Ab Me Nachyo Bahut Gopal

मोह माया
अब मैं नाच्यौ बहुत गोपाल
काम क्रोध को पहिर चोलनो, कंठ विषय की माल
महा मोह के नूपुर बाजत, निन्दा शबद रसाल
भरम भर्यो मन-भयो पखावज, चलत कुसंगत चाल
तृष्णा नाद करत घट भीतर, नाना विधि दे ताल
माया को कटि फैंटा बाँध्यो, लोभ तिलक दियो भाल
कोटिक कला काछि दिखराई, जल थल सुधि नहीं काल
‘सूरदास’ की सबै अविद्या, दूरि करो नन्दलाल

Jag Me Jiwat Hi Ko Nato

मोह माया
जग में जीवत ही को नातो
मन बिछुरे तन छार होइगो, कोउ न बात पुछातो
मैं मेरो कबहूँ नहिं कीजै, कीजै पंच-सुहातो
विषयासक्त रहत निसि –वासर, सुख सियारो दुःख तातो
साँच झूँट करि माया जोरी, आपन रूखौ खातो
‘सूरदास’ कछु थिर नहिं रहई, जो आयो सो जातो

Jo Sukh Braj Me Ek Ghari

ब्रज का सुख
जो सुख ब्रज में एक घरी
सो सुख तीनि लोक में नाहीं, धनि यह घोष पुरी
अष्ट सिद्धि नव निधि कर जोरे, द्वारैं रहति खरी
सिव-सनकादि-सुकादि-अगोचर, ते अवतरे हरी
धन्य धन्य बड़ भागिनि जसुमति, निगमनि सही परी
ऐसे ‘सूरदास’ के प्रभु को, लीन्हौ अंक भरी

Baso Mere Nenan Me Yah Jori

राधा कृष्ण माधुर्य
बसौ मेरे नैनन में यह जोरी
सुन्दर श्याम कमल – दल – लोचन, सँग वृषभानु किशोरी
मोर-मुकुट मकराकृति कुण्डल, पीताम्बर झकझोरी
‘सूरदास’ प्रभु तुम्हरे दरस को, कहा बरनौं मति थोरी

Braj Me Hari Hori Machai

होली
ब्रज में होरी मचाई
इत ते आई कुँवरि राधिका, उतते कुँवर कन्हाई
गोपिन लाज त्यागि रंग खेलत, शोभा बरनि न जाई, नंद-घर बजत बधाई
बाजत ताल मृदंग बाँसुरी, बीना डफ शहनाई
उड़त अबीर, गुलाल, कुंकुमा, रह्यो चहुँ दिसि छाई, मानो मघवा झड़ी लगाई
भरि-भरि रंग कनक पिचकारी, सन्मुख सबै चलाई
छिरकत रंग अंग सब भीजै, झुक झुक चाचर गाई, अति उमंग उर छाई
राधा सेन दई सखियन को, झुंड झुंड घिर आई
लपट लपट गई श्याम सुंदर सौं, हाथ पकर ले जाई, लालजी को नाच नचाई
उत्सुक सबहीं खेलन आई, मरजादा बिसराई
‘सूरदास’ प्रभु छैल छबीले, गोपिन अधिक रिझाई, प्रीति न रही समाई

Baso Mere Nainan Me Nandlal

मोहिनी मूर्ति
बसो मोरे नैनन में नंदलाल
मोहनी मूरति, साँवरी सूरति, नैणा बने बिसाल
अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती माल
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल
‘मीराँ’ प्रभु संतन सुखदाई, भगत-बछल गोपाल

Braj Me Aaj Sakhi Dekhyo Ri Tona

श्याम का जादू
ब्रज में आज सखी देख्यो री टोना
ले मटकी सिर चली गुजरिया, आगे मिले बाबा नंद का छोना
दधि को नाम बिसरि गयो प्यारी, ले लेहुरी कोउ स्याम सलोना
वृन्दावन की कुंज गलिन में, आँख लगाय गयो मन-मोहना
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, सुन्दर श्याम सुधर रस लोना

Ya Braj Me Kachu Dekho Ri Tona

मुग्धा
या वृज में कछु देखोरी टोना
ले मटुकी गिर चली गुजरिया, आय मिले बाबा नंद को छोना
दधि की पांग बिसरि गई प्यारी, लीजो रीं कोई श्याम सलौना
बृन्दावन की कुंज गलिन में, आँख लगायो री मन-मोहना
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, सुन्दर श्याम सुघर रस लोना

Brajraj Aaj Pyare Meri Gali Me Aana

श्याम का सौन्दर्य
ब्रजराज आज प्यारे मेरी गली में आना
तेरी छबि मनोहर मुझको झलक दिखाना
सिर मोर मुकुट राजे, बनमाल उर बिराजे
नूपुर चरण में बाजे, कर में कड़ा सुहाना
कुंडल श्रवण में सोहे, बंसी अधर धरी हो
तन पीत वसन शोभे, कटि मेखला सजाना
विनती यही है प्यारे, सुन नंद के दुलारे
‘ब्रह्मानंद’ आके तुमको, मन की तपन बुझाना

Kuch Bhi Na Sath Me Jayega

नाम-जप
कुछ भी न साथ में जायेगा, अंतिम क्षण है अब दूर नहीं
ऐसे ही जीवन बीत गया, बस तेरी मेरी करके ही
शायद कुछ दिन हो अभी शेष, प्रभु क्षमा करो जो भूल हुई
जप सकूँ तुम्हारा नाम प्रभो, जो बीत गई सो बीत गई
मैं पड़ा तुम्हारे चरणों में, कहलाते तुम करुणा-सागर
हो कृपा तुम्हारा ध्यान धरूँ, हे भवभयहारी नटनागर