प्रतीक्षा
सुनी मैं हरि आवन की अवाज
महल चढ़ि चढ़ि देखूँ मोरी सजनी, कब आवे महाराज
दादुर मोर पपीहा बोलै, कोयल मधुरे साज
उमग्यो बदरा चहुँ दिस बरसे, दामिनि छोड़ी लाज
धरती रूप नवा नवा धरिया, इंद्र मिलन के काज
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, बेग मिलो महाराज

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