Ram Nam Matu Pita Swami Samarath Hitu

राम नाम आश्रय
राम नाम मातु-पिता, स्वामि समरथ, हितू
आस रामनाथ की , भरोसो राम नाम को
प्रेम राम नाम ही सों, नेम राम नाम ही को
जानौ, राम नाम मर्म, अन्य नहीं काम को
स्वारथ सकल परमारथ को राम नाम
राम नाम हीन ‘तुलसी’ एकमात्र नाम को
राम की शपथ सरबस मेरे राम नाम
कामधेनु-कल्पतरु, मोसे दीन हीन को

Bhagwan Aapke Ram Rup

श्री राम स्तुति
भगवान् आपके राम रूप को, करता हूँ सादर प्रणाम
प्रभु शुद्ध, शान्त, संतों के प्राण, सीतापति मर्यादा नीति धाम
अखिलेश्वर हो, आनँदकंद, प्रभु अद्धितीय हितकारी हो
हे लक्ष्मी पति, देवादि देव, सच्चिदानंद भयहारी हो
गुणग्राम, अपका जपूँ नाम, सृष्टि के कर्ता धर्ता हो
हे अविनाशी, हे विश्वात्मा, पालनहारी, संहर्ता हो
हे रावणारि हे विश्वरूप, असुरों का वध भी करते हो
हे पुरुषोत्तम सौन्दर्य धाम, भक्तों की पीड़ा हरते हो
ऋषि मुनि एवं जो देववृन्द, स्तवन आपका करते हैं
करुणानिधि मेरे कष्ट हरो, दुखियों के दुख जो हरते हैं 

Shri Ram Chandra Krapalu Bhaj Man

श्री राम स्तुति
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्
नवकंज-लोचन कंज-मुख कर-कंज पद-कंजारुणम्
कंदर्प अगणित अमित छबि, नव नील-नीरद-सुंदररम
पट-पीत मानहुँ तड़ित रूचि शुचि नौमि जनक-सुतावरम्
भजु दीन-बंधु दिनेश दानव, दैत्य-वंश निकंदनम्
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथ-नंदनम्
सिर मुकुट, कुण्डल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्
आजानु भुज, शर-चाप-धरि, संग्राम-जित-खरदूषणम्
इति वदति ‘तुलसीदास’ शंकर-शेष-मुनि-मन रंजनम्
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कामादि खल-दल गंजनम्

Rasna Kyon Na Ram Ras Piti

राम रसपान
रसना क्यों न राम रस पीती
षट-रस भोजन पान करेगी, फिर रीती की रीती
अजहूँ छोड़ कुबान आपनी, जो बीती सो बीती
वा दिन की तू सुधि बिसराई, जा दिन बात कहीती
जब यमराज द्वार आ अड़िहैं, खुलिहै तब करतूती
‘रूपकुँवरि’ मन मान सिखावन, भगवत् सन कर प्रीती 

Ve Hain Rohini Sut Ram

श्री बलरामजी
वे हैं रोहिनी सुत राम
गौर अंग सुरंग लोचन, प्रलय जिन के ताम
एक कुंडल स्रवन धारी, द्यौत दरसी ग्राम
नील अंबर अंग धारी, स्याम पूरन काम
ताल बल इन बच्छ मार्यौ, ब्रह्म पूरन काम
‘सूर’ प्रभु आकरषि, तातैं संकरषन है नाम

Ram Ka Gungan Kariye

श्री राम महिमा
राम का गुणगान करिए
राम के गुण का हो चिंतन, राम-गुण का स्मरण कीर्तन,
मनुजता को हृदय में धर, आप जीवन सफल करिए,
मनन करिए, ध्यान धरिए, राम का….
सगुण ब्रह्म स्वरूप सुंदर, सृजन, पालन चरित सुखकर,
परम-आत्मा, जगत्-आत्मा, राम को प्रणाम करिये,
मनन करिए ध्यान धरिए, राम का…. 

Hamare Nirdhan Ke Dhan Ram

प्रबोधन
हमारे निर्धन के धन राम
चोर न लेत घटत नहिं कबहूँ, आवत गाढ़ैं काम
जल नहिं बूड़त, अगिनि न दाहत, है ऐसो हरि नाम
वैकुण्ठनाथ सकल सुख दाता, ‘सूरदास’ सुख-धाम

Ram Krishna Kahiye Uthi Bhor

राम कृष्ण चरित्र
राम कृष्ण कहिये उठि भोर
श्री राम तो धनुष धरे हैं, श्री कृष्ण हैं माखन चोर
उनके छत्र चँवर सिंहासन, भरत, शत्रुघन, लक्ष्मण जोर
इनके लकुट मुकुट पीतांबर, नित गैयन सँग नंद-किशोर
उन सागर में सिला तराई, इन राख्यो गिरि नख की कोर
‘नंददास’ प्रभु सब तजि भजिए, जैसे निरखत चंद चकोर

Payo Ji Mhe To Ram Ratan Dhan Payo

हरि भक्ति
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो
वास्तु अमोलक दी म्हाने सतगुरु, किरपा कर अपनायो
जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो
खरच न हौवे, चोर न लेवै, दिन दिन बढ़त सवायो
सत की नाव केवटिया सतगुरु, भव-सागर तर आयो
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, हरख हरख जस गायो

Ram Nam Ke Do Akshar

राम नाम महिमा
राम नाम के दो अक्षर, पापों का, सुनिश्चित शमन करें
विश्वास और श्रद्धापूर्वक, जपले भवनिधि से पार करें
हो कामकाज चलते बैठे, बस राम नाम उच्चारण हो
भोगे न यातना यम की वह और परम शान्तिमय जीवन हो
दो अक्षर हैं ये मन्त्रराज, जो जपे कार्य सब सफल करे
देवता लोग, सब साधु संत, श्री राम ही का गुणगान करें