Maiya Kabahi Badhegi Choti

बालकृष्ण माधुर्य
मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी
किती बार मोहि दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी
तू जो कहति बल की बेनी ज्यौं, ह्वै है लाँबी मोटी
काढ़त गुहत नहावत पोंछत, नागिन सी भ्वै लोटी
काचो दूध पिवावति पचि पचि, देति न माखन रोटी
‘सूरदास’ चिरजीवौ दोउ भैया, हरि-हलधर की जोटी

Priy Putra Parvati Maiya Ke

श्री गणेश वंदना
प्रिय पुत्र पार्वती मैया के, गज-वदन विनायक विघ्न हरे
जो ऋद्धि सिद्धि दाता सेवित, संताप शोक को दूर करे
जामुन कपित्थ जैसे फल का, रुचि पूर्वक भोग लगाते हैं
मोदक के लड्डू जिनको प्रिय, सारे जग का हित करते हैं
सम्पूर्ण यज्ञ के जो रक्षक, कर में जिनके पाशांकुश है
है रक्त वर्ण जिनके तन का, मूषक जिनका प्रिय वाहन है
हे वक्रतुण्ड! हे लम्बोधर! मंगल दाता! सब विघ्न हरो
शत शत प्रणाम मैं करूँ प्रभो, मनवांछित कारज पूर्ण करो

Maiya Gai Charawan Jehon

गौ-चारण
मैया ! गाइ चरावन जैहौ
तू कहि महर नंदबाबा सौं, बड़ौ भयौ न डरैहौं
रैता, पैता, मना, मनसुखा, हलधर संगहि रैहौं
बंसीबट पर ग्वालिन कै संग, खेलत अति सुख पैहौं
मैया, भोजन दै दधि काँवरि, भूख लगे तैं खैहौं
‘सूरदास’ है साखि जमुन-जल, सौंह देहु जु नहैहौं

Main Nahi Mati Khai Maiya

परब्रह्म श्याम
मैं नहीं माटी खाई मैया, मैं नहीं माटी खाई
ग्वाल सखा सब झूठे मैया, जिनको तू पतियाई
एक बार चुपके से लाला ने जब मिट्टी खाई
देख लिया मैया न उसको, तभी दौड़ कर आई
हाथ पकड़ उसका तब बोलीं, मुँह तो खोल कन्हाई
तीनों लोक लाल के मुँह में, देखे तो चकराई
परंब्रह्म यह लाल हमारा, जिसको कहें कन्हाई
कहा यही था गर्ग-देव ने, याद आज अब आई
बाबा कहे ‘न डाँटो लाला’ यह केवल निठुराई
पाँच बरस का नन्हा बालक, मैया भी पछताई

Maiya Main To Chand Khilona

कान्हा की हठ
मैया, मैं तौ चंद-खिलौना लैहौं
जैहौं, लोटि धरनि पर अबहीं, तेरी गोद न ऐहौं
सुरभी कौ पे पान न करिहौं, बेनी सिर न गुहैहौं
ह्वैहौं पूत नंद बाबा कौ, तेरौ सुत न कहैहौं
आगै आउ, बात सुनि मेरी, बलदेवहि न जनैहौं
हँसि समुझावति, कहति जसोमति, नई दुल्हनिया दैहौं
तेरी सौं, मेरी सुनि मैया, अबहिं बियाहन जैहौं
‘सूरदास’ ह्वै कुटिल बराती, गीत सुमंगल गैहौं

Maiya Ne Bandha Lala Ko

माखन चोर
मैया ने बाँधा लाला को
नहीं माखन की चोरी छोड़ी, तब उसका शिक्षा देने को
जसुमति तो बाँध नहीं पाई, थक करके आखिर बैठ गई
इतना कठोर यह काम किया मन में भारी वे पछताई
गोपीजन सुन दौड़ी आई हा हा कर सभी दुखी थीं
मैया से कान्हा स्वतः बंधे आंसू से भरी गोपियाँ थीं
बोली हमको आनँद आता जब माखन की चोरी करता
कान्हा जीता जसुमति हारी यह कृष्ण कन्हैया जग त्राता

Maiya Main Nahi Makhan Khayo

माखन चोरी
मैया मैं नहिं माखन खायौ
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि, मेरे मुख लपटायौ
देखि तुही सींके पर भाजन, ऊँचे धरि लटकायौ
हौ जु कहत, नन्हें कर अपने, मैं कैसे करि पायौ
मुख दधि पौंछि बुद्धि इक कीन्हीं, दोना पीठि दुरायौ
डारि साट मुसकाई जसोदा, स्यामहिं कण्ठ लगायौ
बाल विनोद मोद मन मोह्यो, भक्ति प्रताप दिखायौ
‘सूरदास’ जसुमति कौ यह सुख, सिव ब्रह्म नहिं पायौ

Jay Ganga Maiya

गंगा आरती
जय गंगा मैया, माँ जय सुरसरि मैया
आरती करे तुम्हारी, भव-निधि की नैया
हरि-पद-पद्म-प्रसूति, विमल वारिधारा
ब्रह्म द्रव भागीरथि, शुचि पुण्यागारा
शंकर-जटा विहारिणि, भव-वारिधि-त्राता
सगर-पुत्र गण-तारिणि, स्नेहमयी माता
‘गंगा-गंगा’ जो जन, उच्चारे मुख से
दूर देश स्थित भी, पाये मुक्तिभय से
मृत व्यक्ति की अस्थियाँ जो प्रवेश पाये
वो भी पावन होकर परम धाम जाये
हे माता करुणामयी, शरण मुझे दीजै
आरती करें तुम्हारी, आप कृपा कीजै  

Maiya Mori Kamar Koun Lai

बाल क्रीड़ा
मैया ! मोरी कामर कौन लई
गाय चरावन जात वृन्दावन, खरिक में भाज गई
एक कहे तोरि कारी कमरिया, जमुना में जात बही
एक कहे तोरी कामर देखी, सुरभी खाय गई
एक कहे नाचौ हम आगे, कामर देहु नई
‘सूरदास’ प्रभु जसुमति आगे, अँसुवन धार बही

Aarti Kalindi Maiya

यमुना आरती
आरती कालिंदी मैया की, कृष्ण-प्रिया श्री जमुनाजी की
जय श्यामा शुभदायिनी जय जय, मन वांछित फलदायिनि जय जय
जय ब्रज-मण्डल-वासिनि जय जय, सरिता पाप-विनाशिनि जय जय
जय कलि-कलुष-नसावनि जय जय, मंगलमय माँ पावनी, जय जय
जय गोलोक-प्रदायिनि जय जय, जय मधु गन्ध-विलासिनि जय जय