Latak Latak Chalat Chaal

मोहन माधुरी
लटक-लटक चलत चाल, मोहन आवे रे
भावे मन अधर मुरली, मधुर सुर बजावे रे
श्रवण कुण्डल चपल चलन, मोर मुकुट चन्द्रकलन
मन्द हँसन चित्त हरन, मोहनि मुरति राजे रे
भृकुटि कुटिल लोल लोचन, अरुण अधर मधुर बैन
मंथर गति अरु चारु चितवन, भाल पर बिराजे रे
‘लखनदास’ श्याम रूप, नख शिख शोभा अनूप
रसिक रूप निरख वदन, कोटि मदन लाजे रे

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