Main Jogi Jas Gaya Bala

शिव द्वारा कृष्ण दर्शन
मैं जोगी जस गाया बाला, मैं जोगी जस गाया
तेरे सुत के दरसन कारन, मैं काशी तज आया
पारब्रह्म पूरन पुरुषोत्तम, सकल लोक जाकी माया
अलख निरंजन देखन कारन, सकल लोक फिर आया
जो भावे सो पावो बाबा, करो आपुनी दाया
देउ असीस मेरे बालक को, अविचल बाढ़े काया
ना लेहौं मैं पाट पाटंबर, ना तेरी कंचन माया
मुख देखों तेरे बालक को, यह मेरे मन भाया
कर जोरे बिनवै नंदरानी, सुन हे जोगी राया
मुख देखन नहीं देहौं बाबा, बालक जात डराया
जाकी दृष्टि सकल जग ऊपर, सो क्यों जात डराया
तीन लोक को मालिक मेरो, तेरे भवन छिपाया
बालकृष्ण को लाइ जसोदा, कर अंचल मुख छाया
गोद पसार चरन-रज बंदी, अति आनंद बढ़ाया
निरखि निरखि मुख पंकज लोचन, नैनन नीर बहाया
‘सूर’ परिकमा करके शिव ने, सींगी-नाद बजाया

Main To Sanware Ke Rang Rachi

प्रगाढ़ प्रीति
मैं तो साँवरे के रँग राची
साजि सिंगार बाँधि पग घुँघरू, लोक-लाज तजि नाची
गई कुमति लई साधु की संगति, स्याम प्रीत जग साँची
गाय गाय हरि के गुण निस दिन, काल-ब्याल सूँ बाँची
स्याम बिना जग खारो लागत, और बात सब काँची
‘मीराँ’ गिरिधर-नटनागर वर, भगति रसीली जाँची

Kisori Karat Keli Aangal Main

किसोरी की क्रीड़ा
किसोरी करत केलि आँगन में
चलत फिरत छम छम आँगन में, होत मगन अति मन में
कीरति की है लाड़-लड़ैती, बरसत रस छन छन में
वृषभानू की तो मनभानी, पगी हुई रसघन में
प्रीति-रीति की प्रतिमा पूरी, उपमा नहिं त्रिभुवन में
मेरे तो तन-मन की स्वामिनि, लगी लगन चरणन में

Gopi Vallabh Ke Darshan Main

प्रीति-माधुरी
गोपीवल्लभ के दर्शन में, मिलता सुख वैसा कहीं नहीं
गोपीजन का था प्रेम दिव्य, प्रेमानुराग की सरित् बही
दण्डकवन के ऋषि मुनि ही तो, आकर्षित थे राघव प्रति जो
वे बनी गोपियाँ, पूर्ण हुर्इं, अभिलाषा थी इनके मन जो
वे देह दशा को भूल गर्इं, हृदय में कोई और न था
श्रीकृष्णचन्द्र से प्रेम किया, वह तो आनन्द अद्वितीय था
जब सभी इन्द्रियों के द्वारा, भक्ति रस का ही पान करें
स्थिति प्रेम की अकथनीय, गोपी जिसमें निशि दिन विहरें 

Badhai Se Nahi Phulo Man Main

प्रशंसा
बड़ाई से नहिं फूलों मन में
ध्यान न रहता जो भी खामियाँ, रहती हैं अपने में
काम प्रशंसा का जब होए, समझो कृपा प्रभु की
याद रहे कि प्रशंसा तो बस, मीठी घूँट जहर की
नहीं लगाओ गले बड़ाई, दूर सदा ही भागो
होगी श्लाघा बड़े बनोगे, सपने से तुम जागो 

Main Krishna Nam Ki Chudiyan Pahanu

भरतार श्याम
मैं कृष्ण नाम की चुड़ियाँ पहनूँ, आँख में कजरा डार
गले में मोतियन माला पहनूँ, उनके हित श्रंगार
ऐसे जन को नहीं वरूँ मैं, जो कि जिये दिन चार
मेरे तो भरतार श्याम हैं, उन सँग करूँ विहार
करूँ निछावर जीवन सारा, वे ही प्राणाधार
स्वत्व मिटे, कुछ रहे न मेरा, माया मोह निवार

Main To Ta Din Kajara Dehon

श्री कृष्ण से प्रीति
मैं तो ता दिन कजरा दैहौं
जा दिन नंदनँदन के नैननि, अपने नैन मिलैहौं
सुन री सखी, यही जिय मेरे, भूलि न और चितैहौं
अब हठ ‘सूर’ यहै व्रत मेरौ विष खाकरि मरि जैहौ

Main Hari Charanan Ki Dasi

हरि की दासी
मैं हरि चरणन की दासी
मलिन विषय रस त्यागे जग के, कृष्ण नाम रस प्यासी
दुख अपमान कष्ट सब सहिया, लोग कहे कुलनासी
आओ प्रीतम सुन्दर निरुपम, अंतर होत उदासी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, चैन, नींद सब नासी

Main Kou Bichadi Cheri Tihari

बिछुड़ी चेरी
मैं कोउ बिछुड़ी चेरि तिहारी
तुम सौ बिछुर स्वामिनी! जग में डोली मारी मारी
अपनी का करतूत कहों, यह लीला सबहि तिहारी
जहाँ गई ज्यों त्यों सुख दुख में, सारी वयस गुजारी
सबसों हो निरास अब राधे! आई सरन तिहारी
अपुनी को अपनाय हरहु अब, हिय की हलचल भारी
देहु चरण चाकरी लाड़िली, निज निधि यही हमारी
निरखि निरखि तव रूप माधुरी, रहिहों सदा सुखारी

Rang Chayo Barsane Main

होली
रंग छायो बरसाने में
नंदलाल खेलन को आयो होरी को हुरदंग मचायो
नाचै सब दे दे कर ताल, रंग छायो बरसाने में
घर द्वारे पे घेर के गोरिन ऊपर रंग बरसायो
सब मगन भई ब्रजबाल, रंग छायो बरसाने में
छैली मीठी बात बनावे, गोपिन को मन ये ललचाये
श्याम ने सबको किचड निहाल, रंग छायो बरसनो में
सखियाँ बज विविध बजावैं, प्यारे को मिल नाच नचावैं
गगन में छायो लाल गुलाल, रंग छायो बरसाने में
सब के मन आनंद समाये,कोई पार न इसको पाये
यमुन जल भयो आज है लाल, रंग छायो बरसाने में