Bethi Sagun Manavati Mata

माँ की आतुरता
बैठी सगुन मनावति माता
कब ऐहैं मेरे बाल कुसल घर, कहहु, काग ! फुरि बाता
दूध-भात की दौनी दैहौं, सोने चोंच मढ़ैहौं
जब सिय-सहित विलोकि नयन भरि, राम-लषन उर लैहौं
अवधि समीप जानि जननी जिय अति आतुर अकुलानी
गनक बोलाइ, पाँय परि पूछति, प्रेम मगन मृदु बानी
तेहि अवसर कोउभरत निकट तें, समाचार लै आयो
प्रभु-आगमन सुनत ‘तुलसी’ मनु, मीन मरत जल पायो

Gou Mata Bhi Dudh Pilati

गौ माता
गो माता भी दूध पिलाती, जैसे अपनी माता
दधि मक्खन अरु घृत भी पाते, कौन भूल यह पाता
कृषि कार्य के हेतु हमें यह, नित्य खाद भी देती
उपकारों को भूल रहे हम, पोषण गैया करती
भारत में गोपाल-कृष्ण ने, पूजा तुमको माता
इसी देश में तेरा माता, आज न कोई त्राता
कत्ल तुम्हारा होता रहता, रोक न कोई पाते
दुर्गति उनकी तो निश्चित ही, जो भी तुम्हें सताते
राम कृष्ण के देशवासियों, निज कर्तव्य निभाओ
बाल्यकाल से जिसने पोषा, उसके प्राण बचाओ

Dharti Mata Ye Samjhaye

निर्वेद
धरती माता यह समझाये
जिसको तू अपना है कहता, कुछ भी साथ न जाए
मुझको पाने को ही प्यारे तुम, आपस में क्यों लड़ते
खोया विवेक जो मिला प्रभु से मिल जुल क्यों नहीं रहते
जो महाराजा सम्राट समझते, पृथ्वीपति अपने को
हुए मृत्यु के ग्रास अन्त में, अहंकार था जिनको
खोद-खोद मुझको जिसने भी, डाला अपना डेरा
यही छोड़कर जाना सबको, मूर्ख कहे घर मेरा 

Vedon Ki Mata Gayatri

वेदमाता गायत्री
वेदों की माता गायत्री, सद्बुद्धि हमें कर दो प्रदान
महात्म्य अतुल महादेवी का, शास्त्र पुराण करते बखान
वरदायिनि देवी का विग्रह, ज्योतिर्मय रवि-रश्मि समान
ब्रह्मस्वरूपिणि, सर्वपूज्य, परमेश्वरी की महिमा महान
जो विद्यमान रवि-मण्डल में, उन आदि शक्ति को नमस्कार
अभिलाषा पूर्ण करें, जप लो, गायत्री-मंत्र महिमा अपार  

Om Jay Lakshmi Mata

महालक्ष्मी आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया तुम ही जग धाता
सद्गुण, सम्पति दाता, भव-भय की त्राता
पराशक्ति परमेश्वरि, सच्चिदानन्दमयी
गरुड़ारूढ़ महेश्वरि, अनुपम नित्य नयी
उज्ज्वल वसन, सुहासिनि, श्रीविग्रह सोहे
महाशक्ति सम्मोहिनि, त्रिभुवन मन मोहे
चन्द्र समान प्रकाशित, छाजे मणि-मुक्ता
रत्नमाल गल शोभित, स्वर्ण रजत युक्ता
श्रीसूक्त से पूजित, कमला महारानी
हरि-हर-ब्रह्मा वन्दित, स्नेहमयी दानी
क्षीर-समुद्र विहारिणि, शोभा रुचिकारी
पारब्रह्म श्रुतिरूपिणि, ॠषि-मुनि मनहारी
महालक्ष्मी आल्हादिनि, सरसिज-पुष्प निवास
शुभ, ऐश्वर्य-प्रदायिनि, कीरति वित्त विलास
निर्मल जल अभिसिंचित, दिग्गज के द्वारा
दीजै वर मनवांछित, बहे ‘कनक धारा’
आदि-अन्त रहित माँ, मुखमण्डल अभिराम
कृपा-कटाक्ष करो माँ, बारंबार प्रणाम