Ham To Ek Hi Kar Ke Mana

आत्म ज्ञान
हम तो एक ही कर के माना
दोऊ कहै ताके दुविधा है, जिन हरि नाम न जाना
एक ही पवन एक ही पानी, आतम सब में समाना
एक माटी के लाख घड़े है, एक ही तत्व बखाना
माया देख के व्यर्थ भुलाना, काहे करे अभिमाना
कहे ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, हम हरि हाथ बिकाना

Shashwat Sathi Bas Aatma Hi

आत्मानुभूति
शाश्वत साथी बस आत्मा ही
जन्म से पूर्व, मृत्यु के बाद, रहता जो निरन्तर एक यही
वह नहीं छोड़ता कभी हमें, परमात्मा का ही अंश जान
परिवार प्रति कर्तव्य व्यक्ति का, इसका भी होए सदा मान
रागात्मक भाव नहीं किन्तु, अनुभूति विराग की हो मन में
निर्वहन करे दायित्वों का व पालन करे यथा दिन में

Aawat Hi Yamuna Bhar Pani

मोहन की मोहिनी
आवत ही यमुना भर पानी
श्याम रूप काहूको ढोटा, चितवानि देख लुभानी
मोहन कह्यो तुमहीं या ब्रज में, हम कूँ नहिं पहिचानी
ठगी रही मूरत मन अटक्यो, मुख निकसत नहीं बानी
जा दिन तें चितये री वह छबि, हरि के हाथ बिकानी
‘नंददास’ प्रभु सों मन मिलियो, ज्यों सागर में पानी

Shri Krishna Chandra Hi Yogeshwar

योगेश्वर श्रीकृष्ण
श्री कृष्णचन्द्र ही योगेश्वर, जो सभी योगियों के योगी
अध्यात्म साधनों के द्वारा, जुड़ जाता उनसे हर योगी
भगवान कृष्ण की लीलाएँ या कर्म सभी जन हितकारी
हो कर्म, ज्ञान या भक्ति योग, गीतोपदेश मंगलकारी
जो स्वास्थ्य प्रदान करे हमको, सीमित उस तक होता न योग
सर्वत्र शांति संतोष रहे, सुख सुविधा का हो सदुपयोग
भगवान् कृष्ण हैं योगिराज, भारतवासी के कण्ठहार
संदेश-‘अहर्निश सेवा हो’ वे देते, उनको नमस्कार

Ek Ram Bharosa Hi Kali Main

राम भरोसा
एक राम भरोसा ही कलि में
वर्णाश्रम धर्म न दिखे कहीं, सुख ही छाया सबके मन में
दृढ़ इच्छा विषय भोग की ने, कर्म, भक्ति, ज्ञान को नष्ट किया
वचनों में ही वैराग्य बचा और वेष ने सबको लूट लिया
सच्चे मन से जो जीवन में, रामाश्रित कोई हो पाये
भगवान अनुग्रह से निश्चय, भवसागर पार उतर जाये 

Shrimad Bhagawat Ki Dhwani Hi Se

श्रीमद्भागवत् महिमा
श्रीमद्भागवत् की ध्वनि ही से, सब दोष नष्ट हो जाते हैं
यह वासुदेव वाङ्मय स्वरूप, इसका दर्शन नित सेवन हो
फलरूप वेद-उपनिषद् का ये, दुख शोक नाश यह करता है
सर्वोच्च है सभी पुराणों में, इसकी महिमा का पार नहीं
रसपूर्ण कथा आयोजित हो, वहाँ भक्ति देवि आ जाती है
भगवान् कृष्ण की लीलाओं का, इसके द्वारा पान करें
इसका सेवन यदि नित्य करे, श्रीकृष्ण हृदय में आते हैं
श्रद्धा से पाठ करे इसका, तो पाप सभी जल जाते हैं
सप्ताह श्रवण हो कलियुग में, दुर्भाग्य दुःख मिट जाते हैं

Ek Hi Swaroop Radhika Krishna

युगल सरकार
एक ही स्वरूप राधिका कृष्ण, लीला रस हेतु ही पृथक रूप
एक प्राण हैं श्री राधा मोहन, अरु प्रीति परस्पर भी अनूप
राधा रानी है पूर्ण शक्ति, गोवर्धन-धारी शक्तिमान
श्रीकृष्ण पुकारे राधा को, मुरली में गूँजे वही तान
आह्लाद रूपिणी श्री राधा, श्री विग्रह उनका चपला सा
मुख की सुंदरता अद्वितीय और हाव-भाव लक्ष्मी जैसा
नित नूतन यौवन मन्द हास्य, गतिमान नयन मन को मोहे
उनका विशिष्ठ है अधर-राग, आभूषण अंगों पर सोहे
रासेश्वरी को शत शत प्रणाम, श्रीकृष्ण करें चिन्तन जिनका
वृषभानु-सुता का करें ध्यान, हो स्वतः गान नँदनंदन का  

Shri Ram Jape Ham Kaise Hi

राम नाम महिमा
श्री राम जपें हम कैसे ही
उलटा नाम जपा वाल्मीकि ने, ब्रह्मर्षि हो गये वही
लिया अजामिल ने धोखे से नाम तर गया भवसागर
द्रुपद-सुता जब घिरी विपद् से, लाज बचाई नटनागर
गज, गणिका का काम बन गया, प्रभु-कृपा से ही तो
प्रतीति प्रीति हो दो अक्षर में, श्रीराम मिले उसको तो
रामनाम के पत्थर तर गये, सेतु बँधा सागर में
सेना पहुँच गई लंका में, निशिचर मरे समर में

Karmo Ka Fal Hi Sukh Dukh Hai

कर्म-फल
कर्मों का फल ही सुख दुख है
जिसने जैसा हो कर्म किया, उसका फल वह निश्चित पायेगा
जो कर्म समर्पित प्रभु को हो, तो वह अक्षय हो जायेगा
जो भी ऐसा सत्कर्मी हो, वह उत्तम गति को पायेगा
जो व्यक्ति करे निष्काम कर्म, सर्वथा आश्रित प्रभु के ही
ऐसे भक्तों का निस्संदेह, उद्धार स्वयं प्रभु करते ही

Shri Vishnu Dattatrey Hi

भगवान दत्तात्रेय
श्री विष्णु दत्तात्रेय ही, सादर नमन उनको करुँ
रहते दिगम्बर वेष में, अज्ञान हरते सद्गुरु
दुख दूर करने प्राणियों का, तप किया मुनि अत्रि ने
बेटा बनूँगा आपका, बोला प्रकट हो विष्णु ने
आत्रेय माता अनसुया, जिनमें अहं निःशेष था
सर्वोच्च सती के रूप में, प्रख्यात उनका नाम था
सती धर्म की लेने परीक्षा, ब्रह्मा हरि हर आ गये
सामर्थ्य सती का था प्रबल, नवजात शिशु वे हो गये
अपना पिलाया दूध माँ ने, पूर्ववत् उनको किया
‘माँ! पुत्र होंगे हम तुम्हारे’, वरदान तीनों ने दिया
माँ अनसुया आत्रेय का, जय घोष श्रद्धा से करें
उपदेश व आदर्श उनका, हृदय में अपने धरें
श्री दत्त योगीराज थे, सिद्धों के परमाचार्य थे
निर्लोभ वे उपदेश दे, इसलिए गुरुदत्त थे
आह्लदकारी चन्द्रमा सा, वर्ण दत्तात्रेय का
काली जटा तन भस्म धारे, निर्देश देते ज्ञान का