Rajan Ram Lakhan Ko Dije

विश्वामित्र की याचना
राजन! राम-लखन को दीजै
जस रावरो, लाभ बालक को, मुनि सनाथ सब कीजै
डरपत हौं, साँचे सनेह बस, सुत प्रभाव बिनु जाने
पूछो नाम देव अरु कुलगुरु, तुम भी परम सयाने
रिपु दल दलि, मख राखि कुसल अति, अल्प दिननि घर ऐंहैं
‘तुलसिदास’ रघुवंस तिलक की, कविकुल कीरति गेहैं

Ek Ram Bharosa Hi Kali Main

राम भरोसा
एक राम भरोसा ही कलि में
वर्णाश्रम धर्म न दिखे कहीं, सुख ही छाया सबके मन में
दृढ़ इच्छा विषय भोग की ने, कर्म, भक्ति, ज्ञान को नष्ट किया
वचनों में ही वैराग्य बचा और वेष ने सबको लूट लिया
सच्चे मन से जो जीवन में, रामाश्रित कोई हो पाये
भगवान अनुग्रह से निश्चय, भवसागर पार उतर जाये 

Ram Kam Ripu Chap Chadhayo

धनुष भंग
राम कामरिपु चाप चढ़ायो
मुनिहि पुलक, आनंद नगर, नभ सुरनि निसान बजायो
जेहि पिनाक बिनु नाक किये, नृप सबहि विषाद बढ़ायो
सोई प्रभु कर परसत टूटयो, मनु शिवशंभु पढ़ायो
पहिराई जय माल जानकी, जुबतिन्ह मंगल गायो
‘तुलसी’ सुमन बरसि सुर हरषे, सुजसु तिहूँ पुर छायो

Badi Maa Kaise Jiun Bin Ram

भरत का प्रेम
बड़ी माँ! जीऊँ कैसे बिन राम
सिया, राम, लछमन तो वन में, पिता गये सुरधाम
कुटिल बुद्धि माँ कैकेयी की, बसिये न ऐसे ग्राम
भोर भये हम भी वन जैहें, अवध नहीं कछु काम
अद्भुत प्रेम भरत का, प्रस्थित गये मिलन को राम 

Ram Nam Matu Pita Swami Samarath Hitu

राम नाम आश्रय
राम नाम मातु-पिता, स्वामि समरथ, हितू
आस रामनाथ की , भरोसो राम नाम को
प्रेम राम नाम ही सों, नेम राम नाम ही को
जानौ, राम नाम मर्म, अन्य नहीं काम को
स्वारथ सकल परमारथ को राम नाम
राम नाम हीन ‘तुलसी’ एकमात्र नाम को
राम की शपथ सरबस मेरे राम नाम
कामधेनु-कल्पतरु, मोसे दीन हीन को

Bhagwan Aapke Ram Rup

श्री राम स्तुति
भगवान् आपके राम रूप को, करता हूँ सादर प्रणाम
प्रभु शुद्ध, शान्त, संतों के प्राण, सीतापति मर्यादा नीति धाम
अखिलेश्वर हो, आनँदकंद, प्रभु अद्धितीय हितकारी हो
हे लक्ष्मी पति, देवादि देव, सच्चिदानंद भयहारी हो
गुणग्राम, अपका जपूँ नाम, सृष्टि के कर्ता धर्ता हो
हे अविनाशी, हे विश्वात्मा, पालनहारी, संहर्ता हो
हे रावणारि हे विश्वरूप, असुरों का वध भी करते हो
हे पुरुषोत्तम सौन्दर्य धाम, भक्तों की पीड़ा हरते हो
ऋषि मुनि एवं जो देववृन्द, स्तवन आपका करते हैं
करुणानिधि मेरे कष्ट हरो, दुखियों के दुख जो हरते हैं 

Shri Ram Chandra Krapalu Bhaj Man

श्री राम स्तुति
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्
नवकंज-लोचन कंज-मुख कर-कंज पद-कंजारुणम्
कंदर्प अगणित अमित छबि, नव नील-नीरद-सुंदररम
पट-पीत मानहुँ तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक-सुतावरम्
भजु दीन-बंधु दिनेश दानव, दैत्य-वंश निकंदनम्
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथ-नंदनम्
सिर मुकुट, कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्
आजानु भुज, शर-चाप-धरि, संग्राम-जित-खरदूषणम्
इति वदति ‘तुलसीदास’ शंकर-शेष-मुनि-मन रंजनम्
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल गंजनम्

Rasna Kyon Na Ram Ras Piti

राम रसपान
रसना क्यों न राम रस पीती
षट-रस भोजन पान करेगी, फिर रीती की रीती
अजहूँ छोड़ कुबान आपनी, जो बीती सो बीती
वा दिन की तू सुधि बिसराई, जा दिन बात कहीती
जब यमराज द्वार आ अड़िहैं, खुलिहै तब करतूती
‘रूपकुँवरि’ मन मान सिखावन, भगवत् सन कर प्रीती 

Ve Hain Rohini Sut Ram

श्री बलरामजी
वे हैं रोहिनी सुत राम
गौर अंग सुरंग लोचन, प्रलय जिन के ताम
एक कुंडल स्रवन धारी, द्यौत दरसी ग्राम
नील अंबर अंग धारी, स्याम पूरन काम
ताल बल इन बच्छ मार्यौ, ब्रह्म पूरन काम
‘सूर’ प्रभु आकरषि, तातैं संकरषन है नाम

Ram Ka Gungan Kariye

श्री राम महिमा
राम का गुणगान करिए
राम के गुण का हो चिंतन, राम-गुण का स्मरण कीर्तन,
मनुजता को हृदय में धर, आप जीवन सफल करिए,
मनन करिए, ध्यान धरिए, राम का….
सगुण ब्रह्म स्वरूप सुंदर, सृजन, पालन चरित सुखकर,
परम-आत्मा, जगत्-आत्मा, राम को प्रणाम करिये,
मनन करिए ध्यान धरिए, राम का….