Aao Manmohan Ji Jou Thari Baat

प्रतीक्षा
आओ मनमोहनाजी, जोऊँ थारी बाट
खान-पान मोहि नेक न भावै, नयनन लगे कपाट
तुम देख्या बिन कल न पड़त है हिय में बहुत उचाट
मीराँ कहे मैं भई रावरी, छाँड़ो नहीं निराट

Aaya Sharan Tumhari Prabhu Ji

शरणागति
आया शरण तुम्हारी प्रभुजी, रखिये लाज हमारी
कनकशिपु ने दिया कष्ट, प्रह्ललाद भक्त को भारी
किया दैत्य का अंत तुम्हीं ने, भक्तों के हितकारी
ग्रस्त हुआ गजराज ग्राह से, स्तुति करी तुम्हारी
आर्तस्तव सुन मुक्त किया, गज को तुमने बनवारी
पांचाली की लगा खींचने, जब दुःशासन सारी
किया प्रवेश चीर में उसके, होने दी न उघारी
विपदा में भक्तों की रक्षा, करते कृष्ण मुरारी
करो अनुग्रह मेरे पर, हे चक्र-सुदर्शन धारी 

Chalo Re Man Jamna Ji Ke Tir

यमुना का तीर
चलो रे मन जमनाजी के तीर
जमनाजी को निरमल पाणी, सीतल होत शरीर
बंसी बजावत गावत कान्हो, संग लिये बलबीर
मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, कुण्डल झलकत हीर
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण-कँवल पर सीर

Utrai Le Lo Kewat Ji

केवट का प्रेम (राजस्थानी)
उतराई ले लो केवटजी, थाँरी नाव की
चरण पकड़ यूँ केवट बोल्यो, सुणो राम रघुराई
थाँरी म्हारी जात न न्यारी, ल्यूँ कइयाँ उतराई
धोबी सूँ धोबी ना लेवे, कपड़ो लेत धुलाई
नाई सूँ नाई ना लेवे, बालाँ की कतराई
थे केवट हो भवसागर का, म्हारे नदी तलाई
जब मैं आऊँ घाट आपरे, दीज्यों पार लगाई
राम लखन सीता के मन में, केवट प्रीति समाई
वर दीन्हो भगती को प्रभुजी, आगे लई विदाई 

Chod Mat Jajo Ji Maharaj

म्हारी लाज
छोड़ मत जाजो जी महाराज
मैं अबला बल नाहिं गुसाईं, तुम मेरे सिरताज
मैं गुणहीन गुण नाहिं गुसाईं, तुम समरथ महाराज
थाँरी होय के किणरे जाऊँ, तुम हिवड़ा रा साज
मीराँ के प्रभु और न कोई, राखो म्हारी लाज

The To Aarogo Ji Madan Gopal

दुग्ध अर्पण
थे तो आरोगोजी मदनगोपाल! कटोरो ल्याई दूध को भर्यो
दूधाजी दीनी भोलावण, जद में आई चाल
धोली गाय को दूध गरम कर, ल्याई मिसरी घाल
कईयाँ रूठ गया हो म्हारा नाथ! कटोरो….
कद ताई रूठ्या रोगा थे बोलो जी महाराज
दूध-कटोरो धर्यो सामने, पीवणरी काँई लाज
भूखा मरता तो चिप जासी थारा चिकणा गाल! कटोरो…
श्याम सलोना दूध आरोगो, साँची बात सुनाऊँ
बिना पियाँ यो दूध-कटोरो, पाछो ले नहीं जाऊँ
देस्यूँ साँवरिया चरणा में देही त्याग! कटोरो
करुण भरी विनती सुण प्रभुजी, लियो कटोरो हाथ
गट-गट दूध पिवण ने लाग्या, भक्त जणारा नाथ
थे तो राखो हो भगताँ री जाती लाज! कटोरो…

Tori Savari Surat Nandlala Ji

साँवरी सूरत
तोरी साँवरी सुरत नन्दलालाजी
जमुना के तीरे धेनु चरावत, काली कामली वालाजी
मोर-मुकुट पीताम्बर शोभे, कुण्डल झलकत लालाजी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, भक्तन के प्रति पालाजी

Nand Rani Ji Ke Putra Hua

श्रीकृष्ण प्राकट्य
नन्दरानीजी के पुत्र हुआ
यह सुन करके ब्रज में सबके मन में भारी आनन्द हुआ
कई मनौतियाँ अरु पुण्यों के परिणाम रूप बेटा आया
तभी बधाई में दाई ने, मनचाहा रत्न हार पाया
गोप गोपियाँ सजे धजे, आशीष दे रहे लाला को
चिरजीवों यशोदा के लाल, परिपूर्ण कर दिया आशा को
डफ झाँझ लिये नाचे गावें, हल्दी से मिले हुवे दधि को
ग्वाले आपस में छिड़क रहे, दे रहे भेंट इक दूजे को
नन्दराय आज हैं अति प्रसन्न, जिसने जो माँगा उसे दिया
ब्रज में समृद्धि भरपूर हुई, कोई न पार इसका पाया

Daras Mhane Bega Dijyo Ji

विरह व्यथा
दरस म्हाने बेगा दीज्यो जी, खबर म्हारी बेगी लीज्यो जी
आप बिना मोहे कल न पड़त है, म्हारा में गुण एक नहीं है जी
तड़पत हूँ दिन रात प्रभुजी, सगला दोष भुला दिज्यो जी
भगत-बछल थारों बिरद कहावे, श्याम मोपे किरपा करज्यो जी
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, आज म्हारी लाज राखिज्यो जी

Prabhu Ji Tum Chandan Ham Paani

दास्य भक्ति
प्रभुजी! तुम चंदन हम पानी, जाकी अँग-अँग बास समानी
प्रभुजी! तुम घन वन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा
प्रभुजी! तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरे दिन राती
प्रभुजी! तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहि मिलत सुहागा
प्रभुजी! तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करे ‘रैदासा’