Ankhiyan Krishna Milan Ki Pyasi

विरह व्यथा
अँखियाँ कृष्ण मिलन की प्यासी
आप तो जाय द्वारका छाये, लोग करत मेरी हाँसी
आम की दार कोयलिया बोलै, बोलत सबद उदासी
मेरे तो मन ऐसी आवै, करवत लेहौं कासी
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल की दासी

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