Kab Dekhongi Nayan Vah Madhur Murati

राम का माधुर्य
कब देखौंगी नयन वह मधुर मूरति
राजिव दल नयन, कोमल-कृपा अयन, काम बहु छबि अंगनि दूरति
सिर पर जटा कलाप पानि सायक चाप उर रुचिर वनमाल मूरति
‘तुलसिदास’ रघुबीर की सोभा सुमिरि, भई मगन, नहीं तन की सूरति

Nachat Nandlal Madhur Bajat Paijaniya

बालकृष्ण
नाचत नंदलाल, मधुर बाजत पैजनियाँ
निरखि निरखि हुलसहि हिय, मोहित नँदरनियाँ
मणिमय आँगन अनूप, निरखत निज छाँह रूप
हँसि हँसि निरखत स्वरूप, करि करि किलकरियाँ
निरखि सो अनूप रंग, मो मन अतिसय उमंग
पुलकित सब अंग अंग, पग पग रुनझुनियाँ

Muskan Madhur Mohini Chitwan

श्री राधा कृष्ण स्तवन
मुस्कान मधुर, मोहिनी चितवन, राधा गोविंद का हो चिन्तन
वृषभानु-कुमारी, नँद-नन्दन, मैं चरण वन्दना करता हूँ
मुख नयन कमल से खिले हुए, सिर स्वर्ण चन्द्रिका मोर मुकुट
केशर-कस्तूरी तिलक भाल, मैं ध्यान उन्हीं का करता हूँ
श्री अंगों की शोभा अनूप, नीलाम्बर पीताम्बर पहने
फूलों के गजरे रत्न हार, वह रूप दिव्य मन धरता हूँ
जो नृत्य गीत के अनुरागी, ब्रज सुन्दरियाँ जिनके प्रेमी
नट नटी वेष में जो सज्जित, मैं शरण उन्हीं की लेता हूँ
उत्कृष्ट प्रेम के जो सागर, वे प्रिया और प्रियतम अनुपम
जो सभी सुखों के सारभूत, मैं भजन उन्हीं का करता हूँ
आल्हादिनि राधा मनमोहन, क्रीड़ास्थल जिनका वृन्दावन
वे महाभाव रसराज वही,यशगान उन्हीं का करता हूँ

Shri Krishna Chandra Madhurati Madhur

श्रीकृष्ण का माधुर्य
श्री कृष्णचन्द्र मधुरातिमधुर
है अधर मधुर मुख-कमल मधुर, चितवनी मधुर रुचि-वेश मधुर
है भृकटि मधुर अरु तिलक मधुर, सिर मुकुट मधुर कच कुटिल मधुर
है गमन मधुर अरु नृत्य मधुर, नासिका मधुर नखचन्द्र मधुर
है रमण मधुर अरु हरण मधुर, महारास मधुर संगीत मधुर
है गोप मधुर, गोपियाँ मधुर, संयोग मधुर उद्गार मधुर
है हास्य मधुर मुसकान मधुर, स्पर्श मधुर कर-कमल मधुर
गुंजा-माला, पट-पीत मधुर, यमुना-तट क्रीड़ा भ्रमण मधुर
माखन चोरी, बंशी-वादन, गोचारण गिरिधर चरित मधुर
शुचि वन-विहार रसमय लीला, अरु प्रणय-निरीक्षण भाव मधुर
राधावल्लभ घनश्याम मधुर, किंकिणी मधुर नूपुर मधुर
न्योछावर कोटि मदन शोभा, राधिका कृष्ण मधुरातिमधुर

Shri Radha Nam Madhur Anmol

राधा नाम अनमोल
श्री राधा नाम मधुर अनमोल
नाम सुखद राधा प्यारी को, मुँह में मिश्री घोल
सुख सरिता श्री राधा स्वामिनि, दर्शन कर सुख पाऊँ
अंग अंग अनुराग श्याम का, चरणों में सिर नाऊँ
दो अक्षर राधा रानी के, हिय में इन्हें बसाऊँ
सोच विचार और सब त्यागूँ, राधा के गुण गाऊँ