Ladili Surang Palne Jhule

झूला
लाड़िली सुरंग पालने झूले
कीरति रानी सुलावै, गावै, हर्षित अति मन फूले
भाँति भाँति के लिये खिलौना, प्रमुदित गोद खिलावे
देखि देखि मुसकाति सलोनी द्वैदंतुलि दरसावे
शोभा की सागर श्री राधा, उमा रमा रति वारी
तिहि छन की शोभा कछु-न्यारी, विधि निज हाथ सँवारी 
यशोदा का सुखलाल को पलना मात पौढ़ाये
स्नान करा झँगुला रेशम का, पहना उसे झुलाये
आओरी निंदिया तुरत ही आओ, लोरी उसे सुनाये
कब ही नैन बंद कर लेवे, कब ही ओंठ फड़काये
सोचा अब तो लाल सो गयो, मैया चुप हो जाये
जगा कन्हैया इतने में तो, फिर से गीत सुनाये
जो न सुलभ सुख सुर मुनियों को, नन्दगेहनी पाये

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