Raghuvar Tumko Meri Laj

विरूद
रघुवर तुमको मेरी लाज
सदा सदा मैं सरन तिहारी, तुम बड़े गरीब-निवाज
पतित उधारन विरूद तिहारो, श्रवनन सुनी आवाज
हौं तो पतित पुरातन कहिये, पार उतारो जहाज
अघ खंडन, दुख-भंजन जन के, यही तिहारो काज,
‘तुलसिदास’ पर किरपा करिये, भक्ति दान देहु आज

Guru Charno Me Shish Nava Ke Raghuvar

धनुष-भंग (राजस्थानी)
गुरुचरणों में सीस नवा के, रघुवर धनुष उठायोजी
बाण चढ़ावत कोई न देख्यो, झटपट तोड़ गिरायोजी
तीन लोक अरु भवन चतुर्दश, सबद सुणत थर्रायोजी
धरणी डगमग डोलन लागी, शेष नाग चकरायोजी
शूरवीर सब धुजण लाग्या, सबको गरब मिटायो जी 

Aarti Kije Shri Raghuvar Ki

राम आरती
आरती कीजै श्री रघुवर की, मर्यादा पुरुषोत्तम राम की
दशरथ-सुत कौसल्या-नंदन, चंद्र-वदन की शोभा भारी
सुर-मुनि-रक्षक, दैत्य-निकंदन, मर्यादित जीवन असुरारी
स्वर्ण-मुकुट मकराकृत कुण्डल, हीरक-हार छटा उजियारी
भुजा विशाल आभरण अनुपम, भाल तिलक की शोभा न्यारी
सूर्य चन्द्र कोटिक छबि लाजै, स्वर्णिम पीताम्बर कटि धारी
धीर वीर प्रभु जानकीवल्लभ, शिव, ब्रह्मा, ऋषि मुनि बलिहारी
सच्चिदानन्द भगवान् राम हैं, भव-भंजन, जन जन हितकारी