Jagat Main Radha Nam Amol

श्री राधा स्मरण
जगत में राधा नाम अमोल
व्यर्थ न करो बकवाद बावरे, राधा राधा बोल
राधा नाम सरस अति सुन्दर, हीरा सम अनमोल
जातें सुखद वस्तु नहिं जग में, भक्तनि लीयो तोल
राधा कच कारे घुँघराले, बाँके लोचन लोल
हिय मनहर कटि छीन उदर बर, रूप अनूप सुडोल

Bhajan Ko Namahi Nam Bhayo

भजन महिमा
भजन को नामहि नाम भयो
जासों द्रवहि न प्राननाथ, वह कैसे भजन भयो
कर माला, मुख नाम, पै न मन में कोई भाव रह्यो
केवल भयो प्रदरसन, लोगन हूँ ने भगत कह्यो
पायो मानुष जन्म, वृथा ऐसे ही समय गयो
मन में साँची लगन होय सो, साँचो भजन कह्यो
बिरह व्यथा में बीतहिं वासर, रैन न चैन लह्यो
असन वसन हूँ भारी लागें, तो कछु भजन भयो

Re Man Krishna Nam Jap Le

श्री कृष्ण स्मरण
रे मन कृष्ण नाम जप ले
भटक रहा क्यों इधर उधर तू, कान्ह शरण गह ले
जनम मरण का चक्कर इससे, क्यों न मुक्त हो जाये
यह संसार स्वप्न के जैसा, फिर भी क्यों भरमाये
जिनको तू अपना है कहता, कोई भी नहीं तेरा
मनमोहन को हृदय बिठाले, चला चली जग फेरा

Nam Liya Prabhu Ka Jisane

सदुपदेश
नाम लिया प्रभु का जिसने चाहे साधन और किया न किया
जड़ चेतन जग में भी जितने, घट में सम इनको जान सदा
परमारथ का नित कार्य किया, चाहे दान किसी को दिया न दिया
जिसके घर में हरि चर्चा हो, दिन रात छोड़ दुनियादारी
सत्संग कथामृत पान किया, चाहे तीर्थ का नीर पिया न पिया
गुरु के उपदेश व सत्सँग को, श्रद्धापूर्वक जो ग्रहण करे
‘ब्रह्मानंद’ स्वरूप को जान लिया, चाहे साधन योग किया न किया

Kali Nam Kam Taru Ram Ko

राम स्मरण
कलि नाम कामतरु राम को
दलनिहार दारिद दुकाल दुख, दोष घोर धन धाम को
नाम लेत दाहिनों होत मन वाम विधाता वाम को
कहत मुनीस महेस महातम, उलटे सूधे नाम को
भलो लोक – परलोक तासु जाके बल ललित – ललाम को
‘तुलसी’ जग जानियत नामते, सोच न कूच मुकाम को

Are Man Jap Le Prabhu Ka Nam

नाम स्मरण
अरे मन जप ले प्रभु का नाम
पाँच तत्व का बना पींजरा, मढ़ा उसी पर चाम
आज नहीं कल छूट जायगा, भज ले करुणाधाम
द्रुपद-सुता ने उन्हें पुकारा, वसन रूप भये श्याम
श्रद्धा-भाव रहे मन में नित, जपो प्रभु का नाम
अजामील ने पुत्र-भाव से, नारायण का लिया नाम
सुलभ हो गई सद्गति उसको, पहुँचा उन के धाम
आर्तजनों के वे हितकारी, भज मन आठों याम
सब सुकृत का सार यही, भज राधा-कृष्ण ललाम  

Ram Nam Matu Pita Swami Samarath Hitu

राम नाम आश्रय
राम नाम मातु-पिता, स्वामि समरथ, हितू
आस रामनाथ की , भरोसो राम नाम को
प्रेम राम नाम ही सों, नेम राम नाम ही को
जानौ, राम नाम मर्म, अन्य नहीं काम को
स्वारथ सकल परमारथ को राम नाम
राम नाम हीन ‘तुलसी’ एकमात्र नाम को
राम की शपथ सरबस मेरे राम नाम
कामधेनु-कल्पतरु, मोसे दीन हीन को

Jisne Nit Hari Ka Nam Liya

नाम महिमा
जिसने नित हरि का नाम लिया उसने अपना कल्याण किया
जिसने पशु पक्षी प्राणिमात्र का पालन पोषण नित्य किया
चाहे दान किसी को दिया न दिया, भवनिधि को उसने पार किया
सत्संग कथामृत पान किया, आजीवन सबका भला किया
चाहे पूजा पाठ किया न किया पर भक्ति-भाव को प्राप्त किया
गुरु का उपदेश हृदय धर के, आचरण शास्त्र अनुसार किया
चाहे व्रत उपवास किया न किया, मानव जीवन को सफल किया

Kyon Tu Govind Nam Bisaro

नाम स्मरण
क्यौं तू गोविंद नाम बिसारौ
अजहूँ चेति, भजन करि हरि कौ, काल फिरत सिर ऊपर भारौ
धन-सुत दारा काम न आवै, जिनहिं लागि आपुनपौ हारौ
‘सूरदास’ भगवंत-भजन बिनु, चल्यो पछिताइ नयन जल ढारौ

Nam Japan Kyon Chod Diya

नाम-जप
नाम जपन क्यों छोड़ दिया
क्रोध न छोड़ा, झूँठ न छोड़ा, सत्य वचन क्यों छोड़ दिया
झूठे जग में जी ललचा कर, असल देश क्यों छोड़ दिया
कौड़ी को तो खूब सम्भाला, लाल-रतन क्यों छोड़ दिया
जिहि सुमिरन ते अति सुख पावे, सो सुमिरन क्यों छोड़ दिया
रे नर इक भगवान भरोसे, तन-मन-धन क्यों न छोड़ दिया