Jane Kya Jadu Bhara Hua Shri Krishna Aapki Gita Main

गीताजी की महिमा
जाने क्या जादू भरा हुआ, श्रीकृष्ण आपकी गीता में
जब शोक मोह से घिर जाते, गीता संदेश स्मरण करते,
उद्धार हमारा ही इसमें, भगवान आपकी गीता में
निगमागम का सब सार भरा, संकट से यह उबार लेती
नित अमृत का हम पान करें, हे श्री कृष्ण आपकी गीता में
है कर्म, भक्ति रस ज्ञान भरा, श्रद्धापूर्वक हम ग्रहण करें
मानव के हित उपदेश सुलभ, गोविन्द आपकी गीता में

Bhagvad Gita Sandesh Amar

श्रीमद्भगवद् गीता
भगवद्गीता-संदेश अमर
उपहार अनूठा करें ग्रहण, जैसे पुष्पों से सार भ्रमर
गीताजी ऐसा क्रान्ति ग्रन्थ, मानव का जीवन सार्थक हो
जिस पथ पर गये महाजन वो, हम चलें तभी अभ्युदय हो
विपरीत परिस्थिति में जब हम, घिर जायँ न सूझे मार्ग हमें
भ्रम दूर करें, निर्देश करें, गीताजी का कोई श्लोक हमें
हम निश्चयात्मक बुद्धि से, करणीय कर्म करते जायें
फल छोड़े प्रभु के हाथों में, स्थित-प्रज्ञता भी आये
कर्म, ज्ञान या भक्ति मार्ग, अनुकूल हमें हो अपनाये
भक्ति का पथ है सुगम जहाँ, श्री कृष्ण-दरस भी हो जाये

Shri Bhagvad Gita Divya Shastra

गीतोपदेश
श्री भगवद्गीता दिव्य शास्त्र जिसमें वेदों का भरा सार
वाणी द्वारा इसका माहात्म्य, अद्भुत कोई पाता न पार
भगवान् कृष्ण-मुख से निसृत, यह अमृत इसका पान करे
स्वाध्याय करे जो गीता का, उसके यह सारे क्लेश हरे
मृगतृष्णा-जल जैसी दुनिया, आसक्ति मोह का त्याग करें
कर्तापन का अभिमान छोड़, हम शास्त्र विहित ही कर्म करें
सच्चिदानन्दघन वासुदेव, हैं व्याप्त पूर्णतः सृष्टि में
निष्काम भाव से कर्म करें, हो योग-क्षेम तब प्राप्त हमें

Aarti Shri Bhagwad Gita Ki

श्रीमद्भगवद्गीता आरती
आरती श्री भगवद्गीता की, श्री हरि-मुख निःसृत विद्या की
पृथा-पुत्र को हेतु बनाकर, योगेश्वर उपदेश सुनाये
अनासक्ति अरु कर्म-कुशलता, भक्ति, ज्ञान का पाठ पढ़ाये
करें कर्म-फल प्रभु को अर्पण, राग-द्वेष मद मोह नसाये
वेद उपनिषद् का उत्तम रस, साधु-संत-जन के मन भाये
करें सार्थक मानव जीवन, भव-बंधन, अज्ञान मिटायें
अद्भुत, गुह्य, पूजनीय गाथा, मानव जीवन सफल बनाये