Brajraj Aaj Pyare Meri Gali Me Aana

श्याम का सौन्दर्य
ब्रजराज आज प्यारे मेरी गली में आना
तेरी छबि मनोहर मुझको झलक दिखाना
सिर मोर मुकुट राजे, बनमाल उर बिराजे
नूपुर चरण में बाजे, कर में कड़ा सुहाना
कुंडल श्रवण में सोहे, बंसी अधर धरी हो
तन पीत वसन शोभे, कटि मेखला सजाना
विनती यही है प्यारे, सुन नंद के दुलारे
‘ब्रह्मानंद’ आके तुमको, मन की तपन बुझाना

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