Ab Jago Mohan Pyare

प्रभाती
अब जागो मोहन प्यारे
मात जसोदा दूध भात लिये, बैठी प्रात पुकारे
उठो मेरे मोहन आ मेरे श्याम, माखन मिसरी खारे
वन विचरन को गौएँ ठाड़ीं, ग्वाल बाल मिल सारे
तुम रे बिन एक पग नहिं चाले, राह कटत सब हारे
ना तुम सोये ना मैं जगाऊँ, लोग भरम भये प्यारे
दासी ‘मीराँ’ झुक झुक देखत, श्याम सूरति मतवारे

Sakhi Mohan Sang Mouj Karen

फागुन का रंग
सखि, मोहन सँग मौज करें फागुन में
मोहन को घरवाली बना के, गीत सभी मिल गाएँ री, फागुन में
पकड़ श्याम को गलियन डोलें, ताली दे दे नाच नचाएँ
मस्ती को कोई न पार आज, फागुन में
हम रसिया तुम मोहन गोरी, कैसी सुन्दर बनी रे जोरी
जोरी को नाच नचाओ रे, फागुन में
करे आज मनमानी तुमसे, कुछ न कहोगे फिर भी हमसे
वरना तो होगी, बरजोरी फागुन में
करे आज मनमानी तुमसे, कुछ न कहोगे फिर भी हमसे
वरना तो होगी, बरजोरी फागुन में

Main To Mohan Rup Lubhani

रूप लुभानी
मैं तो मोहन रूप लुभानी
सुंदर वदन कमल-दल लोचन, चितवन की मुसकानी
जमना के नीर तीरे धेनु चरावै, मुरली मधुर सुहानी
तन मन धन गिरिधर पर वारूँ, ‘मीराँ’ पग लपटानी

Sakhi Sapane Mohan Aaye

ब्रज की स्मृति
सखि, सपने में मनमोहन आये
बड़े दुखी है मथुरा में वे, कोई तो समझाये
टप टप आँसू गिरें नयन से, घूम रहे उपवन में
नहीं सँभाल पाते अपने को, व्याकुलता है मन में
कहते प्राणेश्वरी राधिके, निश दिन रहूँ उदास
लोग भले ही कहें यहाँ सुख, झूठ-मूठ विश्वास
तेरे बिना एक पल भी तो, कहाँ चैन है प्यारी
टूट गया राधा का सपना, प्रियतम कातर भारी  

Khelat Fag Pran Dhan Mohan

होली का रंग
खेलन फाग प्रानधन मोहन, मेरे द्वारे आयो रे
नटवर रूप देखि प्रीतम को, मेरो मन उमगायो रे
संग सखा सब छैल-छबीले, लाल गुलाल उड़ायो रे
सोहत हाथ कनक-पिचकारी, केसर रंग रँगायो रे
ओसर पाइ लई मैं मुरली, काजर नयन लगायो रे
सिर चुंदरी ओढ़ाय लाल को, लाली भेष बनायो रे
घेरि सखिन ने फिर मोहन को, मोहिनी रूप सजायो रे
प्यारी जी मुसकाय रीझि पुनि, आपुहि उन्हें छुड़ायो रे

Pyare Mohan Bhatak Na Jau

श्याम से लगन
प्यारे मोहन भटक न जाऊँ
तुम ही हो सर्वस्व श्याम, मैं तुम में ही रम जाऊँ
जब तक जिऊँ तुम्हारे ही हरि! अद्भुत गुण मैं गाऊँ
गा-गा गुण गौरव तब मन में, सदा सदा सरसाऊँ
भूल भरा हूँ नित्यनाथ! मैं तुमसे यही मनाऊँ
सदा प्रेरणा करना ऐसी, तुम्हें न कभी भुलाऊँ
तुम्हने दी है लगन नाथ! तो यह मन कहाँ लगाऊँ
कण कण में तुमको निहार, बस तुम पर प्राण लुटाऊँ

Aavat Mohan Dhenu Charay

गो-चारण
आवत मोहन धेनु चराय
मोर-मुकुट सिर, उर वनमाला, हाथ लकुटि, गो-रज लपटाय
कटि कछनी, किंकिन-धुनि बाजत, चरन चलत नूपुर-रव लाय
ग्वाल-मंडली मध्य स्यामघन, पीतवसन दामिनिहि लजाय
गोप सखा आवत गुण गावत, मध्य स्याम हलधर छबि छाय
सूरदास प्रभु असुर सँहारे, ब्रज आवत मन हरष बढ़ाय

Darshan Ki Pyasi Mohan

दर्शन की प्यास
दर्शन की प्यासी मोहन! आई शरण तुम्हारी
रस प्रेम का लगा के, हमको है क्यों बिसारी
सूरत तेरी कन्हाई, नयनों में है समाई
हमसे सहा न जाये, तेरा वियोग भारी
घर बार मोह माया, सब त्याग हमहैं आर्इं
चन्दा सा मुख दिखा दो, विनती है यह हमारी
बंसी की धुन सुनादो, फिर प्रेम-रस पिला दो
‘ब्रह्मानंद’ हृदय हमारे, छाई छबि तुम्हारी

Kahan Lage Mohan Maiya Maiya

कहन-लागे-मोहन मैया मैया
नंद महर सौ बाबा-बाबा, अरु हलधर सौं भैया
ऊँचे चढ़ि चढ़ि कहति जसोदा, लै लै नाम कन्हैया
दूर खेलन जिनि जाहु लला रे, मारेगी कोउ गैया
गोपी-ग्वाल करत कौतूहल, घर घर बजति बधैया
‘सूरदास’ प्रभु तुम्हे दरस कौ, चरननि की बलि जैया

Aab Jago Mohan Pyare

प्रभाती
अब जागो मोहन प्यारे, तुम जागो नन्द दुलारे
हुआ प्रभात कभी से लाला, धूप घरों पर छाई
गोपीजन आतुरतापूर्वक, तुम्हें देखने आर्इं
ग्वाल-बाल सब खड़े द्वार पर, कान्हा ली अँगड़ाई
गोपीजन सब मुग्ध हो रहीं, निरखें लाल कन्हाई
जसुमति मैया उठा लाल को, छाती से लिपटाये
चन्द्रवदन को धुला तभी, माँ मक्खन उसे खिलाये