सदुपदेश
नाम लिया प्रभु का जिसने चाहे साधन और किया न किया
जड़ चेतन जग में भी जितने, घट में सम इनको जान सदा
परमारथ का नित कार्य किया, चाहे दान किसी को दिया न दिया
जिसके घर में हरि चर्चा हो, दिन रात छोड़ दुनियादारी
सत्संग कथामृत पान किया, चाहे तीर्थ का नीर पिया न पिया
गुरु के उपदेश व सत्सँग को, श्रद्धापूर्वक जो ग्रहण करे
‘ब्रह्मानंद’ स्वरूप को जान लिया, चाहे साधन योग किया न किया

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