Ankhiyan Krishna Milan Ki Pyasi

विरह व्यथा
अँखियाँ कृष्ण मिलन की प्यासी
आप तो जाय द्वारका छाये, लोग करत मेरी हाँसी
आम की दार कोयलिया बोलै, बोलत सबद उदासी
मेरे तो मन ऐसी आवै, करवत लेहौं कासी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल की दासी

Aaj Ki Bela Sukhkari

श्री श्री राधा प्राकट्य
आज की बेला सुखकारी
प्रगट भई वृषभानु-नंदिनी, कीरति प्राण-पियारी
गावत सभी बधाई हिलमिल, बरसाने की नारी
अत्यधिक, आनंद महल में बरनत रसना हारी
नौबत बजत और शहनाई, नाचत सखियाँ सारी
नंद यशोदा सुनसुख पायें, हरषे हिय में भारी
भादौ मास, गगन घन छाये, बिजुरी चमके न्यारी
चहुँ ओर है खुशियाँ छाई, ब्रज में प्रिया पधारी 

Manuwa Khabar Nahi Pal Ki

प्रबोधन
मनुवा खबर नहीं पल की
राम सुमिरले सुकृत करले, को जाने कल की
कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी, झूठ कपट छल की
सिर पर धरली पाप गठरिया, कैसे हो हलकी
तारामण्डल सूर्य चाँद में, ज्योति है मालिक की
दया धरम कर, हरि स्मरण कर, विनती ‘नानक’ की 

Aarti Yugal Swaroop Ki

युगल किशोर आरती
आरति युगल स्वरूप की कीजै, चरण-सरोज बसा मन लीजै
नन्द तनय जसुमति महतारी, मदन गोपाल, गोवर्धन धारी
चन्द्रमुखी वृषभानु-किशोरी, सुघड़ सलोनी सूरत न्यारी
कमल नयन श्रीकृष्ण कन्हैया, निरख रूप रीझति है मैया
गोरांगी राधा चित चोरी, दिव्य रूप पर जाय बलैया
मोर-मुकुट कर मुरली सोहे, नटवर वेष देख मन मोहे
दामिनि सी दमके श्री राधा, अलंकार अंगों पर सोहे
बैजंती माला उर धारी, पीतांबर की शोभा न्यारी
मन्द हासयुत राधा प्यारी, जुगल रूप मुद मंगलकारी
राधा के रंग माधव भीजै, श्यामा श्याम अमिय रस पीजै
राधा मोहन सहज सनेही, एक ही तत्व जदपि दो देही
गोप गोपियाँ दे दे तारी, नाचे राधा कुंज बिहारी
कोटि मनोज लजावनि हारी, चपल चारु चितवन पर वारी
रासेश्वरी रसराज चरण में, तन मन धन न्योछावर कीजै
सेवा भाव जुरै निज मन में , दोउ कर जोरि नमन कर लीजै
सुनो श्याम मन की गति मोरी, तुमही प्राण तुमही रखवारे
अटक रहे नैना छबि तोरी, आये हम सब शरण तिहारे

Koi Kahiyo Re Prabhu Aawan Ki

विरह व्यथा
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की, आवन की मन भावन की
आप न आवै, लिख नहिं भेजै, बान पड़ी ललचावन की
ए दोऊ नैन कह्यो नहिं माने, नदियाँ बहे जैसे सावन की
कहा करूँ कछु नहिं बस मेरो, पाँख नहीं उड़ जावन की
‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, चेरी भई तेरे दामन की

Aaj Sakhi Raghav Ki Sudhi Aai

स्मृति
आज सखि! राघव की सुधि आई
आगे आगे राम चलत है, पीछे लक्ष्मण भाई
इनके बीच में चलत जानकी, चिन्ता अधिक सताई
सावन गरजे भादों बरसे,पवन चलत पुरवाई
कौन वृक्ष तल भीजत होंगे, राम लखन दोउ भाई
राम बिना मोरी सूनी अयोध्या, लक्ष्मण बिन ठकुराई
सीता बिन मोरी सूनी रसोई, महल उदासी छाई

Mat Yashoda Shri Ganesh Ki

श्री गणेश-श्री कृष्ण
मात यशोदा श्री गणेश की पूजा करने को आई
मोदक भर कर थाल सजाया, कान्हा को सँग में लाई
नटवर की नटखट चालों की, याद उन्हें जैसे आई
विघ्न न पूजा में हो जाये, शंका मन में जब आई
तभी कन्हैया को खम्भे से, डोरी से जो बाँध दिया
फिर विघ्नेश्वर की पूजा में, निश्चित हो कर ध्यान किया
श्रीगणेश ने आँखे खोली, श्रीहरि को प्रणाम किया
और सूँड से मोदक लेकर, उनके मुख में डाल दिया
मात यशोदा ने देखा तो, मति उनकी चकराई है
फिर तो अपनी चतुराई पर, बार बार पछताई है

Mangal Aarti Divya Yugal Ki

युगल किशोर आरती
मंगल आरति दिव्य युगल की, मंगल प्रीति रीति है उनकी
मंगल कान्ति हँसनि दसनन की, मंगल मुरली मीठी धुन की
मंगल बनिक त्रिभंगी हरि की, मंगल चितवनि मृगनयनी की
मंगल सिर चंद्रिका मुकुट की, मंगल छबि नैननि में अटकी
मंगल शोभा पियरे पटकी, मंगल आभा नील-वसन की
मंगल आभा कमलनयन की, मंगल माधुरि मृदुल बैन की
मंगल छटा युगल अँग अंग की, मंगल क्रीड़ा जमुना तट की
मंगल चरन कमल दोउन की, मंगल करनि भक्ति हरिजन की
मंगल लीला प्रिया श्याम की, मंगल जुगल स्वरुप धाम की

Barse Badariya Sawan Ki

प्रतीक्षा
बरसे बदरिया सावन की, सावन की मनभावन की
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की
नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, आनँद मंगल गावन की

Aashadh Mas Ki Poonam Thi

महर्षि व्यास
आषाढ़ मास की पूनम थी, तब व्यास देव का जन्म हुआ
वेदों के मंत्रों, सूक्तों को, संहिता रूप से पिरो दिया
पुराण अठारह उप-पुराण में, वेदों का विस्तार किया
महाभारत द्वारा भारत का, सांस्कृतिक कोष निर्माण किया
साहित्य समृद्ध इतना उनका, गुरु पद से उनको मान दिया
भगवान व्यास के हम कृतज्ञ, उनको पूजें कर्त्तव्य हुआ
भारतीय संस्कृति दर्शन का, भण्डार हमें उपलब्ध हुआ