Tu Dayalu Din Ho Tu Dani Ho Bhikhari

शरणागति
तू दयालु, दीन हौं, तू दानि, हौं भिखारी
हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप – पुंज – हारी
नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो
मो समान आरत नहिं, आरतहर तोसो
ब्रह्म तू, हौं जीव, तू ठाकुर, हौं चेरो
तात, मात, गुरु, सखा तू, सब बिधि हितू मेरो
तोहि मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै
ज्यों – त्यों ‘तुलसी’, कृपालु! चरन – सरन पावै

Din Dukhi Bhai Bahano Ki Seva Kar Lo Man Se

जनसेवा
दीन दुःखी भाई बहनों की सेवा कर लो मन से
प्रत्युपकार कभी मत चाहो, आशा करो न उनसे
गुप्त रूप से सेवा उत्तम, प्रकट न हो उपकार
बनो कृतज्ञ उसी के जिसने, सेवा की स्वीकार
अपना परिचय उसे न देना, सेवा जिसकी होए
सेवा हो कर्तव्य समझ कर, फ लासक्ति नहीं होए
परहित कर्म करो तन मन से, किन्तु प्रचार न करना
फलासक्ति को तज कर के, बस यही भाव मन रखना

Bhaye Prakat Krapala Din Dayala

श्री राम जन्म
भए प्रकट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी
हरषित महतारी मुनि मन हारी, अद्भुत रूप विचारी
लोचन अभिरामा तनु घनश्यामा, निज आयुध भुज चारी
भूषन वनमाला नयन विशाला, सोभा सिंधु खरारी
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी, केहि बिधि करौं अनंता
माया गुन ज्ञानातीत अमाना, वेद पुरान भनंता
करुना-सुख-सागर सब गुन आगर, जेहि गावहिं श्रुति संता
सो मम हित लागी जन अनुरागी, भयउ प्रकट श्रीकंता
ब्रह्माण्ड निकाया निर्मित माया, रोम रोम प्रति वेद कहै
मम उर सो वासी यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहै
उपजा जब ज्ञाना प्रभु मुसकाना, चरित बहुत विधि कीन्ह चहै
कहि कथा सुनाई मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै
माता पुनि बोली सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा
कीजै सिसु लीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा
सुनि वचन सुजाना रोदन ठाना, होई बालक सुर भूपा
यह चरित जे गावहिं हरि पद पावहिं, ते न परहिं भवकूपा
छंद – विप्र, धेनु, सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार

Pratham Gou Charan Ko Din Aaj

गौचारण
प्रथम गो-चारन को दिन आज
प्रातःकाल उठि जसुमति मैया, सुमन सजाये साज
विविध भाँति बाजे बाजत है, रह्यो घोष अति गाज
गोपीजन सब गीत मनोहर, गाये तज सब काज
लरिका सकल संग संकर्षण, वेणु बजाय रसाल
धेनू चराये बाल-कृष्ण-प्रभु, नाम धर्यो गोपाल

Ja Din Man Panchi Udi Jehain

देह का गर्व
जा दिन मन पंछी उड़ि जैहैं
ता दिन तेरे तन तरुवर के, सबै पात झरि जैहैं
या देही की गरब न करियै, स्यार, काग, गिध खैहैं
‘सूरदास’ भगवंत भजन बिनु, वृथा सु जनम गँवैंहैं

Prabhu Tum Ho Din Bandhu

प्रार्थना
प्रभु! तुम हो दीनबन्धु, हम दास हैं तुम्हारे
माता पिता तुम्हीं हो, एकमात्र तुम सहारे
ज्योतित सभी हैं तुम से, रवि चाँद हों कि तारे
हैं प्राणवान तुमसे, पशु पक्षी जीव सारे
हों पाप दोष हमसे, तुम से छिपें न प्यारे
सन्तान हम तुम्हारी, होएँ न तुमसे न्यारे
पीड़ा जनम मरण की, दूजा नहीं निवारे
हे नाथ तुम छुड़ा दो, संकट सकल हमारे

Nisi Din Barsat Nain Hamare

विरह व्यथा
निसि दिन बरसत नैन हमारे
सदा रहत पावस-ऋतु हम पर, जब तें श्याम सिधारे
अंजन थिर न रहत अँखियन में, कर कपोल भये कारे
कचुंकि-पट सूखत नहीं कबहूँ, उर बिच बहत पनारे
आँसू सलिल भये पग थाके, बहे जात सित तारे
‘सूरदास’ अब डूबत है ब्रज, काहे न लेत उबारे

Prabho Vah Kab Din Aayega

प्रतीक्षा
प्रभो, वह कब दिन आयेगा
होगा जब रोमांच, हृदय गद्गद् हो जायेगा
कृष्ण कृष्ण उच्चारण होगा, प्रेमाश्रु नयनों में
विस्मृत होगी सारी दुनिया, मग्न पाद-पद्मों में
रूप-माधुरी पान करूँगा, बिठलाऊँ हृदय में
मिट जायेगा तमस् अन्ततः, लीन होउ भक्ति में

Main To Ta Din Kajara Dehon

श्री कृष्ण से प्रीति
मैं तो ता दिन कजरा दैहौं
जा दिन नंदनँदन के नैननि, अपने नैन मिलैहौं
सुन री सखी, यही जिय मेरे, भूलि न और चितैहौं
अब हठ ‘सूर’ यहै व्रत मेरौ विष खाकरि मरि जैहौ

Bhajo Man Nish Din Shyam Sundar

नाम-स्मरण
भजो मन निश-दिन श्यामसुन्दर, सुख-सागर भजो श्री राधावर
सकल जगत् के जीवन-धन प्रभु करत कृपा अपने भक्तों पर
ब्रज सुन्दरियों से सेवित जो, नव नीरद सम वर्ण मनोहर
त्रिभुवन-मोहन वेष विभूषित, शोभा अतुलित कोटि काम हर
तरु कदम्ब तल यमुना तट पे, मुरली में भरते मीठा स्वर
चरण-कमल में नूपुर बाजत, कटि धारे स्वर्णिम पीताम्बर
कालिय मर्दन, गिरिवर धारण, लीला अतिशय सुन्दर सुखकर
रास रचायो वृन्दावन में, धरो हृदय में रूप निरन्तर