Main Giridhar Ke Rang Rati

गिरिधर के रंग
मैं गिरिधर के रंग राती
पचरँग चोला पहर सखी मैं, झिरमिट रमवा जाती
झिरमिट में मोहि मोहन मिलिग्यो, आनँद मंगल गाती
कोई के पिया परदेस बसत हैं, लिख-लिख भेजें पाती
म्हारे पिया म्हारे हिय में बसत हैं, ना कहुँ आती जाती
प्रेम भट्ठी को मैं मद पीयो, छकी फिरूँ दिन राती
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि चरणाँ चित लाती

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