Jaago Bansi Ware Lalna

प्रभाती
जागो बंसीवारे ललना, जागो मोहन प्यारे
रजनी बीती भोर भयो है, घर घर खुले किवारे
गोपी दही मथत सुनियत है, कँगना के झनकारे
उठो लालजी भोर भयो है, सुर नर ठाड़े द्वारे
ग्वाल बाल सब करत कुलाहल, जय जय सबद उचारे
माखन रोटी करो कलेवा, गउवन के रखवारे
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, शरणागत कूँ तारे

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