Shri Krishna Chandra Mathura Ko Gaye

विरह व्यथा
श्री कृष्णचन्द्र मथुरा को गये, गोकुल को आयबो छोड़ दियो
तब से ब्रज की बालाओं ने, पनघट को जायबो छोड़ दियो
सब लता पता भी सूख गये, कालिंदी किनारो छोड़ दियो
वहाँ मेवा भोग लगावत हैं, माखन को खायबो छोड़ दियो
ये बीन पखावज धरी रहैं, मुरली को बजायबो छोड़ दियो
वहाँ कुब्जा संग विहार करें, राधा-गुन गायबो छोड़ दियो
वे कंस को मार भये राजा, गउअन को चरायबो छोड़ दियो
‘सूर’ श्याम प्रभु निठुर भये, हँसिबो इठलाइबो छोड़ दियो

Jo Param Shant Shri Lakshmikant

श्री नारायण स्तुति
जो परम शांत श्री लक्ष्मी-कांत, जो शेष-नाग पर शयन करें
वे पद्मनाभ देवाधिदेव, वे जन्म मरण का कष्ट हरें
है नील मेघ सम श्याम वर्ण, पीताम्बर जिनके कटि राजे
हे अंग सभी जिनके सुन्दर, शोभा पे कोटि मदन लाजे
ब्रह्मादि देव अरू योगी जन, जिनका हृदय में धरे ध्यान
वे कमल नयन सच्चिदानन्द, सब वेद-उपनिषद करें गान
वे शंख चक्र अरु, गदा पद्म, धारण करते कर कमलों में
मैं सादर उन्हें प्रणाम करूँ, जो नारायण जड़ चेतन में

Shri Mahalakshmi Jag Janani Ka

श्रीमहालक्ष्मी स्तवन
श्री महालक्ष्मी जगजननी का, हम श्रद्धापूर्वक करें ध्यान
जिनका है वर्ण स्वर्ण जैसा, उनकी महिमा का करें गान
सद्भाव, अतिथि की सेवा हो, सत्कर्म जहाँ नित होता हो
देवार्चन-प्रेम भाव मन का, आवास वहीं हो माता का
माँ को अति प्रिय है शील सत्य, सत्संग कीर्तन जहाँ नित्य
जहाँ प्राणि-मात्र प्रति प्रेम भाव, वहाँ धन का नहीं होगा अभाव
जहाँ भोग, क्रूरता और क्लेश, दारिद्य वहाँ करता प्रवेश
व्यवहार कपट अरु वचन झूठ, महालक्ष्मी जाती वहाँ रूठ
सबके प्रति करुणा हो मन में, आस्तिकता श्रद्धा हो प्रभु में
करुणामयी मैया कृपा करो, कालुष्य हृदय का आप हरो

Shri Radhe Rani De Daro Ni Bansuri Mori

बंसी
राधे रानी दे डारो नी बाँसुरी मोरी
जो बंशी में मोरे प्राण बसत है, सो बंशी गई चोरी
काहे से गाऊँ प्यारी काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गैया घेरी
मुखड़ा से गाओ कान्हा हाथ से बजाओ, लकुटी से लाओ गैया घेरी
हा हा करत तेरी पइयाँ पड़त हूँ, तरस खाओ री प्यारी मोरी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, बहुत खिझाई राधा गोरी

Jhula Jhule Shri Giridhari

झूला
झूला झूले श्री गिरधारी
मणिमय जटित हिंडोला बैठे, संग में प्राण पियारी
वाम भाग सोहत श्री राधा, पहन लहरिया सारी
शीतल मन्द सुगन्धित वायु, श्याम घटा मनहारी
कोकिल मोर पपीहा बोले, मधुर गान सुखकारी
फूल-हार, फूलों का गजरा, युगल रूप छबि न्यारी

Shri Radha Nam Madhur Anmol

राधा नाम अनमोल
श्री राधा नाम मधुर अनमोल
नाम सुखद राधा प्यारी को, मुँह में मिश्री घोल
सुख सरिता श्री राधा स्वामिनि, दर्शन कर सुख पाऊँ
अंग अंग अनुराग श्याम का, चरणों में सिर नाऊँ
दो अक्षर राधा रानी के, हिय में इन्हें बसाऊँ
सोच विचार और सब त्यागूँ, राधा के गुण गाऊँ

Swami Sab Sansar Ka Ji Sancha Shri Bhagwan

संसार के स्वामी
स्वामी सब संसार का जी, साँचा श्री भगवान
दान में महिमा थाँरी देखी, हुई हरि मैं हैरान
दो मुठ्ठी चावल की फाँकी, दे दिया विभव महान
भारत में अर्जुन के आगे, आप हुया रथवान
ना कोई मारे, ना कोई मरतो, यो कोरो अज्ञान
चेतन जीव तो अजर अमर है, गीताजी को ज्ञान
म्हारा पे प्रभु किरपा करजो, दासी अपणी जान
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण-कमल में ध्यान

Pragate Shri Vaaman Avtar

वामन अवतार
प्रगटे श्री वामन अवतार
निरख अदिति मुख करत प्रशंसा, जगजीवन आधार
तन श्याम पीत-पट राजत, शोभित है भुज चार
कुण्डल मुकुट कंठ कौस्तुभ-मणि, अरु भृगुरेखा सार
देखि वदन आनंदित सुर-मुनि, जय-जय निगम उचार
‘गोविंददास’ हरि वामन होके, ठाड़े बलि के द्वार  

Shri Radhe Pyari De Daro Ri Bansuri

बंसी की चोरी
श्री राधे प्यारी, दे डारो री बाँसुरी मोरी
काहे से गाऊँ राधे, काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गैया घेरि
मुखड़े से गाओ कान्हा, ताल बजावो, चुटकी से लाओ गैया घेरि
या बंशी में मेरो प्राण बसत है, सो ही गई अब चोरी
न तो सोने की, ना ही चाँदी की, हरे बाँस की पोरी
कब से ही ठाड़ो राधा अरज करूँ मैं, कैसी गति हुई मोरी
‘चन्द्रसखी’ भज बालकृष्ण छवि, चिरजीवो ये जोरी  

Van Te Aawat Shri Giridhari

वन से वापसी
वनतैं आवत श्रीगिरिधारी
सबहिं श्रवन दै सुनहु सहेली, बजी बाँसुरी प्यारी
धेनु खुरनि की धुरि उड़त नभ, कोलाहल अति भारी
गावत गीत ग्वाल सब मिलिकें, नाचत बीच बिहारी
मलिन मुखी हम निशि सम नारी, बिनु हरि सदा दुखारी
कृष्णचन्द्र ब्रजचन्द्र खिलें नभ, तब हम चन्द्र उजारी
मिटै ताप संताप तबहिं जब, दृष्टि परैं बनवारी
चलो चलें चित-चोर विलोकें, ठाढ़े कृष्ण मुरारी