Maiya Main To Chand Khilona

कान्हा की हठ
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं
जैहौं, लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं
सुरभी कौ पे पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं
ह्वैहौं पूत नंद बाबा कौ, तेरौ सुत न कहैहौं
आगै आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुल्हनिया दैहौं
तेरी सौं, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं
‘सूरदास’ ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं

Maiya Ne Bandha Lala Ko

माखन चोर
मैया ने बाँधा लाला को
नहीं माखन की चोरी छोड़ी, तब उसका शिक्षा देने को
जसुमति तो बाँध नहीं पाई, थक करके आखिर बैठ गई
इतना कठोर यह काम किया मन में भारी वे पछताई
गोपीजन सुन दौड़ी आई हा हा कर सभी दुखी थीं
मैया से कान्हा स्वतः बंधे आंसू से भरी गोपियाँ थीं
बोली हमको आनँद आता जब माखन की चोरी करता
कान्हा जीता जसुमति हारी यह कृष्ण कन्हैया जग त्राता

Maiya Main Nahi Makhan Khayo

माखन चोरी
मैया मैं नहिं माखन खायौ
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि, मेरे मुख लपटायौ
देखि तुही सींके पर भाजन, ऊँचे धरि लटकायौ
हौ जु कहत, नन्हें कर अपने, मैं कैसे करि पायौ
मुख दधि पौंछि बुद्धि इक कीन्हीं, दोना पीठि दुरायौ
डारि साट मुसकाई जसोदा, स्यामहिं कण्ठ लगायौ
बाल विनोद मोद मन मोह्यो, भक्ति प्रताप दिखायौ
‘सूरदास’ जसुमति कौ यह सुख, सिव ब्रह्म नहिं पायौ

Jay Ganga Maiya

गंगा आरती
जय गंगा मैया, माँ जय सुरसरि मैया
आरती करे तुम्हारी, भव-निधि की नैया
हरि-पद-पद्म-प्रसूति, विमल वारिधारा
ब्रह्म द्रव भागीरथि, शुचि पुण्यागारा
शंकर-जटा विहारिणि, भव-वारिधि-त्राता
सगर-पुत्र गण-तारिणि, स्नेहमयी माता
‘गंगा-गंगा’ जो जन, उच्चारे मुख से
दूर देश स्थित भी, पाये मुक्तिभय से
मृत व्यक्ति की अस्थियाँ जो प्रवेश पाये
वो भी पावन होकर परम धाम जाये
हे माता करुणामयी, शरण मुझे दीजै
आरती करें तुम्हारी, आप कृपा कीजै  

Maiya Mori Kamar Koun Lai

बाल क्रीड़ा
मैया ! मोरी कामर कौन लई
गाय चरावन जात वृन्दावन, खरिक में भाज गई
एक कहे तोरि कारी कमरिया, जमुना में जात बही
एक कहे तोरी कामर देखी, सुरभी खाय गई
एक कहे नाचौ हम आगे, कामर देहु नई
‘सूरदास’ प्रभु जसुमति आगे, अँसुवन धार बही

Aarti Kalindi Maiya

यमुना आरती
आरती कालिंदी मैया की, कृष्ण-प्रिया श्री जमुनाजी की
जय श्यामा शुभदायिनी जय जय, मन वांछित फलदायिनि जय जय
जय ब्रज-मण्डल-वासिनि जय जय, सरिता पाप-विनाशिनि जय जय
जय कलि-कलुष-नसावनि जय जय, मंगलमय माँ पावनी, जय जय
जय गोलोक-प्रदायिनि जय जय, जय मधु गन्ध-विलासिनि जय जय

Maiya Mori Main Nahi Makhan Khayo

माखन चोरी
मैया मोरी मैं नहिं माखन खायौ
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुवन मोहि पठायौ
चार पहर वंशीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयौ
मैं बालक बहियन को छोटो, छींको केहि विधि पायौ
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायौ
तू जननी मन मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायौ
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायौ
यह लै अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहि नाच नचायौ
‘सूरदास’ तब बिहँसि यसोदा, लै उर-कंठ लगायौ

Maiya Mohi Dau Bahut Khijayo

खीजना
मैया, मोहिं दाऊ बहुत खिझायौ
मोंसो कहत मोल को लीन्हौं, तोहिं जसुमति कब जायौ
कहा कहौं यहि रिस के मारे, खेलन हौं नहिं जात
पुनि पुनि कहत कौन है माता, को है तेरो तात
गोरे नन्द जसोदा गोरी, तुम कत श्याम शरीर
चुटकी दै दै हँसत ग्वाल सब, सिखे देत बलबीर
तू मोहीं को मारन सीखी, दाउहिं कबहुँ न खीझै
मोहन को मुख रिस समेत लखि, जसुमति सुनि सुनि रीझै
सुनहु कान्ह बलभद्र चबाई, जनमत ही कौ धूत
‘सूर’ श्याम मोहिं गोधन की सौं, हौं माता तू पूत

Maiya Ri Tu Inaka Janati

राधा कृष्ण प्रीति
मैया री तू इनका जानति बारम्बार बतायी हो
जमुना तीर काल्हि मैं भूल्यो, बाँह पकड़ी गहि ल्यायी हो
आवत इहाँ तोहि सकुचति है, मैं दे सौंह बुलायी हो
‘सूर’ स्याम ऐसे गुण-आगर, नागरि बहुत रिझायी हो

Karat Shrangar Maiya Man Bhavat

श्रृंगार
करत श्रृंगार मैया मन भावत
शीतल जल तातो करि राख्यो, ले लालन को बैठ न्हवावत
अंग अँगोछ चौकी बैठारत, प्रथमही ले तनिया पहरावत
देखो लाल और सब बालक, घर-घर ते कैसे बन आवत
पहर्यो लाल झँगा अति सुंदर, आँख आँज के तिलक बनावत
‘सूरदास’, प्रभु खेलत आँगन, लेत बलैंया मोद बढ़ावत