Raghuvar Tumko Meri Laj

विरूद
रघुवर तुमको मेरी लाज
सदा सदा मैं सरन तिहारी, तुम बड़े गरीब-निवाज
पतित उधारन विरूद तिहारो, श्रवनन सुनी आवाज
हौं तो पतित पुरातन कहिये, पार उतारो जहाज
अघ खंडन, दुख-भंजन जन के, यही तिहारो काज,
‘तुलसिदास’ पर किरपा करिये, भक्ति दान देहु आज

Abki Tek Hamari, Laj Rakho Girdhari

शरणागति
अबकी हमारी, लाज राखो गिरिधारी
जैसी लाज राखी अर्जुन की, भारत-युद्ध मँझारी
सारथि होके रथ को हाँक्यो, चक्र सुदर्शन धारी
भक्त की टेक न टारी
जैसी लाज राखी द्रोपदी की, होन न दीनि उघारी
खेंचत खेंचत दोउ भुज थाके, दुःशासन पचि हारी
चीर बढ़ायो मुरारी
सूरदास की लज्जा राखो, अब को है रखवारी
राधे राधे श्रीवर प्यारी, श्री वृषभानु-दुलारी
शरण मैं आयो तिहारी

Tum Meri Rakho Laj Hari

शरणागति
तुम मेरी राखौ लाज हरी
तुम जानत सब अंतरजामी, करनी कछु न करी
औगुन मोसे बिसरत नाहीं, पल-छिन घरी-घरी
सब प्रपंच की पोट बाँधिकैं, अपने सीस धरी
दारा-सुत-धन मोह लियो है, सुधि-बुधि सब बिसरी
‘सूर’ पतित को बेग उधारो, अब मेरी नाव भरी

Ab To Nibhayan Saregi Rakh Lo Mhari Laj

शरणागति
अब तो निभायाँ सरेगी, रख लो म्हारी लाज
प्रभुजी! समरथ शरण तिहारी, सकल सुधारो काज
भवसागर संसार प्रबल है, जामे तुम ही जहाज
निरालम्ब आधार जगत्-गुरु, तुम बिन होय अकाज
जुग जुग भीर हरी भक्तन की, तुम पर उनको नाज
‘मीराँ’ सरण गही चरणन की, पत राखो महाराज

Bin Kaju Aaj Maharaj Laj Gai Meri

द्रोपदी का विलाप
बिन काज आज महाराज लाज गई मेरी
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी
दुःशासन वंश कठोर, महा दुखदाई
खैंचत वह मेरो चीर लाज नहिं आई
अब भयो धर्म को नास, पाप रह्यो छाई
यह देख सभा की ओर नारि बिलखाई
शकुनि दुर्योधन, कर्ण खड़े खल घेरी
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी
तुम दीनन की सुध लेत देवकी-नन्दन
महिमा अनन्त भगवन्त भक्त-भय भंजन
तुम कियो सिया दुख दूर शम्भु-धनु खण्डन
अति आर्ति-हरण गोपाल मुनिन मन-रंजन
करुणानिधान भगवान करी क्यों देरी
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण में तेरी
बैठा जहाँ राज समाज, नीति सब खोई
नहिं कहत धर्म की बात सभा में कोई
पाँचो पति बैठे मौन कौन गति होई
ले नन्दनँदन को नाम द्रोपदी रोई
करि करि विलाप सन्ताप सभा में हेरी
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण मैं तेरी
तुम सुनी गजेन्द्र की टेर, विष्णु अनिवासी
ग्रह मारि छुड़ायो बन्दि काटि पग फाँसी
मै जपूँ तुम्हारो नाम द्वारिका वासी
अब काहे राज समाज करावत हाँसी
अब कृपा करो यदुनाथ जान चित चेरी
दुख हरो द्वारिकानाथ शरण में तेरी

Prabhu Rakho Laj Hamari

शरणागति
प्रभु! राखो लाज हमारी
अमृत बना पिया विष मीरा, चरण-कमल बलिहारी
जिन भक्तों ने लिया सहारा, उनकी की रखवारी
खोया समय भोग में मैंने, तुमको दिया बिसारी
पापी कौन बड़ा मेरे से, तुम हो कलिमल हारी
प्रीति-पात्र मैं बनूँ तुम्हारा, संबल दो बनवारी
अविनय क्षमा करो नँदनंदन, आया शरण तुम्हारी
जो चाहे सो रूप धरो हरि, आओ कृष्ण मुरारी

Rang Darat Laj Na Aai

होली
रंग डारत लाज न आई, नन्दजी के कुँवर कन्हाई
माखन-चोर रसिक मतवारे, गलियन धूम मचाई,
गुलचे खाये भूल गये क्यों, करन लगे ठकुराई
सखि! वाँको शरम न आई
हाथ लकुटिया काँधे कमरिया, बन बन धेनु चराई,
जाति अहीर सबहिं जन जानत, करन लगे ठकुराई
छलिये जानत लोग लुगाई
मात जसोदा ऊखल बाँधे, रोनी सूरति बनाई,
वे दिन अपने भूलि गये सब, करन लगे ठकुराई
कुछ करलो याद कन्हाई