Aaj Vrashbhanu Geh Anand

श्री राधा जन्मोत्सव
आज वृषभानु गेह आनन्द
वदन प्रभा सी लागत मानो, प्रगट्यो पूरन-चंद
बजे बाजने नाचे गाये, कोइ सुनावत टेर
सुनि सब नारि बधावन आई, किये बिना कछु देर
नंदराय अरु जसुमति रानी, न्योता पा चलि आये
सुनतहि सबन भरे आनंद में, हुलसि भेंट को लाये
अपने अपने मन को भाये, करत सकल ब्रज लोग
‘सूरदास’, प्रगटी पृथ्वी पर, भक्तजन के हितजोग

Nand Ghar Aaj Bhayo Anand

श्री कृष्ण प्राकट्य
नन्द घर आज भयो आनन्द
मातु यशोदा लाला जायो, ज्यों पूनों ने चन्द
गोपी गोप गाय गायक-गन, सब हिय सरसिज वृन्द
नन्दनँदन रवि उदित भये हिय, विकसे पंकज वृन्द
वसुधा मुदित समीर बहत वर, शीतल मन्द सुगन्ध
गरजत मन्द मन्द घन नभ महँ, प्रकटे आनँद कन्द
माया बन्धु सिन्धु सब सुख के, स्वयं सच्चिदानन्द
‘प्रभु’ के प्रभु विभु विश्वविदित वर, काटैं यम के फन्द

Aaj Braj Main Chayo Anand

श्रीकृष्ण प्राकट्य
आज व्रज में छायो आनन्द
नंद महर घर ढोटा आयो, पूरण परमानंद
विविध भाँति बाजे बाजत हैं, वेद पढ़त द्विज-वृंद
छिरकत दूध दही घृत माखन, मोहन-मुख अरविन्द
देत दान ब्रजराज मगन मन, फूलत नाहिं समाय
देते असीस सबहिं जन ब्रज के, बार-बार बलि जाय

Anand Adhik Hai Bhakti Main

भक्ति-भाव
आनन्द अधिक है भक्ति में
आकर्षण ऐसा न त्याग में, योग, ज्ञान या यज्ञों में
गोदी में बैठ यशोदा के, जो माँ का मोद बढ़ाते
वे बिना बुलाये प्रायः ही, पाण्डव के घर प्रभु आते
रुक्मिणी के हित व्याकुल इतने, सो नहीं रात्रि में पाते
वे लगते गले सुदामा के तो अश्रु प्रवाहित होते
गोपीजन के संग रास रचे, वे माता से बँध जाते
हम करें भक्ति ऐसे प्रभु की, भवनिधि से पार लगाते

Anand Kand Shri Krishna Chandra

श्रीकृष्ण सौन्दर्य
आनन्दकन्द श्री कृष्णचन्द्र, सिर मोर-मुकुट की छवि न्यारी
मुसकान मधुर चंचल चितवन, वह रूप विलक्षण मनहारी
कटि में स्वर्णिम पीताम्बर है, शोभा अपूर्व अति सुखकारी
जो कामकला के सागर हैं, नटनागर यमुना-तट चारी
वंशी की मधुर ध्वनि करते, संग में श्री राधा सुकुमारी
गोवर्धन धारण की लीला, वर्णनातीत अति प्रियकारी
कालियानाग के मस्तक पर, वे नृत्य करें विस्मयकारी
हे नारायण, अच्युत, केशव, गोपी-वल्लभ मंगलकारी
हे कर्णधार भवसागर के, हे पूर्णकाम कलिमल हारी

Nand Ghar Pragte Anand Kand

श्रीकृष्ण प्राकट्य
नन्द घर प्रकटे आनँद कंद
हुआ पुत्र यशुमति मैया को, छायो परमानन्द
जात कर्म संस्कार हो गया, विपुल दियो है दान
भेंट करें सब ग्वाल गोपियाँ, गाये मंगल गान
दुन्दुभियाँ भेरी भी बाजे, करें मंगलाचार
सजे सभी घर ब्रज मण्डल में, शोभित वन्दनवार
आगन्तुक को रोहिणी मैया, करें जहाँ सत्कार
नन्दमहल में ऋद्धि सिद्धियाँ, छाई सभी प्रकार