Man Main Shubh Sankalp Ho

अभिलाषा
मन में शुम संकल्प हों, शुरू करूँ जब काम
सर्वप्रथम सुमिरन करूँ, नारायण का नाम
मनोवृत्ति वश में रहे, कार्यसिद्धि को पाय
ऋद्धि-सिद्धि गणपति सहित, पूजूँ विघ्न न आय
नहीं चाहिये जगत् या राज्य स्वर्ग सुख-भोग
प्राणिमात्र का दुख हरूँ, सुखी रहें सब लोग
सभी रोग से रहित हों, सबका हो कल्याण
दीन दुखी कोई न हो, भरें खेत, खलिहान
नहीं कामना स्वर्ग की, ना चाहूँ निर्वाण
राजपाट नहिं चाहता, सबका हो कल्याण
गो, ब्राह्मण का हो भला, सभी सुखी हों लोग
पृथ्वी का पालन करें, शासक करें न भोग
नहीं किसी से बैर हो, और नहीं हो मोह
रहे सदा यह भावना, प्राणिमात्र से छोह
शुभ ही देखें नयन से, सुनें शब्द शुभ कान
पूर्ण आयु होकर जियें, सेवा कर्म महान् 

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