Jaki Gati Hai Hanuman Ki

हनुमान आश्रय
जाकी गति है हनुमान की
ताकी पैज पूजि आई, यह रेखा कुलिस पषान की
अघटि-घटन, सुघटन-विघटन, ऐसी विरुदावलि नहिं आन की
सुमिरत संकट सोच-विमोचन, मूरति मोद-निधान की
तापर सानुकूल गिरिजा, शिव, राम, लखन अरु जानकी
‘तुलसी’ कपि की कृपा-विलोकनि, खानि सकल कल्यान की

Suni Main Hari Aawan Ki

प्रतीक्षा
सुनी मैं हरि आवन की अवाज
महल चढ़ि चढ़ि देखूँ मोरी सजनी, कब आवे महाराज
दादुर मोर पपीहा बोलै, कोयल मधुरे साज
उमग्यो बदरा चहुँ दिस बरसे, दामिनि छोड़ी लाज
धरती रूप नवा नवा धरिया, इंद्र मिलन के काज
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, बेग मिलो महाराज

Kishori Tere Charanan Ki Raj Pau

श्री श्री राधा महात्म्य
किशोरी तेरे चरणन की रज पाऊँ
बैठि रहौं कुंजन की कोने, श्याम राधिका गाऊँ
जो रज शिव सनकादिक लोचन, सो रज शीश चढाऊँ
राधा स्वामिनि की छवि निरखूँ, नित्य विमल यश गाऊँ
अद्वितीय सौन्दर्य तुम्हारा, मन-मंदिर बिठलाऊँ 

Ramanuj Lakshman Ki Jay Ho

श्री लक्ष्मण
रामानुज लक्ष्मण की जय हो
भगवान् राम के भक्तों का, सारे संकट को हरते हो
शेषावतार को लिये तुम्ही, पृथ्वी को धारण करते हो
हो प्राणनाथ उर्मिला के, सौमित्र तुम्हीं कहलाते हो
महान पराक्रमी, सत्-प्रतिज्ञ, रघुवर के काज सँवारते हो
मुनि विश्वामित्र, जनक राजा, श्री रामचन्द्र के प्यारे हो
अभिमान परशुरामजी का जो भी, तुम ही तो उसे मिटाते हो
अनुरक्त राम की सेवा में, दिन रात तुम्ही तो रहते हो

Aarti Karen Bhagwat Ji Ki

श्रीमद्भागवत आरती
आरती करें भागवतजी की, पंचम वेद से महा पुराण की
लीलाएँ हरि अवतारों की, परम ब्रह्म भगवान कृष्ण की
कृष्ण वाङ्मय विग्रह रूप, चरित भागवत अमृत पीलो
श्रवण करो तरलो भव-कूपा, हरि गुण गान हृदय से कर लो
कथा शुकामृत मन को भाये, शुद्ध ज्ञान वैराग्य समाये
लीला रसमय प्रेम जगाये, भक्ति भाव का रंग बरसाये
जन्म मृत्यु भव-भय को हरती, कलिमल नाशक कथा यही है
सेवन सतत सकल सुख देती, वेद शास्त्र का सार यही है
सत्यकथा मानव हितकारी, पावन परम भागवत गाथा
ज्ञान-भक्ति-युत मंगलकारी, श्रद्धा सहित नवाओ माथा

Ankhiyan Hari Darsan Ki Pyasi

वियोग
अँखिया हरि दरसन की प्यासी
देख्यो चाहत कमलनैन को, निसिदिन रहत उदासी
आयो ऊधौ फिरि गये आँगन, डारि गये गल फाँसी
केसरि तिलक मोतिन की माला, वृन्दावन को वासी
काहु के मनकी कोउ न जानत, लोगन के मन हाँसी
‘सूरदास’ प्रभु तुमरे दरस बिन, लेहौं करवत कासी

Hari Tum Haro Jan Ki Pir

पीड़ा हरलो
हरि तुम हरो जन की भीर
द्रौपदी की लाज राखी, तुम बढ़ायो चीर
भक्त कारन रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर
हरिणकस्यप मारि लीन्हौं, धर्यो नाहिं न धीर
बूड़तो गजराज राख्यौ, कियो बाहर नीर
दासी ‘मीराँ’ लाल गिरिधर, हरो म्हारी पीर

Chaitanya Maha Prabhu Ki Jay Jay

चैतन्य महाप्रभु
चैतन्य महाप्रभु की जय जय, जो भक्ति भाव रस बरसाये
वे विष्णुप्रिया के प्राणनाथ, इस धरा धाम पर जो आये
वे शचीपुत्र गौरांग देव प्रकटे, सबके मन हर्षाये
हे देह कान्ति श्री राधा सी, जो भक्तों के मन को भाये
रस के सागर चैतन्य देव, श्री गौर चन्द्र वे कहलाये
आसक्ति शून्य वह भक्त वेष, जो हरि कीर्तन में सुख पाये
वे भाव राधिका से भावित, प्रेमामृत को जो बरसाये
हो शुद्ध प्रेम इनके जैसा, अज्ञान अविद्या मिट जाये
नयनों से अश्रु गिरे उनके, तो प्रेम छलक बाहर आये
हो कृपा राधिका रानी की, उसका परलोक सुधर जाये
सत्संग कीर्तन नित्य करें, मानव जीवन में सुख पाये

Vrandavan Ki Mahima Apaar

वृन्दावन महिमा
वृन्दावन की महिमा अपार, ऋषि मुनि देव सब गाते हैं
यहाँ फल फूलों से लदे वृक्ष, है विपुल वनस्पति और घास
यह गोप गोपियों गौओं का प्यारा नैसर्गिक सुख निवास
अपने मुख से श्रीकृष्ण यहाँ, बंशी में भरते मीठा स्वर
तो देव देवियाँ नर नारी, आलाप सुनें तन्मय होकर
सब गोपीजन को संग लिये, भगवान् कृष्ण ने रास किया
थी शरद् पूर्णिमा की रजनी, सबको हरि ने आह्लाद किया
श्रीकृष्ण-चरण से यह चिङ्घित, वृन्दावन मन में मोद भरे
वैकुण्ठ लोक तक पृथ्वी की, कीर्ति का यह विस्तार करे 

Aarti Shri Bhagwad Gita Ki

श्रीमद्भगवद्गीता आरती
आरती श्री भगवद्गीता की, श्री हरि-मुख निःसृत विद्या की
पृथा-पुत्र को हेतु बनाकर, योगेश्वर उपदेश सुनाये
अनासक्ति अरु कर्म-कुशलता, भक्ति, ज्ञान का पाठ पढ़ाये
करें कर्म-फल प्रभु को अर्पण, राग-द्वेष मद मोह नसाये
वेद उपनिषद् का उत्तम रस, साधु-संत-जन के मन भाये
करें सार्थक मानव जीवन, भव-बंधन, अज्ञान मिटायें
अद्भुत, गुह्य, पूजनीय गाथा, मानव जीवन सफल बनाये