Aaj Grah Nand Mahar Ke Badhai

जन्मोत्सव
आज गृह नंद महर के बधाई
प्रात समय मोहन मुख निरखत, कोटि चंद छवि छाई
मिलि ब्रज नागरी मंगल गावति, नंद भवन में आई
देति असीस, जियो जसुदा-सुत, कोटिन बरस कन्हाई
अति आनन्द बढ्यौ गोकुल में, उपमा कही न जाई
‘सूरदास’ छवि नंद की घरनी, देखत नैन सिराई

Aaj Sakhi Raghav Ki Sudhi Aai

स्मृति
आज सखि! राघव की सुधि आई
आगे आगे राम चलत है, पीछे लक्ष्मण भाई
इनके बीच में चलत जानकी, चिन्ता अधिक सताई
सावन गरजे भादों बरसे,पवन चलत पुरवाई
कौन वृक्ष तल भीजत होंगे, राम लखन दोउ भाई
राम बिना मोरी सूनी अयोध्या, लक्ष्मण बिन ठकुराई
सीता बिन मोरी सूनी रसोई, महल उदासी छाई

Aaj Jo Harihi N Shastra Gahau

भीष्म प्रतिज्ञा
आज जो हरिहिं न शस्त्र गहाऊँ
तौं लाजौं गंगा-जननी को, सांतनु-सुत न कहाऊँ
स्यंदन खंडि महारथ खंडौं, कपिध्वज सहित डुलाऊँ
इती न करो सपथ मोहिं हरि की, क्षत्रिय-गतिहि न पाऊँ
पांडव-दल सन्मुख हौं धाऊँ, सरिता रुधिर बहाऊँ
‘सूरदास’ रण-भूमि विजय बिनु, जियत न पीठ दिखाऊँ

Aaj Sakhi Nandnandan Pragate

श्रीकृष्ण प्राकट्य
आजु सखी, नँद-नंदन प्रगटे, गोकुल बजत बधाई री
कृष्णपक्ष की अष्टमी भादौ, योग लग्न घड़ी आई री
गृह-गृह ते सब बनिता आई, गावत गीत बधाई री
जो जैसे तैसे उठि धाई, आनन्द उर न समाई री
चौवा चन्दन और अरगजा, दधि की कीच मचाई री
बन्दीजन सुर नर गुन गावें, शोभा बरनि न जाई री
‘चन्द्रसखी’ भज बालकृष्ण छबि, चरन कमल चित लाई री  

Aaj Barsane Bajat Badhai

श्री राधा प्राकट्य
आज बरसाने बजत बधाई
प्रगट भई वृषभानु गोप के सबही को सुखदाई
आनँद मगन कहत युवती जन, महरि बधावन आई
बंदीजन, मागध, याचक, गुन, गावत गीत सुहाई
जय जयकार भयो त्रिभुवन में, प्रेम बेलि प्रगटाई
‘सूरदास’ प्रभु की यह जीवन-जोरी सुभग बनाई

Aaj Sakhi Rath Baithe Nandlal

रथ-यात्रा
आज सखी, रथ बैठे नंदलाल
अति विचित्र पहिरे पट झीनो,उर सोहत वन-माल
वामभाग वृषभानु-नंदिनी, पहिर कसूंभी सारी
तैसोई घन उमड्यो चहुँ दिशि, गरजत है अति भारी
सुन्दर रथ मणि-जटित मनोहर, अनुपम है सब साज
चपल तुरंग चलत धरणी पे, रह्यो घोष सब गाज
ताल पखावज बीन बाँसुरी, बाजत परम रसाल
‘गोविंददास’ प्रभु पे बरखत, विविध कुसुम ब्रजबाल

Aaj Vrashbhanu Geh Anand

श्री राधा जन्मोत्सव
आज वृषभानु गेह आनन्द
वदन प्रभा सी लागत मानो, प्रगट्यो पूरन-चंद
बजे बाजने नाचे गाये, कोइ सुनावत टेर
सुनि सब नारि बधावन आई, किये बिना कछु देर
नंदराय अरु जसुमति रानी, न्योता पा चलि आये
सुनतहि सबन भरे आनंद में, हुलसि भेंट को लाये
अपने अपने मन को भाये, करत सकल ब्रज लोग
‘सूरदास’, प्रगटी पृथ्वी पर, भक्तजन के हितजोग

Jo Karna Ho Karlo Aaj Hi

वर्तमान
जो करना हो कर लो आज ही
अनुकूल समय का मत सोचो, मृत्यु का कुछ भी पता नहीं
चाहे भजन ध्यान या धर्म कार्य, इनमें विलम्ब हम नहीं करें
सत्कार्य जो सोचा हो मन में, कार्यान्वित वह तत्काल करे
वैभव नहिं शाश्वत, तन अनित्य, शुभ कर्मों में मन लगा रहे
कल करना हो वह आज करे, संभव शरीर कल नहीं रहे

Aaj Hari Adbhut Ras Rachayo

रास लीला
आज हरि अद्भुत रास रचायो
एक ही सुर सब मोहित कीन्हे, मुरली नाद सुनायो
अचल चले, चल थकित भये सबम मुनि-जन ध्यान भुलायो
चंचल पवन थक्यो नहि डोलत, जमुना उलटि बहायो
थकित भयो चंद्रमा सहित मृग, सुधा-समुद्र बढ़ायो
‘सूर’ श्याम गोपिन सुखदायक, लायक दरस दिखायो

Nand Grah Bajat Aaj Badhai

श्रीकृष्ण प्राकट्य
नंद गृह बाजत आज बधाई
जुट गई भीर तभी आँगन में, जन्मे कुँवर कन्हाई
दान मान विप्रन को दीनो, सबकी लेत असीस
पुष्प वृष्टि सब करें, देवगण जो करोड़ तैंतीस
व्रज-सुंदरियाँ सजी धजी, कर शोभित कंचन थाल
‘परमानंद’ प्रभु चिर जियो, गावत गीत रसाल