजोमय विग्रह वाली हो, मंगल मयी मोक्षदायिनी हो
भक्तों पे अनुग्रह करती हो, सम्पत्ति तथा सुख देती हो
हे! प्रीतिदायिनी हों प्रसन्न, सुखदात्री मेरे क्लेश हरो
मैं दास तुम्हारा हूँ विपन्न, आनन्द स्वरूपिणि कृपा करो