Hari Kilkat Jasumati Ki Kaniyan

माँ का स्नेह
हरि किलकत जसुमति की कनियाँ
मुख में तीनि लोक दिखराए, चकित भई नँद-रनियाँ
घर-घर आशीर्वाद दिवावति, बाँधति गरै बँधनियाँ
‘सूर’ स्याम की अद्भुत लीला, नहिं जानत मुनि जनियाँ

Bheje Man Bhawan Ke Uddhav Ke Aawan Ki

गोपियों की ललक
भेजे मन-भावन के उद्धव के आवन की,
सुधि ब्रज-गाँवनि में पावन जबैं लगी
कहैं, ‘रतनाकर’ गुवालिनि की झौरि-झौरि,
दौरि-दौरि नंद-पौरि आवन तबै लगीं
उझकि-उझकि पद-कंजनि के पंजनि पै,
पेखि-पेखि पाती छाती छोहनि छबै लगीं
हमकौं लिख्यौ है कहा, हमकौं लिख्यौ है कहा,
हमकौं लिख्यौ है कहा, कहन सबै लगीं

Radha Ras Ki Khani Sarasta Sukh Ki Beli

श्री राधा
राधा रस की खानि, सरसता सुख की बेली
नन्दनँदन मुखचन्द्र चकोरी, नित्य नवेली
नित नव नव रचि रास, रसिक हिय रस बरसावै
केलि कला महँ कुशल, अलौकिक सुख सरसावै
यह अवनी पावन बनी, राधा पद-रज परसि के
जिह राज सुरगन इन्द्र अज, शिव सिर धारें हरषि के

Sarvatra Bramh Ki Satta Hi

ब्रह्ममय जगत्
सर्वत्र ब्रह्म की सत्ता ही
यह जगत् जीव के ही सदृश, है अंश ब्रह्म का बात यही
माया विशिष्ट हो ब्रह्म जभी, तब वह ईश्वर कहलाता है
ईश्वर, निमित्त व उपादान से दृश्य जगत् हो जाता है
जिस भाँति बीज में अंकुर है, उस भाँति ब्रह्म में जग भी है
सो जीव, सृष्टि, स्थिति व नाश, सब ही तो ब्रह्म के आश्रित है
यह जीव, जगत्, ईश्वर हमको, जो भिन्न दिखाई देते हैं
पर ब्रह्म ज्ञान हो जाने पर, ये भेद सभी मिट जाते हैं

Jaki Gati Hai Hanuman Ki

हनुमान आश्रय
जाकी गति है हनुमान की
ताकी पैज पूजि आई, यह रेखा कुलिस पषान की
अघटि-घटन, सुघटन-विघटन, ऐसी विरुदावलि नहिं आन की
सुमिरत संकट सोच-विमोचन, मूरति मोद-निधान की
तापर सानुकूल गिरिजा, शिव, राम, लखन अरु जानकी
‘तुलसी’ कपि की कृपा-विलोकनि, खानि सकल कल्यान की

Kishori Tere Charanan Ki Raj Pau

श्री श्री राधा महात्म्य
किशोरी तेरे चरणन की रज पाऊँ
बैठि रहौं कुंजन की कोने, श्याम राधिका गाऊँ
जो रज शिव सनकादिक लोचन, सो रज शीश चढाऊँ
राधा स्वामिनि की छवि निरखूँ, नित्य विमल यश गाऊँ
अद्वितीय सौन्दर्य तुम्हारा, मन-मंदिर बिठलाऊँ 

Aarti Karen Bhagwat Ji Ki

श्रीमद्भागवत आरती
आरती करें भागवतजी की, पंचम वेद से महा पुराण की
लीलाएँ हरि अवतारों की, परम ब्रह्म भगवान कृष्ण की
कृष्ण वाङ्मय विग्रह रूप, चरित भागवत अमृत पीलो
श्रवण करो तरलो भव-कूपा, हरि गुण गान हृदय से कर लो
कथा शुकामृत मन को भाये, शुद्ध ज्ञान वैराग्य समाये
लीला रसमय प्रेम जगाये, भक्ति भाव का रंग बरसाये
जन्म मृत्यु भव-भय को हरती, कलिमल नाशक कथा यही है
सेवन सतत सकल सुख देती, वेद शास्त्र का सार यही है
सत्यकथा मानव हितकारी, पावन परम भागवत गाथा
ज्ञान-भक्ति-युत मंगलकारी, श्रद्धा सहित नवाओ माथा

Ankhiyan Krishna Milan Ki Pyasi

विरह व्यथा
अँखियाँ कृष्ण मिलन की प्यासी
आप तो जाय द्वारका छाये, लोग करत मेरी हाँसी
आम की दार कोयलिया बोलै, बोलत सबद उदासी
मेरे तो मन ऐसी आवै, करवत लेहौं कासी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल की दासी

Manuwa Khabar Nahi Pal Ki

प्रबोधन
मनुवा खबर नहीं पल की
राम सुमिरले सुकृत करले, को जाने कल की
कौड़ी कौड़ी माया जोड़ी, झूठ कपट छल की
सिर पर धरली पाप गठरिया, कैसे हो हलकी
तारामण्डल सूर्य चाँद में, ज्योति है मालिक की
दया धरम कर, हरि स्मरण कर, विनती ‘नानक’ की 

Udho Braj Ki Yad Satave

ब्रज की याद
ऊधो! ब्रज की याद सतावै
जसुमति मैया कर कमलन की, माखन रोटी भावै
बालपने के सखा ग्वाल, बाल सब भोरे भारे
सब कुछ छोड़ मोहिं सुख दीन्हौ, कैसे जाय बिसारे
ब्रज-जुवतिन की प्रीति -रीति की, कहा कहौं मैं बात
लोक-वेद की तज मरजादा, मो हित नित ललचात
आराधिका, नित्य आराध्या, राधा को लै नाम
चुप रहि गए, बोल नहिं पाए, परे धरनि हिय थाम