Nand Nandan Bado Natkhati Hai

नटखट कन्हैया
नँदनंदन बड़ो नटखटी है
मैं दधिमाखन बेचन जाऊँ, पथ रोक ले मेरो धाय के
जो नहीं देऊँ मैं माखन तो,वो लूट ले आँख दिखाय के
जब भी घर से बाहर जाऊँ, चुपके से घर में आय के
तब ग्वाल-बाल को संग में ले, मटको फोड़े दधि खाय के
घर की भी सुधि नहीं लेने दे, वो वंशी तान सुनाय के
मुझे रात में सोने दे भी नहिं, सपने में चित्त चुराय के 

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