Bethi Sagun Manavati Mata

माँ की आतुरता
बैठी सगुन मनावति माता
कब ऐहैं मेरे बाल कुसल घर, कहहु, काग ! फुरि बाता
दूध-भात की दौनी दैहौं, सोने चोंच मढ़ैहौं
जब सिय-सहित विलोकि नयन भरि, राम-लषन उर लैहौं
अवधि समीप जानि जननी जिय अति आतुर अकुलानी
गनक बोलाइ, पाँय परि पूछति, प्रेम मगन मृदु बानी
तेहि अवसर कोउभरत निकट तें, समाचार लै आयो
प्रभु-आगमन सुनत ‘तुलसी’ मनु, मीन मरत जल पायो

Shabri Sagun Manawat Hai

शबरी की प्रीति
शबरी सगुन मनावत है, मेरे घर आवेंगे राम
बीज बीन फल लाई शबरी, दोना न्यारे न्यारे
आरति सजा प्रार्थना कीन्ही, छिन मंदिर छिन द्वारे
ऋषि के वचन सुनत मनमाहीं, हर्ष न ह्रदय समाई
घर को काम सकल तज दीन्हों, गुन रघुपति के गाई
अनुज सहित प्रभु दरसन दीन्हों, परी चरन लपटाई
‘तुलसीदास’ प्रभु अधम उधारन, दीन्ह जानि अपनाई