Swamin Pashupate Prabho Das Ke Pas Chudao

शिवाशीव स्तुति
स्वामिन्! पशुपति! प्रभो! दास के पास छुड़ाओ
जगदम्बा! माँ! उमा वत्स कूँ हृदय लगाओ
भटक्यो जग महँ जनक! शरन चरनन महँ दीजे
माँ! अब गोद बिठाय चूमि मुख सुत कूँ लीजे
यद्यपि हौं अति अधमहूँ, तऊ पिता! अपनाइ लैं
मैं जो साधन रहित सुत, कूँ हिय तें चिपकाइ लैं

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