Nato Nam Ko Mosu Tanak Na Todyo Jay

गाढ़ी प्रीति
नातो नाम को मोसूँ, तनक न तोड्यो जाय
पानाँ ज्यूँ पीली पड़ी रे, लोग कहै पिंड रोग
छाने लँघन मैं कियो रे, श्याम मिलण के जोग
बाबुल वैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हाँरी बाँह
मूरख वैद मरम नहि जाणे, दरद कलेजे माँह
जाओ वैद घर आपणे रे, म्हाँरो नाम न लेय
‘मीराँ’ तो है जरी विरह की, काहे कूँ औषध देय
माँस तो तन को छीजिया रे, शक्ति जरा भी नाहिं
आँगुलियाँ की मूँदड़ी म्हारे, आवण लागी बाँहि

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