Gwalin Jo Dekhe Ghar Aay

माखन चोरी
ग्वालिन जो देखे घर आय
माखन खाय चुराय श्याम तब, आपुन रही छिपाय
भीतर गई तहाँ हरि पाये, बोले अपने घर मैं आयो
भूल भई, गोरस में चींटी, काढ़न में भरमायो
सुन-सुन वचन चतुर मोहन के, ग्वालिनि मुड़ मुसकानी
‘सूरदास’ प्रभु नटनागर की, सबै बात हम जानी

Braj Ghar Ghar Pragati Yah Bat

माखन चोरी
ब्रज घर-घर प्रगटी यह बात
दधि-माखन चोरी करि ले हरि, ग्वाल-सखा सँग खात
ब्रज-बनिता यह सुनि मन हर्षित, सदन हमारें आवैं
माखन खात अचानक पावैं, भुज हरि उरहिं छुवावै
मन ही मन अभिलाष करति सब, ह्रदय धरति यह ध्यान
‘सूरदास’ प्रभु कौं हम दैहों, उत्तम माखन खान

Ghar Aavo Pritam Pyara

विरह व्यथा
घर आओ प्रीतम प्यारा, अब आओ प्रीतम प्यारा
है तुम बिन सब जग खारा, घर आओ प्रीतम प्यारा
तन मन धन सब भेंट करूँ, व भजन करूँ मैं थारा
तुम गुणवंत बड़े नटनागर, मोमें औगुण न्यारा
मैं निगुणी कुछ गुण तो नाहीं, तुम में ही गुण सारा
‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, बिन दर्शन दुख भारा

Mere Ghar Aao Sundar Shyam

विरह व्यथा
मेरे घर आवो सुन्दर श्याम
तुम आया बिन सुख नहीं मेरे, पीरी परी जैसे पान
मेरे आसा और न स्वामी, एक तिहारो ही ध्यान
‘मीराँ’ के प्रभु वेग मिलो अब, राखोजी मेरो मान

Main Giridhar Ke Ghar Jau

प्रगाढ़ प्रीति
मैं गिरिधर के घर जाऊँ
गिरिधर म्हाँरो साँचो प्रीतम, देखत रूप लुभाऊँ
रैन पड़ै तब ही उठ जाऊँ, भोर भये उठि आऊँ
रैन दिना वाके सँग खेलूँ, ज्यूँ त्यूँ ताहि रिझाऊँ
जो पहिरावै सोई पहिरूँ, जो दे सोई खाऊँ
मेरी उनकी प्रीति पुरानी, उन बिन पल न रहाऊँ
जहाँ बैठावे तितही बैठूँ, बेचे तो बिक जाऊँ
‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, बार बार बलि जाऊँ

Mhare Ghar Aao Pritam Pyara

आओ प्रीतम
म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा, जग तुम बिन लागे खारा
तन-मन धन सब भेंट धरूँगी, भजन करूँगी तुम्हारा
तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये, मोमें औगुण सारा
मैं निगुणी कछु गुण नहिं जानूँ, ये सब बगसण हारा
‘मीराँ’ कहे प्रभु कब रे मिलोगे, तुम बिन नैण दुखारा

Pritam Aaye Pritam Aaye Aaj Mere Ghar Pritam Aaye

हरि दर्शन
प्रीतम आए प्रीतम आये, आज मेरे घर प्रीतम आये
रहत रहत मैं अँगना बुहारूँ, मोतियाँ माँग भराऊँ, भराऊँ
चरण पखार देख सुख पाऊँ, सब साधन बरसाऊँ
पाँच सखी मिल मंगल गाये, राग सरस मैं गाऊँ
करूँ आरती, प्रेम निछावर, पल-पल मैं बलि जाऊँ
कहे ‘कबीर’ धन भाग हमारा, परम पुरुष वर पाऊँ

Nand Ghar Aaj Bhayo Anand

श्री कृष्ण प्राकट्य
नन्द घर आज भयो आनन्द
मातु यशोदा लाला जायो, ज्यों पूनों ने चन्द
गोपी गोप गाय गायक-गन, सब हिय सरसिज वृन्द
नन्दनँदन रवि उदित भये हिय, विकसे पंकज वृन्द
वसुधा मुदित समीर बहत वर, शीतल मन्द सुगन्ध
गरजत मन्द मन्द घन नभ महँ, प्रकटे आनँद कन्द
माया बन्धु सिन्धु सब सुख के, स्वयं सच्चिदानन्द
‘प्रभु’ के प्रभु विभु विश्वविदित वर, काटैं यम के फन्द

Radha Ghar Kanan Main Radha

जीवन सर्वस्व राधा
राधा घर, कानन में राधा, राधा नित यमुना के तीर
राधा मोद, प्रमोद राधिका, राधा बहै नयन बन नीर
राधा प्राण बुद्धि सब राधा, राधा नयनों की तारा
राधा ही तन मन में छाई, प्रेमानंद सुधा धारा
राधा भजन, ध्यान राधा ही, जप तप यज्ञ सभी राधा
राधा सदा स्वामिनी मेरी, परमाराध्या श्रीराधा

Nath Kaise Bali Ghar Yachan Aaye

वामन अवतार
नाथ कैसे बलि घर याचन आये
बलिराजा रणधीर महाबल, इन्द्रादिक भय खाये
तीन लोक उनके वश आये, निर्भय राज चलाये
वामन रूप धरा श्री हरि ने, बलि के यज्ञ सिधाये
तीन चरण पृथ्वी दो राजन! कुटिया चाहूँ बनायें
बलि ने दान दिया जैसे ही तत्क्षण रूप बढ़ाये
तीन लोक में पैर पसारे, बलि पाताल पठाये
चरण-कमल से गंगा निकली, देव पुष्प बरसाये
‘ब्रह्मानंद’ भक्त हितकारी, दानव गर्व नसाये