Namo Namo Tulsi Maharani

तुलसी की महिमा
नमो नमो तुलसी महारानी, नमो नमो हरि की पटरानी
जाको दरस परस अघ नासे, महिमा वेद पुराण बखानी
साखा पत्र मंजरी कोमल, श्री पति चरण-कमल लपटानी
धन्य आप ऐसो व्रत कीन्हो, सालिगराम के शीश चढ़ानी
छप्पन भोग धरे हरि आगे, तुलसी बिन प्रभु एक न मानी
प्रेम प्रीत कर हरि वश कीन्हे, साँवरी सूरत ह्रदय समानी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, भक्ति दान दीजै महारानी

Tulsi Mira Sur Kabir

भक्त कवि
तुलसी मीरा सूर कबीर, एक तूणीर में चारों तीर
इन तीरों की चोट लगे तब रक्त नहीं, बहे प्रेम की नीर
एक तूणीर में चारो तीर, तुलसी मीरा सूर कबीर
तुलसीदास हैं राम पुजारी, मीरा के प्रभु गिरधारी
सूरदास सूरज सम चमके, सहज दयालु संत कबीर
एक तूणीर में चारो तीर, तुलसी मीरा सूर कबीर
रामचरित मानस तुलसी की, माया मोह का दूर करे
प्रेम सुधा मीरा बरसावे, पीकर सारा जगत् तरे
एक तूणीर में चारों तीर, तुलसी मीरा सूर कबीर
सूर लुटाये कृष्ण प्रेम को, हर लेते अज्ञान कबीर
भजन नित्य इनके जो गाये, नहीं सताये जग की पीर
एक तूणीर में चारो तीर, तुलसी मीरा सूर कबीर

Tulsi Mira Sur Kabir

भक्त कवि
तुलसी मीरा सूर कबीर
कण्ठहार जन जन के चारों, हर लेते तन मन की पीर
रामचरित के तुलसी गायक, कृष्ण भक्ति में सूर अधीर
मीराबाई कृष्ण विरहिणी, कबीर देते ज्ञान गँभीर
भक्ति, ज्ञान अरु कर्म समन्वय तुलसी की रामायण में
बालकृष्ण की लीलाओं का भाव सूर के गीतों में
गिरिधारी के दर्शन पाने मीरा के नयनों में नीर
नश्वर यह संसार बताये, माया का सब खेल कबीर
रामकृष्ण पद सुनें सुनायें, दूर करे तामस मन का
कर्म ज्ञान की गाथाओं से, हो उद्धार सभी जन का

Tulsi Maharani Ko Pranam

तुलसी महिमा
तुलसी महारानी को प्रणाम
पटरानी ये ही श्री हरि की, जो अद्वितीय लोकाभिराम
शालीग्राम के शीश चढ़े वे, हरि अर्चन इनसे ही हो
सुख शांति स्वास्थ्य भी दे हमको, जब श्रद्धा से जल सिंचन हो
जो भोग लगे नारायण को, तुलसी के बिना नहीं स्वीकारे
महिमा अपार तुलसीजी की, माँ भक्ति दान दो, पाप जरे

Vandaniya Tulsi Maharani

तुलसी अर्चना
वंदनीय तुलसी महारानी, अद्भुत महिमा शास्त्र बखानी
नित्य धाम गोलोक से आई, कल्पवृक्ष सम महिमा गाई
श्याम वर्ण शोभा सुखदाई, पृथ्वी मूल्यवान निधि पाई
श्री हरि सेवा पूजन हेतु, तुलसीजी का बाग लगाये
प्रेत पिशाच भूत भग जाये, यज्ञ, दान, व्रत का फल पाये
प्रभु पूजा नैवेद्य आदि में, तुलसी दल अनिवार्य धराये
तुलसी निकट करे जप स्तुति, क्लेश कष्ट सारे मिट जाये
विश्व पूजिता, विश्वपावनी, कृष्ण प्रिया कल्याण कारिणी
तुलसी-दल से हो हरि अर्चन, कलिमल नाश करे वरदायिनि

Jay Jay Jay Tulsi Maharani

तुलसी आरती
जय जय जय तुलसी महारानी, महिमा अमित पुराण बखानी
प्रादुर्भाव विष्णु के द्वारा, पूजनीय भक्तन मन मानी
तेरे श्री अंगो से प्रकटे, मंजरिया, पल्लव मन-भाये
शालिग्राम शिला का पूजन, तुमसे करे सदा सुख पाये
हरि पूजन में तुम्हें चढ़ाये, कलिमल-नाश करे पुण्यार्जन
गो का दान दिलाये जो फल, सुलभ कराये तेरा दर्शन
विश्वपूजिता, कृष्णभावनी! मंगल आरती करें तुम्हारी
अविचल भक्ति मिले श्री हरि की, वर दो विनती यही हमारी