Jag Janani Radhika Ko Pranam

श्री राधा माहात्म्य
जगजननी राधिका को प्रणाम
सच्चिदानन्द विग्रह जिनका, लीला रस की वे दिव्य धाम
जो परमतत्व श्रीकृष्ण उन्हीं की, परम शक्ति हैं श्रीराधा
वे शक्तिमान की आत्मा ही, हर लें भक्तों की भव बाधा
जो सकल कलाओं की प्रसविनि, सुन्दरता की वे प्रतिमा हैं
भगवान कृष्ण के मन को वे मोहित आल्हादित करती हैं
श्री राधारानी हैं प्रकाश तो भुवन भास्कर माधव हैं
ज्योत्सना रूप तो श्रीराधा, वे पूर्णचन्द्र मुरलीधर हैं
एक ही स्वरूप दोनों का है, महिमा अनन्त राधाजी की
श्रीकृष्ण कृपा जिस पर होए, अनूभूति मिले प्रियाजी की

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