Ayodhya Durjan Dosh Hare

अयोध्या
अयोध्या दुर्जय दोष हरे
परमधाम साकेत राम का, शान्ति प्रदान करे
सरयू-जल में स्नान ध्यान से, मन का मैल जरे
स्मरण राम की लीलाओं का, मन को मुदित करे
मनः बुद्धि निर्मल हो जाए, राघव कृपा करे 

Nirbal Ke Pran Pukar Rahe Jagdish Hare

जगदीश स्तवन
निर्बल के प्राण पुकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे
साँसों के स्वर झंकार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे
आकाश हिमालय सागर में, पृथ्वी पाताल चराचर में
ये शब्द मधुर गुंजार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे
जब दयादृष्टि हो जाती है, जलती खेती हरियाती है
इस आस पे जन उच्चार रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे
तुम हो करुणा के धाम सदा, शरणागत राधेश्याम सदा
बस मन में यह विश्वास रहे, जगदीश हरे जगदीश हरे

Maa Durga Sare Kashta Hare

दुर्गा वन्दन
माँ दुर्गा सारे कष्ट हरे
साधन ऐसा कोई न अन्य, बस श्रद्धापूर्वक स्मरण करें
माँ के जो बत्तीस नाम बड़े, यदि पाठ करें सहस्त्र बार
चाहे कष्ट बड़ा कैसा भी हो, निश्चित ही उनको करें पार
हिंसक पशु से जो घिर जाये, सौ बार जपें माँ दुर्गा को
रक्षा करती तब माताजी और दूर करे मन से भय को
पूजा कनेर के फूलों से, सौ बार करें नामावली से
तो कष्ट उसे होए न कभी, अरु मुक्ति पाय विपदाओं से

Om Jay Jagdish Hare

जगदीश्वर आरती
ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे —-ॐ जय …..
जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का —-प्रभु दुख….
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का —-ॐ जय ….
माता-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी —-प्रभु शरण ….
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी —-ॐ जय …..
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी —-प्रभु तुम ….
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी —-ॐ जय …..
तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता —-प्रभु तुम …..
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता —-ॐ जय …..
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति —-प्रभु सबके …..
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति —-ॐ जय …
दीनबन्धु दुख-हर्ता, तुम ठाकुर मेरे —-प्रभु तुम ….
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे —-ॐ जय …..
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा —-प्रभु पाप …..
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, करुं संत सेवा —-ॐ जय …..

Om Jay Narsingh Hare

नरसिंह आरती
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह —-हरे प्रभु ….
चरण-कमल जो ध्याये, संकट दूर करे —-ॐ …..
खम्भ फाड़ के श्री हरि, लियो आप अवतार —-प्रभु ….
सिंह रूप को धार्यो, महिमा अपरम्पार —-ॐ ….
मुख जिह्वा भयकारी, उग्ररूप धारी —-प्रभु ….
नाटी मोटी गरदन, अस्त्र-शस्त्र भारी —-ॐ जय ….
नख से उदर विदारे, हिरणाकुश मारे —- —-प्रभु ….
भक्त प्रहलाद के सिर पे, वरद हस्त धारे —-ॐ जय ….
असुर-बाल कर स्तुति, हरि के चरण परे —-प्रभु ….
भक्तवछल वर दाता, राज्य प्रदान करे —-ॐ ….
नरहरि की यह आरति, श्रद्धा से गाये —-प्रभु ….
चरण-कमल का आश्रय, शुभ गति को पाये —-ॐ ….

Jay Shri Ram Hare

रामचन्द्र आरती
श्री राम हरे ॐ जय रघुवीर हरे
आरती करूँ तुम्हारी, संकट सकल टरे
कौशल्या-सुखवर्धन, नृप दशरथ के प्रान
श्री वैदेही-वल्लभ, भक्तों की प्रभु आन —-ॐ जय …
सत्-चित्-आनन्द रूपा, मनुज रूप धारी
शिव, ब्रह्मा, सुर वन्दित, महिमा अति भारी —-ॐ जय …
श्रीविग्रह की आभा, नव नीरद सम श्याम —-
सुभग सरोरुह लोचन, चितवन सौम्य ललाम —-ॐ जय …
कोटि मदन को लाजत, ॠषि-मुनि मन मोहे
पीताम्बर कटि राजत, रविकर द्युति सोहे —-ॐ जय …
रत्न हार गल शोभित, कुण्डल रुचिकारी —-
राजपाट सुख त्यागे, धनुष बाण धारी —-ॐ जय …
गौतम-नारि अहिल्या, शबरी को तारी —-
शिव धनु भंजत हरषे, मिथिला नर नारी —-ॐ जय …
रावणादि निशिचरगण, संहारे रघुवीर
मर्यादा पुरुषोत्तम, हरो हृदय की पीर —-ॐ जय … 

Om Jay Govind Hare

कृष्ण आरती
ॐ जय गोविन्द हरे, प्रभु जय गोपाल हरे
सत्य सनातन सुन्दर, मन-वच-बुद्धि परे
नव नीरद सम श्यामल, शोभा अति भारी
चपल कमल दल लोचन, ब्रज जन-बलिहारी
शरद पूर्णिमा शशि सम, मुख-मण्डल अभिराम
मृग-मद तिलक विराजत, कुंचित केश ललाम
मोर-मुकुट कर मुरली, पीताम्बर धारी
गल बैजंती माला, राजत बनवारी —-
नवनीत चोर कहावे, विश्वम्भर गोपाल
भव बंधन को काटे, बँधे यशोदा-लाल
राधा के मन रंजन, ब्रजबाला चितचोर
जसुमति नयनन तारे, नन्दित नन्द-किशोर
पार्थ-सारथी होकर, हरा धरा का भार
गीतामृत दोहन कर, किया जगत उद्धार
सुखनिधि, प्रेम के सिन्धु केशव कृष्ण हरे
प्रणत क्लेश को नाशे, मन में मोद भरे
आरतिहर की आरति, जो कोई जन गाये
करे प्रेम से कीर्तन, भव-निधि तर जाये