Namo Namo Tulsi Maharani

तुलसी की महिमा
नमो नमो तुलसी महारानी, नमो नमो हरि की पटरानी
जाको दरस परस अघ नासे, महिमा वेद पुराण बखानी
साखा पत्र मंजरी कोमल, श्री पति चरण-कमल लपटानी
धन्य आप ऐसो व्रत कीन्हो, सालिगराम के शीश चढ़ानी
छप्पन भोग धरे हरि आगे, तुलसी बिन प्रभु एक न मानी
प्रेम प्रीत कर हरि वश कीन्हे, साँवरी सूरत ह्रदय समानी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, भक्ति दान दीजै महारानी

Krishna Priya Jamuna Maharani

श्री यमुना स्तवन
कृष्ण-प्रिया जमुना महारानी
श्यामा वर्ण अवस्था षोडश सुन्दर रूप न जाय बखानी
नयन प्रफुल्लित अम्बुज के से, नुपूर की झंकार सुहानी
नीली साड़ी शोभित करधनी मोतियन माल कण्ठ मनभानी
स्वर्ण रत्न निर्मित दो कुण्डल, दिव्य दीप्ति जिसकी नहीं सानी
आभूषण केयूर आदि की,असीमित शोभा सुखद सुहानी
देवी का सौन्दर्य मनोहर, धरे हृदय में ऋषि, मुनि ज्ञानी
सूर्य-नन्दिनी यमुना मैया, भक्ति कृष्ण की दो वरदानी

Jay Jay Jay Durga Maharani

दुर्गा स्तुति
जय जय जय दुर्गा महारानी, दर्शन दो दुर्गा महारानी
विश्व विमोहित करने वाली, तीन लोक में रहने वाली
जग जननी, जय माँ कल्याणी, दर्शन दो दुर्गा महारानी
पाप नाश कर देने वाली, दुख विपत्ति को हरने वाली
सिंहवाहिनी, मातु भवानी, दर्शन दो दुर्गा महारानी
श्रद्धा करुणा भक्ति स्वरूपा, सुख वैभव को देने वाली
विन्ध्य वासिनी शांत भवानी, दर्शन दो दुर्गा महारानी

Gyan Mohi Dije Maharani

देवी स्तवन
ज्ञान मोहिं दीजै महारानी
मैं धरूँ तिहारो ध्यान, भक्ति मोहिं दीजै महारानी
मैं करूँ सदा गुणगान, ज्ञान मोहि दीजै महारानी
ब्रह्मा-शिव-हरि तुमको ध्यावे, हे अभीष्ट दानी
ऋषि-मुनि जन सब करे वन्दना, हे माँ कल्याणी
जय दुर्गे दुर्गति, दुःख नाशिनि अमित प्रभा वाली
देवि सरस्वति लक्ष्मी रूपिणि, ललिता, महाकाली
कर्णफूल, केयूर अरु कंगन, रत्न माल सोहे
जगमग किरीट, शीश पर बिन्दी, अर्ध-चन्द्र मोहे
विद्याधरियाँ, सकल सिद्धियाँ, सेवत दिन-राती
खड्ग, चक्र, अंकुश कर धारे, महिषासुर घाती
हे गजवदन षडानन माता, शिवशंकर प्यारी
त्रिपुर-सुन्दरी, शुद्ध स्वरूपा, प्रतिपालन हारी
दुष्ट, कुटिल, पापी होकर भी, मैं संतति तेरी
हे जगदम्बे कष्ट निवारो, हे मैया मेरी

Tulsi Maharani Ko Pranam

तुलसी महिमा
तुलसी महारानी को प्रणाम
पटरानी ये ही श्री हरि की, जो अद्वितीय लोकाभिराम
शालीग्राम के शीश चढ़े वे, हरि अर्चन इनसे ही हो
सुख शांति स्वास्थ्य भी दे हमको, जब श्रद्धा से जल सिंचन हो
जो भोग लगे नारायण को, तुलसी के बिना नहीं स्वीकारे
महिमा अपार तुलसीजी की, माँ भक्ति दान दो, पाप जरे

Vandaniya Tulsi Maharani

तुलसी अर्चना
वंदनीय तुलसी महारानी, अद्भुत महिमा शास्त्र बखानी
नित्य धाम गोलोक से आई, कल्पवृक्ष सम महिमा गाई
श्याम वर्ण शोभा सुखदाई, पृथ्वी मूल्यवान निधि पाई
श्री हरि सेवा पूजन हेतु, तुलसीजी का बाग लगाये
प्रेत पिशाच भूत भग जाये, यज्ञ, दान, व्रत का फल पाये
प्रभु पूजा नैवेद्य आदि में, तुलसी दल अनिवार्य धराये
तुलसी निकट करे जप स्तुति, क्लेश कष्ट सारे मिट जाये
विश्व पूजिता, विश्वपावनी, कृष्ण प्रिया कल्याण कारिणी
तुलसी-दल से हो हरि अर्चन, कलिमल नाश करे वरदायिनि

Jay Jay Jay Tulsi Maharani

तुलसी आरती
जय जय जय तुलसी महारानी, महिमा अमित पुराण बखानी
प्रादुर्भाव विष्णु के द्वारा, पूजनीय भक्तन मन मानी
तेरे श्री अंगो से प्रकटे, मंजरिया, पल्लव मन-भाये
शालिग्राम शिला का पूजन, तुमसे करे सदा सुख पाये
हरि पूजन में तुम्हें चढ़ाये, कलिमल-नाश करे पुण्यार्जन
गो का दान दिलाये जो फल, सुलभ कराये तेरा दर्शन
विश्वपूजिता, कृष्णभावनी! मंगल आरती करें तुम्हारी
अविचल भक्ति मिले श्री हरि की, वर दो विनती यही हमारी