Anurag Mai Vardan Mai

भारत माता
अनुरागमयी वरदानमयी भारत जननी भारत माता!
मस्तक पर शोभित शतदल सा, यह हिमगिरि है शोभा पाता
नीलम-मोती की माला सा, गंगा-यमुना जल लहराता
वात्सल्यमयी तू स्नेहमयी, भारत जननी भारत माता
सूरज की सुनहरी किरणों से गूंथी लेकर के मालाएँ
सौंदर्यमयी श्रृंगारमयी, भारत जननी भारत माता
तेरे पग पूजन को आतीं, सागर लहरों की बालाएँ
तू तपोमयी तू सिद्धमयी, भारत जननी भारत माता

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